"माना कि आज के इस दौर मे
पैसा आगे आगे चल रहा हैं, और
इंसान उसके पीछै पीछे भागता
चला जा रहा है, पर इंसान अगर
सौ मे एक दो लोग इसे पा भी लेते
हैं तो इससे सारी सुख सुविधाएं नहीं
खरीद सकते हैं ,वह सुख सुविधाएं
हैं क्या आइए जानते हैं.....?
"पैसे से सुख खरीद सकते हैं"
पर शांति नही ।।
"पैसे से औरत खरीद सकते हैं"
पर पत्नी नही ।।
"पैसे से नौकर खरीद सकते हैं"
पर सेवक नही ।।
"पैसे से कलम खरीद सकते हैं"
पर विचार नही ।।
"पैसे से पाउडर खरीद सकते हैं"
पर सुन्दर ता नही ।।
"पैसे से दवा खरीद सकते हैं"
पर स्वास्थ्य नहीं ।।
"पैसे से आदमी खरीद सकते हैं"
पर वफादारी नहीं ।।
"पैसे से ऐनक खरीद सकते हैं"
पर आँखे नहीं ।।
"पैसे से भोजन खरीद सकते हैं"
पर भूख नहीं ।।
"पैसे से विस्तर खरीद सकते है"
पर नीद नहीं ।।
इंसान कमाता तो है,
पर हर इंसान के पास,
हर सुख सुविधा उपलब्ध,
नहीं होता हैं, कुछ न कुछ,
उसके पास कमी अवश्य,
रहती हैं ,?/₹₹₹₹₹₹
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पैसा आगे आगे चल रहा हैं, और
इंसान उसके पीछै पीछे भागता
चला जा रहा है, पर इंसान अगर
सौ मे एक दो लोग इसे पा भी लेते
हैं तो इससे सारी सुख सुविधाएं नहीं
खरीद सकते हैं ,वह सुख सुविधाएं
हैं क्या आइए जानते हैं.....?
"पैसे से सुख खरीद सकते हैं"
पर शांति नही ।।
"पैसे से औरत खरीद सकते हैं"
पर पत्नी नही ।।
"पैसे से नौकर खरीद सकते हैं"
पर सेवक नही ।।
"पैसे से कलम खरीद सकते हैं"
पर विचार नही ।।
"पैसे से पाउडर खरीद सकते हैं"
पर सुन्दर ता नही ।।
"पैसे से दवा खरीद सकते हैं"
पर स्वास्थ्य नहीं ।।
"पैसे से आदमी खरीद सकते हैं"
पर वफादारी नहीं ।।
"पैसे से ऐनक खरीद सकते हैं"
पर आँखे नहीं ।।
"पैसे से भोजन खरीद सकते हैं"
पर भूख नहीं ।।
"पैसे से विस्तर खरीद सकते है"
पर नीद नहीं ।।
इंसान कमाता तो है,
पर हर इंसान के पास,
हर सुख सुविधा उपलब्ध,
नहीं होता हैं, कुछ न कुछ,
उसके पास कमी अवश्य,
रहती हैं ,?/₹₹₹₹₹₹
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