एक समय की बात हैं,
अकबर ने बीरबल को अपने दरबार
मे बुलाया, और कहा,
बीरबल...मै जहाँ बैठा हू इसके ठीक
सामने वाली दीवार पर कुछ
ऐसा लिखो कि,मै...
"गम मे उसे पढूं तो खुशी हो" !
"खुशी मे मै उसे पढूं, तो गम हो" !
यह सुनकर बीरबल थोड़ी देर
खडे होकर सोचने लगे ,और फिर
वह जाकर सामने वाली दीवार पर लिखा...
"'यह वक्त गुजर जायेगा"
अकबर को बीरबल की लिखी हुई यह
बात बहुत पसंद आई,फिर अकबर ने
बीरबल को ढेरों, सोने चादी के उपहार दिया।
किसी ने सच ही कहा हैं...
यह वक्त कब गुजर जाता है,
किसी को पता ही नही चलपाता,
इसलिए समय के साथ चलना सीखो,
जो समय के साथ चला हैं,
वही आगे वढा है।।
चलते रहने का नाम जिंदगी है।
चलते रहेगे तो एक दिन, मंजिल तक
अवश्य पहुंच जायेंगे।.....C.t.m.founder
अकबर ने बीरबल को अपने दरबार
मे बुलाया, और कहा,
बीरबल...मै जहाँ बैठा हू इसके ठीक
सामने वाली दीवार पर कुछ
ऐसा लिखो कि,मै...
"गम मे उसे पढूं तो खुशी हो" !
"खुशी मे मै उसे पढूं, तो गम हो" !
यह सुनकर बीरबल थोड़ी देर
खडे होकर सोचने लगे ,और फिर
वह जाकर सामने वाली दीवार पर लिखा...
"'यह वक्त गुजर जायेगा"
अकबर को बीरबल की लिखी हुई यह
बात बहुत पसंद आई,फिर अकबर ने
बीरबल को ढेरों, सोने चादी के उपहार दिया।
किसी ने सच ही कहा हैं...
यह वक्त कब गुजर जाता है,
किसी को पता ही नही चलपाता,
इसलिए समय के साथ चलना सीखो,
जो समय के साथ चला हैं,
वही आगे वढा है।।
चलते रहने का नाम जिंदगी है।
चलते रहेगे तो एक दिन, मंजिल तक
अवश्य पहुंच जायेंगे।.....C.t.m.founder

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