मेरा कल्पनाशील मन अनेक
बार अनेक चीजो को देखता हैं।
कभी कभी मै कल्पना करता हूँ
कि यदि मेरा खुद का स्कूल
होता तो....
मुझकों लगता कि मानो
हमारे ऊपर बहुत सी जिम्मेदारी
आ जाती।और मै उसे बाखूबी
निभाता।
सबसे पहले मै स्कूल की सारी
व्यवस्था को नियमित रूप से
करता।
स्कूल सही समय पर खुले,
सही समय पर उपस्थित,
सही समय पर प्रार्थना हो,
समयनुसार सभी कलास
पीरियड लगे,इस काम को
मै प्राथमिकता देता।
हमारी देख मे ,परीक्षा की
योजना पढाई के लिए अत्यंत
हितकर हैं।
और हम प्रयास करेंगे कि,
छात्रो की समय समय पर
छोटी छोटी परीक्षाएं हो।
साल भर मे कम से कम
दो बार बडी परीक्षा कराते।
जिससे छात्र छोटी परीक्षा
के माध्यम से, विषय को
सारपूर्ण समझ सके।
और बडी परीक्षा के द्धारा
पूरा पाठ्यक्रम तैयार कर सके।
नकल और धोखाधड़ी को
समाप्त कर देता।
मै स्कूल में उन गुदडी के
लालो को पहचानने और
विकसित करने का पूरा प्रयास
करता,...जो गरीबी के कारण..
अपनी प्रतिभा का विकास
नही कर पाते।ऐसे छात्रो
को प्रोत्साहन और सहायता
दिलाने का प्रयास करता।
खेल कूद का बढावा देता।
बच्चों को समय समय पर
खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित
कराते,और उसमे उनको
पुरस्कार विजेता घोषित करते।
बाद विवाद ,नाटक,अभियान,
भाषण,आदि कार्य मे बच्चों
को गहरी रूचि दिलाते।
इसकेलिए मै कला संपन
अध्यापक का एक उत्साही
मंडल तैयार करता,जो
बच्चों में यह सब कला
विकसित करतेऔर
उनका चहुंमुखी विकास
करने मे उनकी सहायता प्रदान
करते।
हमारा प्रयास होता कि
हमारे स्कूल के छात्र केवल
ग्रहक न हो,अध्यापक ज्ञान
विक्रेता न हो।
उनमे ज्ञान,श्रद्धा और प्रेम
का गहरा सम्बध हो।
इसके लिए मै हर संभव
प्रयास करता।
मै अपने अध्यापक और
छात्रो के बीच निरभयता का
वातावरण वनाता,जिससे
सब एक दूसरे को अपनी
भावनाऐ कहसुन सके।
मै समझता हूँ कि...
इन उपायों मे मेरा स्कूल...
एक श्रेष्ठ स्कूल बन जाता।
बार अनेक चीजो को देखता हैं।
कभी कभी मै कल्पना करता हूँ
कि यदि मेरा खुद का स्कूल
होता तो....
मुझकों लगता कि मानो
हमारे ऊपर बहुत सी जिम्मेदारी
आ जाती।और मै उसे बाखूबी
निभाता।
सबसे पहले मै स्कूल की सारी
व्यवस्था को नियमित रूप से
करता।
स्कूल सही समय पर खुले,
सही समय पर उपस्थित,
सही समय पर प्रार्थना हो,
समयनुसार सभी कलास
पीरियड लगे,इस काम को
मै प्राथमिकता देता।
हमारी देख मे ,परीक्षा की
योजना पढाई के लिए अत्यंत
हितकर हैं।
और हम प्रयास करेंगे कि,
छात्रो की समय समय पर
छोटी छोटी परीक्षाएं हो।
साल भर मे कम से कम
दो बार बडी परीक्षा कराते।
जिससे छात्र छोटी परीक्षा
के माध्यम से, विषय को
सारपूर्ण समझ सके।
और बडी परीक्षा के द्धारा
पूरा पाठ्यक्रम तैयार कर सके।
नकल और धोखाधड़ी को
समाप्त कर देता।
मै स्कूल में उन गुदडी के
लालो को पहचानने और
विकसित करने का पूरा प्रयास
करता,...जो गरीबी के कारण..
अपनी प्रतिभा का विकास
नही कर पाते।ऐसे छात्रो
को प्रोत्साहन और सहायता
दिलाने का प्रयास करता।
खेल कूद का बढावा देता।
बच्चों को समय समय पर
खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित
कराते,और उसमे उनको
पुरस्कार विजेता घोषित करते।
बाद विवाद ,नाटक,अभियान,
भाषण,आदि कार्य मे बच्चों
को गहरी रूचि दिलाते।
इसकेलिए मै कला संपन
अध्यापक का एक उत्साही
मंडल तैयार करता,जो
बच्चों में यह सब कला
विकसित करतेऔर
उनका चहुंमुखी विकास
करने मे उनकी सहायता प्रदान
करते।
हमारा प्रयास होता कि
हमारे स्कूल के छात्र केवल
ग्रहक न हो,अध्यापक ज्ञान
विक्रेता न हो।
उनमे ज्ञान,श्रद्धा और प्रेम
का गहरा सम्बध हो।
इसके लिए मै हर संभव
प्रयास करता।
मै अपने अध्यापक और
छात्रो के बीच निरभयता का
वातावरण वनाता,जिससे
सब एक दूसरे को अपनी
भावनाऐ कहसुन सके।
मै समझता हूँ कि...
इन उपायों मे मेरा स्कूल...
एक श्रेष्ठ स्कूल बन जाता।

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