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बुधवार, 4 दिसंबर 2019

अनुशासन की प्रथम पाठशाला

अनुशासन काअर्थ है,
       शासन .....ब्यवस्था के
अनुसार जीवन यापन करना।
यदि कोई ब्यवस्था निश्चित हैं,
तो उसके अनुसार जीना।
    जीवन मे कोई नियम ब्यवस्था,
या क्रम बनाना।
  अनुशासन जीवन को चुस्त दुरुस्त
बना देता है।
इससे कार्य कुशलता बढती हैं।
 समय का पूरा पूरा सदुपयोग होता हैं।
      अनुशासन का पहले पहल
परिवार से सीखा जाता हैं।
यदि परिवार में सब कार्य ब्यवस्था से
किये जाते हैं तो बच्चा भी अनुशासन
सीख जाता हैं।
इसलिए मनुष्य को सबसे पहले
अपना घर अनुशासित होनी चाहिए।
    सामाजिक जीवन में अनुशासन होना
अनिवार्य है। जैसे ‌‌‌‌,,,
     गाड़ी, बसे, स्कूल, कार्यालय,
सभी समय से खुले,,,
समय से बन्द हो।
    कर्मचारी ठीक समय पर अपने अपने
स्थान पर कार्य के लिए तैयार हो।
   यहां पर टालमटोल न हो।
  इसी के साथ छात्र भी समाजिक
कार्यो में यथासमय पर पहुंचे।
वेवहां की सारी नियम ब्यवस्था
 का पालन करें।
वास्तव में अनुशासन एक स्वभाव है।
     एक ज्ञान है।
जीवन को समधुर सुविधा पूरा करना।
वह न केवल स्वच्छता पर ध्यान
देता है, अपनी बोलचाल और ब्बयवहार
पर भी ध्यान देता है।
     इस प्रकार,,,,
  अनुशासन जीवन मूल्य है।
मनुष्य का आर्दश है।

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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