एक गांव में बच्चों के पढने के।
लिए स्कूल नही था।उस गांव में।
बच्चे बहुत दूर नाव के सहारे ,नदी।
पार कर ,अपनी जान जोखिम में।
डाल कर बच्चे स्कूल पढने जाया।
करते थे।....
और फिर एक दिन गांव के लोग
इकट्ठा हुए और आपस मे बिचार,
किया कि हम लोग थोडा ,थोडा
पैसा ,चन्दा लगा कर गांव के पास ,
जो थोडी सी जमीन पडी हुई हैं ,उसी
पर छोटा सा स्कूल बना लिया जाय।
गांव के सभी लोग राजी हो गये।
गांव के सरपंच, और लेखपाल, सेक्रेट्री,
को बुलाया गया।यह सभी लोग आये
जमीन देखी गयी,और उस जमीन की
पैमाइस की गयी।....
और फिर गांव के सभी लोगों ने,
अपने अपने पास से ,थोडा थोडा पैसा,
₹पया ,देकर ढेर सा पैसा इकट्ठा किया।
फिर उस इकट्ठा किया हुआ पैसा से
समान मगाया गया।और फिर निमार्ण का
काम चलू कर दिया गया।
उस गांव के महिला, पुरुषों ने मिलकर
अपना श्रम दान भी दिया।और काम तेजी
से होने लगा।
दूसरे दिन सभी लोग काम कर रहे थे,
पर रामू मुह लटकाकर खडा हुआ था।
तब वहां पर खडा हुआ देखकर सेक्रेट्री
ने पूछा,अरे रामू का हुआ तुम ऐसे,काहे
को खडे हुऐ हो,जाओ काम करो....
तब रामू बोला,...मुझे जोर से भूख
लगी हुई हैं।तब सेक्रेट्री ने अपने पास से
पैसे निकाल कर दिया और बोले जाओ
खाना खा आओ। तब रामू भागकर
जाता हैं और खाना खाकर वापस आता हैं।
तब रामू से सेक्रेटरी कहते हैं.....
अरे रामू अब तो तुम खाना भी..
खा लिए, अब काम पर लग जाओ..
रामू बोला...अभी नही, हमने खाना,
इतना अधिक खा लिया है कि हमारा
पेट भर गया हैं, अब थोडा आराम कर ले
तब हम काम करेंगे।।।
इसीलिए तो....
काम करने वाले काम करते हैं।
और काम न करने वालो के बहुत,
बहाने होते हैं।
उधर निर्माण कार्य कुछ दिन में पूरा
हो गया,और गांव के छोटे बच्चे उसी
स्कूल मे हसी खुशी पढने लगे....
इसी लिए तो कहते हैं.....
अनेकता से ऐकता ठीक होती हैं।
ऐकता मे बहुत बल होता हैं।।
🌲🌲🌲🌲🌲एक पौधा लगाओ......
🌲🌲🌲🌲🌲प्रयावरण वचाओ......।।