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गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

एक बेटी का खत

एक पिता कहता है कि, बेटी हमें
अफसोस है कि तुम इस देश में
पैदा हु ई है। जहां लोग एक जुर्म
छुपाने के लिए,दूसरे जुर्म का सहारा
लेते हैं। जहां पीड़ित पीड़िता के
बजाय अपराधी और उसका धर्म
महत्व पूर्ण हो जाता है।
     औरत के शरीर के भूगोल
को देखने वाला हमारा समाज
पता नहीं उनकी आत्मा को क्यों
नहीं देख पाता।
  आप को पता है ,औरते चुप क्यों
रहती हैं, क्यों कि बोलना उन्हें
बचपन से ही सिखाया ही नहीं जाता।
      अगर वे आवाज ऊंची करके
बोलती हैं तो उनको धीमा बोलना
सिखाया जाता है।
    जहां तुम परी बनकर उतरी
थी वहां नारी को देवी मानकर
पूजा करना एक ढोंग है।
     तुम जैसे करोड़ों बेटियों
ने यहां पर जन्म लेकर गलती की है ‌।
       यहां राजनैतिक यह आर्थिक
बदला लेने के लिए बेटियों को ही
चुना जाता है।
   आपबीती सुनाने में
बेझिझक शब्द फूटते नहीं
गले से ।
   अपनी सखी सहेलियों से से ही
कह पाती है।


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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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