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सोमवार, 23 सितंबर 2019

यह जिन्दगी

जिन्दगी एक अभिलाषा हैं।
गजब इसकी परिभाषा हैं।।
जिन्दगी कैसे हैं, मत पूछो।
सवर गयी तो तकदीर,
         और
बिगड गयी ,तो
तमाशा हैं।।
  यह जिन्दगी अजीब है।
सपने तो सब देखते हैं,
ऊची उडान सब कोई ,
उडना चाहता हैं, पर
दौडते तो सब हैं, लेकिन
इस दौड मे ,पहला स्थान
केवल एक ही को मिलता
हैं।ठीक उसी तरह सब लोग आगे
निकलना चाहते हैं।पर कोई हाथ
उठाकर आसमान को छू लेता हैं
तो कोई पीछे रह जाता हैं।
 ऐसे लोगों को केवल इतना
समझाने की आवश्यकता है
कि उनका जीवन सही वने
या बुरा इसका निणर्य पूरी
तरह उसे खुद ही करना हैं।
  उसे य उस जैसे मानवो
को य तो स्यम की विचार
मेधा के सहारे अथवा किसी
को विवेक वान आदमी के
शिक्षण द्धारा निरंतर मनन
करना होगा,कि जीवन काल
मे किसी भी मनुष्य की विफलताऐ
भूल जाने वाले दु:ख दर्द और
       सुख शांति
पाने मे किसी भी प्रकार
की मदद नही कर सकते।

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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