एक समय की बात है।
किसी रास्ते से ,इधर से,
दु:ख जी जा रहे थे,और ,
उसी रास्ते से उधर से सु:ख,
जी चले आ रहे थे। कि उसी,
रास्ते पर एक तिराहा था,उसी,
तिराहे पर दु:ख और सु:ख दोनो,
की मुलाकात हती है। दु:ख ने सु:ख,
से कहा,तुम कितने भाग्य शाली हो,
जो लोग तुमको पाने की कोशिश,
मे लगे रहते हैं।तब सु:ख ने,
हसते हुऐ कहा...भाग्य शाली मै,
नही तुम हो....तब दु:ख ने हैरानी,
से पूछा, भाई वह कैसे.... तब सु:ख,
ने बडी ईमानदारी से जबाब दिया......,
यह ऐसे कि , .......
"तुमको पाकर लोग "
"अपनो को याद करते हैं"
"लेकिन मुझको पाकर"
"सब अपनो को भूल जाते हैं"
किसी रास्ते से ,इधर से,
दु:ख जी जा रहे थे,और ,
उसी रास्ते से उधर से सु:ख,
जी चले आ रहे थे। कि उसी,
रास्ते पर एक तिराहा था,उसी,
तिराहे पर दु:ख और सु:ख दोनो,
की मुलाकात हती है। दु:ख ने सु:ख,
से कहा,तुम कितने भाग्य शाली हो,
जो लोग तुमको पाने की कोशिश,
मे लगे रहते हैं।तब सु:ख ने,
हसते हुऐ कहा...भाग्य शाली मै,
नही तुम हो....तब दु:ख ने हैरानी,
से पूछा, भाई वह कैसे.... तब सु:ख,
ने बडी ईमानदारी से जबाब दिया......,
यह ऐसे कि , .......
"तुमको पाकर लोग "
"अपनो को याद करते हैं"
"लेकिन मुझको पाकर"
"सब अपनो को भूल जाते हैं"

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