किसी गांव में एक बहुत ही
गरीब परिवार रहता था।उस
परिवार के मुखिया का नाम
दीनानाथ था।उस परिवार में
दीनानाथ और उनकी पत्नी
रीना ,और एक बेटा राहुल था।
दीनानाथ का परिवार बहुत ही
गरीब था। वह दिन भर मेहनत
मजदूरी कर किसी तरह अपना
और अपने परिवार के लिए
कमा कर लाता था,और बडे
ही मुश्किल से रोटी का जुगाड़
कर पाता था।वह गाँव मे जब
निकलता था,गांव के लोग
उसके गरीबी का मजाक उडाते
थे। दीनानाथ को यह सब ठीक
नही लगता था।उसे गांव के लोगों
की बाते सुनकर बहुत दुख होता
था।उनको समझ मे नही आता था
कि आखिर वह का करे कि उनका
परिवार भी खुशहाल जीवन जिये।
एक दिन दीना नाथ मजदूरी करने
गांव से कुछ दूर पर गया।वहा पर बहुत
पुरानी जमीन जो कई सालो से
बंजर पडी हुई थी ,उसी जमीन पर
उसे खुदाई करना था।वह अपने
हाथ मे एक फावडा और टोकरी
साथ लेकर गया था।उसने वहाँ
पर खुदाई करने लगा।धीरे धीरे
उसने दो घंटे तक खुदाई किया।
चूंकि जमीन कफी पुरानी,
और बंजर थी इस लिए
खुदाई करने मे परेशानी होती
थी,लेकिन फिर भी ,दीनानाथ
ने खुदाई बन्द नही कीऔर
धीरे धीरे पाँच फिट गहरा गडढा
खोद डाला,पांच फिट के बाद
दीनानाथ ने जैसे ही और गहरा
गडढा खोदना चाहा, उनको
कुछ दिखाई दिया।उसने फावडे
से मिटटी हटा कर देखा तो वह
दंग रह गया।वहां एक संदूक मे ढेर
सी अर्सफी भरी हुई थी।
अब तो दीनानाथ की तकदीर
ही बदल गई।वह उसे उठा कर
घर ले आया।
और फिर दूसरे दिन वह नहां
धोकर तैयार हुआ, और उसने
कुछ अर्सफी लेजाकर बाजार
मे बेच दी।और उस पैसे को
घर ले आया। चूंकि घर की
माली हालात ठीक नही थी
इसलिए पहले उसने उस पैसे
से बाजार से अनाज ,और खाने
पहनने का सामान खरीदा,फिर
उसे घर ले आया।उसके बाद
फिर उसने अपना रहने के लिए
घर का प्रबंध किया।
और ठीक ठाक रहने लगा।
अब गांव के जो लोग
उस पर हसते थे वही
लोग राह चलते य इधर
उधर कही पर मिलते
दीनानाथ को नमस्कार
अवश्य करते थे।
कहते हैं.. मालिक जब देता हैं..
तो छप्पर फाड कर देता हैं।।
यह कहावत दीनानाथ पर
बहुत सही साबित हु ई।
कभी किसी गरीब का
मजाक नही उडाना चाहिए।
कब किसकी किस्मत कहाँ
बदल जाय यह कोई नही जानता।।
Co founder. R.kumar
"Click tech money.com"
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परिवार के मुखिया का नाम
दीनानाथ था।उस परिवार में
दीनानाथ और उनकी पत्नी
रीना ,और एक बेटा राहुल था।
दीनानाथ का परिवार बहुत ही
गरीब था। वह दिन भर मेहनत
मजदूरी कर किसी तरह अपना
और अपने परिवार के लिए
कमा कर लाता था,और बडे
ही मुश्किल से रोटी का जुगाड़
कर पाता था।वह गाँव मे जब
निकलता था,गांव के लोग
उसके गरीबी का मजाक उडाते
थे। दीनानाथ को यह सब ठीक
नही लगता था।उसे गांव के लोगों
की बाते सुनकर बहुत दुख होता
था।उनको समझ मे नही आता था
कि आखिर वह का करे कि उनका
परिवार भी खुशहाल जीवन जिये।
एक दिन दीना नाथ मजदूरी करने
गांव से कुछ दूर पर गया।वहा पर बहुत
पुरानी जमीन जो कई सालो से
बंजर पडी हुई थी ,उसी जमीन पर
उसे खुदाई करना था।वह अपने
हाथ मे एक फावडा और टोकरी
साथ लेकर गया था।उसने वहाँ
पर खुदाई करने लगा।धीरे धीरे
उसने दो घंटे तक खुदाई किया।
चूंकि जमीन कफी पुरानी,
और बंजर थी इस लिए
खुदाई करने मे परेशानी होती
थी,लेकिन फिर भी ,दीनानाथ
ने खुदाई बन्द नही कीऔर
धीरे धीरे पाँच फिट गहरा गडढा
खोद डाला,पांच फिट के बाद
दीनानाथ ने जैसे ही और गहरा
गडढा खोदना चाहा, उनको
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से मिटटी हटा कर देखा तो वह
दंग रह गया।वहां एक संदूक मे ढेर
सी अर्सफी भरी हुई थी।
अब तो दीनानाथ की तकदीर
ही बदल गई।वह उसे उठा कर
घर ले आया।
और फिर दूसरे दिन वह नहां
धोकर तैयार हुआ, और उसने
कुछ अर्सफी लेजाकर बाजार
मे बेच दी।और उस पैसे को
घर ले आया। चूंकि घर की
माली हालात ठीक नही थी
इसलिए पहले उसने उस पैसे
से बाजार से अनाज ,और खाने
पहनने का सामान खरीदा,फिर
उसे घर ले आया।उसके बाद
फिर उसने अपना रहने के लिए
घर का प्रबंध किया।
और ठीक ठाक रहने लगा।
अब गांव के जो लोग
उस पर हसते थे वही
लोग राह चलते य इधर
उधर कही पर मिलते
दीनानाथ को नमस्कार
अवश्य करते थे।
कहते हैं.. मालिक जब देता हैं..
तो छप्पर फाड कर देता हैं।।
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बहुत सही साबित हु ई।
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