राजा के दरबार में एक सनकी सेवक
रहता था।राजा ने उसे अपने काफी
नजदीक रहता था।वह राजा का वफादार
सेवक था।वह राजा की खूब सेवा
करता था। राजा भी उस सेवक की
वफादारी से खूब खुश रहता था।
एक दिन की बात है,
राजा अपने कमरे मे
आराम कर रहे थे।और
वह वफादार सेवक
राजा को पंखे हाक रहा
था।तभी राजा के ऊपर
एक मंखी उड कर आकर
बैठ गयी।सेवक उसे उडाता
वह मंखी फिर आकर राजा
के कपडो पर आकर बैठ जाती।
तभी सेवक ने बगल रखा हुआ
एक डंडा अपने हाथ मे उठाया,
और जैसे ही मंखी दूबारा राजा
के ऊपर बैठी तभी सेवक ने
उस डंडे से राजा के ऊपर
जोरदार उस डंडे से वार किया
और फिर मंखी तो उड गयी,
लेकिन राजा को कफी गंभीर
चोटे आई,राजा बेहोश....
...इससे हमे यह सीख,
..मिलती है कि एक मूर्ख,
.से ठीक एक बुद्धिमान,
ठीक होता हैं।....
रहता था।राजा ने उसे अपने काफी
नजदीक रहता था।वह राजा का वफादार
सेवक था।वह राजा की खूब सेवा
करता था। राजा भी उस सेवक की
वफादारी से खूब खुश रहता था।
एक दिन की बात है,
राजा अपने कमरे मे
आराम कर रहे थे।और
वह वफादार सेवक
राजा को पंखे हाक रहा
था।तभी राजा के ऊपर
एक मंखी उड कर आकर
बैठ गयी।सेवक उसे उडाता
वह मंखी फिर आकर राजा
के कपडो पर आकर बैठ जाती।
तभी सेवक ने बगल रखा हुआ
एक डंडा अपने हाथ मे उठाया,
और जैसे ही मंखी दूबारा राजा
के ऊपर बैठी तभी सेवक ने
उस डंडे से राजा के ऊपर
जोरदार उस डंडे से वार किया
और फिर मंखी तो उड गयी,
लेकिन राजा को कफी गंभीर
चोटे आई,राजा बेहोश....
...इससे हमे यह सीख,
..मिलती है कि एक मूर्ख,
.से ठीक एक बुद्धिमान,
ठीक होता हैं।....

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