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मंगलवार, 3 सितंबर 2019

एक दयालु राजा

एक समय की बात है।
जूनागढ़ नामक राज्य में,
एक वीर और दयालू राजा,
रहता था।वह सदैव अपनी,
प्रजा की भलाई के बारे मे,
सोचा करता था।वह अपनी ,प्रजा
का हाल जानने के लिए खुद ही
अपने राज्य में प्रजा से मिलने
जाया करता था।
...एक दिन वह इसी प्रकार घूमने
निकला तो उसने एक बूढ़े आदमी
को देखा,वह बूढा आदमी जमीन
पर बैठ कर पौधा लगाने का काम
कर रहा था।वह इतना बूढा था,कि
उसका पूरा शरीर कमजोर पड गया
था।और पेड लगाते समय उसका
हाथ पैर काप रहा था।लेकिन
फिर .भी वह बूढा आदमी धैर्य
के साथ पौधा लगाने का काम
कर रहा था।
   उसकी मेहनत को देखकर
राजा सोचने लगा.....
..कि यह बूढा आदमी इतनी
मेहनत से पेड लगा रहा हैं,
पेड बडा होने तक यह आदमी
जीवित ही नही रहेगा।और फिर,
...राजा उस बूढा आदमी के पास
गयाऔर पूछा....."बाबा "जो पेड आप लगा
रहे हैं, आगे चलकर उसके फल
आप खाँ पाऐंगे।?"
...बूढा आदमी.... ने राजा को जबाब दिया...
...ऐसा तो नही हो पाऐगा राजा?"।
   "राजा ने फिर पूछा":::तो बाबा आप
फिर भी यह पेड  कियो लगख रहे हो?"।
"""बूढे आदमी ने राजा से कहा"...
  राजन हमने भी अजीवन दूसरे
के लगाये हुए फल खाऐ हैं।
वैसे ही आगे चलकर लोग,
हमारे लगाये हुए पौधे से
लोग फल खायेंगे।।""राजा
य  ह उत्तर सुन कर बहुत
खुश हुआ।और वह खुश
होकर बूढे आदमी को ढेर
सा री सोने की मुद्राऐ दी।।"
""इसीलिए कहते हैं"
हर आदमी को कम से कम ,
एक पौधा अपने जीवन मे,
अवश्य लगाना चाहिए।।"

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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