विहारी लाल के ठाठबाट
सबसे अलग ही था।सरकारी
सेवा में कार्य रत पूना के जलकल
विभाग में बढिया पोस्ट पर
नौकरी करते थे।
एक अधिकारी होने के नाते
उनको मालिन बस्ती में हो
रहे निर्माण कार्य की देखभाल
करने का अवसर मिला।
वहां जाकर पहले तो इन्होंने
इसे रूटीन काम की तरह
लिया.....
फिर उन्होंने वहाँ पर झोपड़ी
मे रहने वाले लोगों को और
उनके दैनिय स्थिति को अपनी
आखो से देखा।......
उनके रहन सहन और खान पान
को देखकर वह उस रात सो नही
पाये।.....
उनका मन उनको धिक्कार
ने लगा।कि वह शहर मे सारी
सुबिधाओं से सुसज्जित,
अच्छे मकान में रहतें हैं।
अच्छा भोजन करते हैं।
अच्छे कपडे पहनते हैं।
बढिय़ा गाडी से चलते हैं।
बेहतर ढंग से जीवन यापन,
करते हैं।....
...जबकि यह गरीब रात दिन
...मेहनत करते हैं, इसके
...बावजूद भी यह दो वक्त
...की रोटी भी नहीं जुटा पाते।
...यह सब कुछ वह देखकर
..उनका हदय और मन झकझोर
..उठा...
अगले ही दिन वह अपने
विभाग में जाकर अपने पद
से त्याग पत्र दे दिया....
..तथा गरीब और वंचितों,
..की सेवा का संकल्प लेकर ,
..रचनात्मक कार्यों में जुट,
.गये। और फिर उन्होंने अपना
.जीवन ही गरीबों की सेवा मे
....लगा दिया....
.....................।।।।।।............
जिन्दगी बहुत छोटी होती हैं।
हम चाहे तो, इसे लोगों के,
साथ साझा करे,या खुशियां।।
...................।।।।।..............
सबसे अलग ही था।सरकारी
सेवा में कार्य रत पूना के जलकल
विभाग में बढिया पोस्ट पर
नौकरी करते थे।
एक अधिकारी होने के नाते
उनको मालिन बस्ती में हो
रहे निर्माण कार्य की देखभाल
करने का अवसर मिला।
वहां जाकर पहले तो इन्होंने
इसे रूटीन काम की तरह
लिया.....
फिर उन्होंने वहाँ पर झोपड़ी
मे रहने वाले लोगों को और
उनके दैनिय स्थिति को अपनी
आखो से देखा।......
उनके रहन सहन और खान पान
को देखकर वह उस रात सो नही
पाये।.....
उनका मन उनको धिक्कार
ने लगा।कि वह शहर मे सारी
सुबिधाओं से सुसज्जित,
अच्छे मकान में रहतें हैं।
अच्छा भोजन करते हैं।
अच्छे कपडे पहनते हैं।
बढिय़ा गाडी से चलते हैं।
बेहतर ढंग से जीवन यापन,
करते हैं।....
...जबकि यह गरीब रात दिन
...मेहनत करते हैं, इसके
...बावजूद भी यह दो वक्त
...की रोटी भी नहीं जुटा पाते।
...यह सब कुछ वह देखकर
..उनका हदय और मन झकझोर
..उठा...
अगले ही दिन वह अपने
विभाग में जाकर अपने पद
से त्याग पत्र दे दिया....
..तथा गरीब और वंचितों,
..की सेवा का संकल्प लेकर ,
..रचनात्मक कार्यों में जुट,
.गये। और फिर उन्होंने अपना
.जीवन ही गरीबों की सेवा मे
....लगा दिया....
.....................।।।।।।............
जिन्दगी बहुत छोटी होती हैं।
हम चाहे तो, इसे लोगों के,
साथ साझा करे,या खुशियां।।
...................।।।।।..............
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