" एक समय की बात है,
महाराजा "विजय सिंह"
अपने सिपाहियों के साथ
सैर पर जा रहे थे।तभी
अचानक एक ढेला आकर
राजा के सर पर लगा।राजा
को बहुत ज्यादा कष्ट हुआ।
तव सैनिकों ने देखा ढेला
किधर से आया,उसने देखा
कि पास खडी हुई एक बुढिया
पके हुऐ आम के फल को ढेले
से तोड रही थी। तभी सैनिकों
ने उसे पकड लिया।
और बुढिया को महराजा के
सामने लाया गया।वह डरी हुई
थी।बुढिया ने हाथजोडकर
विनती करते हुऐ कहा,....
, महराज मेरा बेटा दो दिनो
से भूखा है।हमने पके हुए आम
के फल को देखकर ढेला मारा था।
ढेला लगने से पका हुआ आम गिर जाता
तभी आप बीच में आ गये।
..,मै यह ढेला आप को नही मारना
चाहती थी,मुझे क्षमा कर लीजिए।
,,,,महाराजा ने बुढिया की बात को
सुन कर अपने सैनिकों से कहा....
" इसे खाने के समान के साथ कुछ
धन देकर इज्ज़त से घर भेज दो।
सैनिकों ने पूछा....सरकार इसे तो
इस अपराध का दंड मिलना चाहिए।
राजा ने कहा....जब ढेले की चोट
खाकर पेड़ सुन्दर फल दे सकता हैं,
"तो मै एक बुद्धि वाला प्राणी होकर
सजा कैसे दे सकता हूँ?/।ःःःःःःःः
महाराजा "विजय सिंह"
अपने सिपाहियों के साथ
सैर पर जा रहे थे।तभी
अचानक एक ढेला आकर
राजा के सर पर लगा।राजा
को बहुत ज्यादा कष्ट हुआ।
तव सैनिकों ने देखा ढेला
किधर से आया,उसने देखा
कि पास खडी हुई एक बुढिया
पके हुऐ आम के फल को ढेले
से तोड रही थी। तभी सैनिकों
ने उसे पकड लिया।
और बुढिया को महराजा के
सामने लाया गया।वह डरी हुई
थी।बुढिया ने हाथजोडकर
विनती करते हुऐ कहा,....
, महराज मेरा बेटा दो दिनो
से भूखा है।हमने पके हुए आम
के फल को देखकर ढेला मारा था।
ढेला लगने से पका हुआ आम गिर जाता
तभी आप बीच में आ गये।
..,मै यह ढेला आप को नही मारना
चाहती थी,मुझे क्षमा कर लीजिए।
,,,,महाराजा ने बुढिया की बात को
सुन कर अपने सैनिकों से कहा....
" इसे खाने के समान के साथ कुछ
धन देकर इज्ज़त से घर भेज दो।
सैनिकों ने पूछा....सरकार इसे तो
इस अपराध का दंड मिलना चाहिए।
राजा ने कहा....जब ढेले की चोट
खाकर पेड़ सुन्दर फल दे सकता हैं,
"तो मै एक बुद्धि वाला प्राणी होकर
सजा कैसे दे सकता हूँ?/।ःःःःःःःः
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