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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

सही निर्णय

कुछ समय पहले की बात है,
  एक बार राजकुमार गौतम,
अपने बगीचे में सैर कर रहे थे।
    उसी समय अचानक एक,
घायल हंस उनके सामने आ गिरा।
  उसका शरीर
तीर लगने से घायल,
हो गया था।
  राजकुमार को उस  हंस पर दया
आ गयी।
और फिर उसने उस हनस को गोद
   मे उठा लिया।
वे प्यार से उनके पंखो को सहलाने लगे।
  फिर उसने धीरे से उसके शरीर से
तीर निकाला, और उसके घाव को साफ
  किया, फिर उस हंस को पानी पिलाया
धीरे धीरे हंस की पीडा कम होने लगी।
  कुछ समय बाद राजकुमार का चचेरा
भाई गौतम दौडता हुआ वहां आया।
  वह बोला यह।इस मजे दे दो यह मेरा
शिकार हैं।
  गौतम ने सवाल किया‌‌,,,तुमने इस पक्षी
     को घायल किया।इसने तुम्हरा किया
वीगाडा था।
    मैंने इसे बचाया हैं यह मेरा है,मैं इसे
तुमको नहीं दे सकता।यह कहकर वह
राजमहल की ओर चल दिया ,देवदत्त
भी पीछे पीछे चल दिया।
  दोनों निर्णय के लिए राजा के पास पहुंचे।
देवदत्त ने अपनी बात कही ।गौतम मेरा हंस
नहीं दे रहा है।यह हंस मेरा है इसे मैनै मारा है।
   गौतम बोला मैंने इसे बचाया हैं,यह मेरा है।
राजा ने दोनों की बातो को सुना।
  राजा ने कहा,,,, मारने वाले से बचाने
वाला अधिक बड़ा होता है,,,,
  अतः इस हंस पर गौतम का अधिकार है।
राजकुमार गौतम आगे चलकर,,,

  मोहत्मा बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए।

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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