कुछ समय पहले की बात है।
किसी जंगल में एक लोमडी,
और एक सारस रहते थे।
दोनो मे खूब मित्रता थी।
दोनो सारे काम साथ साथ ,
करते थे।
एक दिन की बात है, लोमडी ने,
सारस को अपने यहाँ दावत
पर बुलाया।
लोमडी ने अपने मित्र के सम्मान में,
मीठी खीर बनाई।
उसने इस खीर को एक चौडी,
थाली मे परोस दिया।
लोमडी बोली भाई सारस,
आओ खाना शुरू करें।
दोनो साथ साथ खाने बैठ गये।
लोमडी तो तेजी से सारी,
खीर खा गयी।
लेकिन सारस की बडी चोच,
मे खीर न पहुंच सकी।
उसे भूखा रहना पडा।
वह लोमडी से वोला.....
आप का भोथन वहुत,
स्वादिष्ट था।
आज शाम का खाना आप को,
मेरे यहाँ करना हैं।
सारस लोमडी से बदला लेना,
चाहता था।
उसने बढिया शोरवा पकाया।
शाम को लोमडी मित्र के घर,
आ पहुंची।
शोरवे की मीठी सुंगध से,
लोमडी की भूख तेज हो गयी।
सारस ने सुराही मे शोरवा परोसा।
जिसका मुँँह बहुत छोटा,और ,
पतला था।
सारस ने बहुत आराम से,वर्तन
मे चोच डाली और बडे मजे से
सारा सोरवा पी लिया।
लोमडी भूख के मारे चुपचाप,
बैठी यह सब देखती रही।
लोमडी अब समझ चुकी थी,
कि उसने अपने मित्र के साथ ,
चालाकी दिखा कर बहुत बडी,
गलती की हैं।
ऐसा करके अब वह अपने,
व्यावहार पर पछता रही थी।
किसी जंगल में एक लोमडी,
और एक सारस रहते थे।
दोनो मे खूब मित्रता थी।
दोनो सारे काम साथ साथ ,
करते थे।
एक दिन की बात है, लोमडी ने,
सारस को अपने यहाँ दावत
पर बुलाया।
लोमडी ने अपने मित्र के सम्मान में,
मीठी खीर बनाई।
उसने इस खीर को एक चौडी,
थाली मे परोस दिया।
लोमडी बोली भाई सारस,
आओ खाना शुरू करें।
दोनो साथ साथ खाने बैठ गये।
लोमडी तो तेजी से सारी,
खीर खा गयी।
लेकिन सारस की बडी चोच,
मे खीर न पहुंच सकी।
उसे भूखा रहना पडा।
वह लोमडी से वोला.....
आप का भोथन वहुत,
स्वादिष्ट था।
आज शाम का खाना आप को,
मेरे यहाँ करना हैं।
सारस लोमडी से बदला लेना,
चाहता था।
उसने बढिया शोरवा पकाया।
शाम को लोमडी मित्र के घर,
आ पहुंची।
शोरवे की मीठी सुंगध से,
लोमडी की भूख तेज हो गयी।
सारस ने सुराही मे शोरवा परोसा।
जिसका मुँँह बहुत छोटा,और ,
पतला था।
सारस ने बहुत आराम से,वर्तन
मे चोच डाली और बडे मजे से
सारा सोरवा पी लिया।
लोमडी भूख के मारे चुपचाप,
बैठी यह सब देखती रही।
लोमडी अब समझ चुकी थी,
कि उसने अपने मित्र के साथ ,
चालाकी दिखा कर बहुत बडी,
गलती की हैं।
ऐसा करके अब वह अपने,
व्यावहार पर पछता रही थी।

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