यह दुनिया भी कितनी निराली हैं।
कैसे कैसे विचार धारा और सोच के
लोग रहते हैं।
?...जिनकी आँखो मे नींद है,..
.....उनके पास अच्छा विस्तर नहीं है...
...जिनके पास अच्छा विस्तर हैं....
...उनकी आँखो मे नींद नहीं.........
आज के इस दौर मे अच्छी सोच,और
सही विचार धारा के लोग बहुत कम मिलेंगे।
?...जिनके मन मे दया हैं........
....उनके पास खर्च करने के लिए धन नही...
...जिनके पास खर्च करने के लिए धन हैं..
...उनके मन मे दया नहीं हैं.......
यह रिश्ते भी अजीब होते हैं, किसी को
बाखूब निभाना आता है, तो कोई इस
रिश्ते की कदर नही करत और निभा
नही पाता।
?...जिन्हें कद्र हैं रिश्ते की....
...उनसे कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता है...
...जिनसे रिश्ता रखना चाहता हैं.....
....उन्हें कद्र नहीं है रिश्तो की........
यह पेट की भूख भी अजीब होती हैं।
कोई भर पेट भोजन कर आराम के,
विस्तर पर सोता हैं, तो किसी को भोजन
नसीब नहीं होता, वह भूखो पेट सो जाता हैं।।
?...जिनको भूख हैं......
.....उनके पास खाने के लिए भोजन नही है...
.....जिनके पास खाने के लिए भोजन है...
.....उनको भूख नही हैं........
यह इंसानी रिश्ता भी अजीब होता हैं,
कोई अपनें के लिए आधा पेट भोजन करता हैं,
तो कोई भोजन के लिए ही,अपनो से
रिश्ता तोड़ देता हैं।
?...कोई अपनो के लिए .....
....रोटी छोड देता हूँ......
....तो कोई रोटी के लिए.....
....अपनो को छोड देता हैं......
...बिना सघर्ष के इंसान....
...चमक नही सकता....
.....जो जलेगा उस दिये मे.....
...तो उजाला होगा ही.......
...उदास होने के लिए....
...उम्र पडी हैं.......
...नजर उठाओ .....
...सामने जिन्दगी खडी हैं........
...अपनी हसीं को होठोँ से मत जाने देना...।
...आप की मुस्कुराहट के पीछे, दुनिया पडी हैं...।
कैसे कैसे विचार धारा और सोच के
लोग रहते हैं।
?...जिनकी आँखो मे नींद है,..
.....उनके पास अच्छा विस्तर नहीं है...
...जिनके पास अच्छा विस्तर हैं....
...उनकी आँखो मे नींद नहीं.........
आज के इस दौर मे अच्छी सोच,और
सही विचार धारा के लोग बहुत कम मिलेंगे।
?...जिनके मन मे दया हैं........
....उनके पास खर्च करने के लिए धन नही...
...जिनके पास खर्च करने के लिए धन हैं..
...उनके मन मे दया नहीं हैं.......
यह रिश्ते भी अजीब होते हैं, किसी को
बाखूब निभाना आता है, तो कोई इस
रिश्ते की कदर नही करत और निभा
नही पाता।
?...जिन्हें कद्र हैं रिश्ते की....
...उनसे कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता है...
...जिनसे रिश्ता रखना चाहता हैं.....
....उन्हें कद्र नहीं है रिश्तो की........
यह पेट की भूख भी अजीब होती हैं।
कोई भर पेट भोजन कर आराम के,
विस्तर पर सोता हैं, तो किसी को भोजन
नसीब नहीं होता, वह भूखो पेट सो जाता हैं।।
?...जिनको भूख हैं......
.....उनके पास खाने के लिए भोजन नही है...
.....जिनके पास खाने के लिए भोजन है...
.....उनको भूख नही हैं........
यह इंसानी रिश्ता भी अजीब होता हैं,
कोई अपनें के लिए आधा पेट भोजन करता हैं,
तो कोई भोजन के लिए ही,अपनो से
रिश्ता तोड़ देता हैं।
?...कोई अपनो के लिए .....
....रोटी छोड देता हूँ......
....तो कोई रोटी के लिए.....
....अपनो को छोड देता हैं......
...बिना सघर्ष के इंसान....
...चमक नही सकता....
.....जो जलेगा उस दिये मे.....
...तो उजाला होगा ही.......
...उदास होने के लिए....
...उम्र पडी हैं.......
...नजर उठाओ .....
...सामने जिन्दगी खडी हैं........
...अपनी हसीं को होठोँ से मत जाने देना...।
...आप की मुस्कुराहट के पीछे, दुनिया पडी हैं...।

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