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शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

"साहसी बूढा आदमी"

"गाँव से दूर एक बहुत बडा बाग,
था।उस बाग मे बहुत सारे बन्दर,
रहते थे।एक बार वह बन्दर कूदते,
फादते पहाडी पर बने एक मन्दिर,
पर पहुंच गये।उस मन्दिर मे उन्होंने,
कुछ घंटियों को देखा।और उन
बन्दरो ने उस घंटी को निकाल
कर अपने साथ ले गये।जब बन्दर
घंटी को हाथ में लेकर भाग रहा
था तव घंटी बज उठी और दूसरे
बन्दर बहुत खुश हो उठे।....
"इस तरह घंटी का बजना दूसरे
बन्दरो के लिए एक खेल बन गया।
उनको यह इतना पसंद आया कि,
वह दिन और रात घंटियों को
बजाने लगे।....
" गांव के लोग इस विचार से अनभिज्ञ
थे और सोचते थे कि कोई राक्षस पव्रत
पर घंटी बजाता हैं।इस कारण गांव के
लोगों मे राक्षस का डर बैठ गया।
इस तरह गांव के लोगों ने उस राक्षस
का नाम "घंटालिका" रख दिया।
और उसके डर से गांव छोडकर
भागने लगे।....
"उसी गांव में एक गरीब बूढ़ा
आदमी रहता था।वह गांव
छोडने मे स्र्समर्थ था।
और कही जा नही सकता था।
लेकिन वह बहुत साहसी था।
एक दिन इसका कारण जानने
के लिए वह पहाड पर चला गया।
वहां उसने देखा कि कुछ बन्दर
इधर उधर उछल कूद कर रहे थे,
और उनके हाथ मे घंटी थी वह
बज रही थी।यह देखकर वह हसा
और गाँव में आ गया।
वह गांव के मुखिया के पास गया,
और बोला...यदि हम पहाड से
राक्षस को खींच लाऊ तो ,आप हमे इनाम देगे।
गाँव का मुखिया खूशी से उसे
इनाम देने के लिए सहमत हो गया।
अगले दिन वह एक टोकरी में
कुछ फल लेकर पहाड़ी की ओर
गया।पहाड़ी पर उसने बन्दरो को
घंटी बजाते देखा।उसने कुछ दूरी
पर एक एक करके फल रख दिया।
बन्दर घंटी बजाना छोडकर
फलो की ओर दौडे।और उस बूढ़े
आदमी ने सभी घंटियों को अपने
हाथ मे लिया, और गाँव की ओर
चल दिया।
...उसने रास्ते में घंटियों को जमीन
मे गहराई में दवा दिया।तव वह
गाँव के मुखिया के पास गया,और
उसने कहा...कि उसने "घंटालिको"को
भगा दिया।सभी लोग और गाँव का
मुखिया उससे बहुत खुश हुए।उन्होंने
उस बूढे आदमी को धन्यबाद दिया।
और उसे उचित इनाम दिया।
..अब गांव के लोग शान्ति..
...से रहते थे।.....

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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