एक समय की बात है।
किसी गांव में रामू नाम का आदमी रहता था।
उसके साथ उसकी मां भी रहती थी।
ग़रीबी से तंग आकर रामू ने फैसला किया कि...
अब हम शहर में जाकर काम करेंगे।
दूसरे दिन रामू अपनी मां को छोड़ कर शहर चला गया।
वहां रामू को काम मिल गया।
अब वह वहां कमाने लगा।
वहां रामू जितना पैसा कमाता ,
वह सारा पैसा अपनी मां को भेज देता था।
कुछ समय बीत जाने के बाद रामू घर आया।
रामू ने अपनी मां से पूछा,
मां ,, हमनें जो तुम को पैसे भेजें वह कहां है।
मां ने कहा,,,हमने भगवान को दे दिया।
मां की इतनी बात सुनकर,,,
रामू को जोर का ग़ुस्सा आ गया।
रामू ने कहा,,, क्या वह पैसा भगवान हमें वापस कर देंगे।
मां ने कहां,,, हां बेटा।
अगर तुम भगवान को खोज लेंगे तो।
मां की इतनी बात सुनकर,,,,
रामू दूसरे दिन भगवान को खोजने निकल पड़ा।
चलते चलते रास्ता में रामू को एक जंगल मिला।
रामू जंगल के बीच से होकर चला जा रहा था।
कि तभी अचानक,,,,
दौड़ता हुआ घोड़ा,,,
रामू के पास आया।
और बोला,,,,,
अरे मुसाफिर तुम कहां जा रहे हो।।
रामू ने कहा,,,मैं भगवान को खोजने जा रहा हूं।
घोड़े ने कहा,,,अगर भगवान तुम को मिल जाए तो,,,
उन से पूछना,कि हम इतना थका और कमजोर क्यों रहता हूं।
रामू ने कहा ठीक है।
इतना कहकर रामू वहां से आगे बढ़ता जा रहा था।
तभी रास्ते में रामू को थोड़ा सा थकान महसूस हुआ।
और वह एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गया।
तभी उस पेड़ से आवाज आई।
अरे मुसाफिर तुम कहां जा रहा है।
रामू ने कहा ,,,मैं भगवान को खोजने जा रहा हूं।
पेड़ ने,,,,रामू से कहा।
यदि तुम को भगवान मिल जाए तो।
उनसे कहना,,,,
हमारी जड़ें इतनी कमजोर क्यों है।
रामू ने कहा,,,, ठीक है।
रामू और आगे बढ़ता गया।
तभी रास्ते में रामू को एक संत बैठा हुआ मिलता है।
संत ने पूछा,,,अरे मुसाफिर तुम कहां जा रहा है।
रामू ने कहा,,, मैं भगवान को खोजने जा रहा हूं।
तब रामू ने अपनी सारी बातें उस संत को बता दिया।
मां से किया वादा,,,
घोड़ा से किया गया वादा,,,,
पेड़ से किया गया वादा,,,,
अपनी सारी बातें रामू ने उस संत को बताईं।
तब संत ने कहा,,, भगवान अभी इस रास्ते से पैसा लेकर
तुम्हारे घर जा रहें हैं।
और रही बात,,,,
तुम ने जो घोड़ा और पेड़ से वादा किया,,,
तो तुम घोड़ा से जाकर कहना कि,,,,
जब तक तुम्हारे ऊपर कोई सवारी नहीं करेगा,,
तब तक तुम ठीक नहीं होंगे।
और
च्पेड़ से जाकर कहना,,,णं
तुम्हारे जड़ के नीचे खजाना दबा हुआ है।
जब तक वह खजाना बाहर नहीं निकाला जायेगा।
तब तक तुम ठीक नहीं होंगे।
संत की इतनी बात सुनकर रामू ने संत को प्रणाम किया।
और वहां से वापस घर की ओर चला।बच
पहले वह घोड़े के पास गया।
घोड़े से कहा,,, जब तक तुम पर कोई सवारी नहीं करेगा।
तब तक तुम ठीक नहीं होंगे।
घोड़े ने कहा,,, तुम मेरी सवारी कर लो।
रामू ने घोड़े की सवारी की।
और पेड़ के पास गया।
बोला,,,, तुम्हारे जड़ के नीचे खजाना दबा हुआ है।
जब तक वह खजाना बाहर नहीं निकाला जायेगा,
तब तक तुम ठीक नहीं होंगे।
पेड़ ने,,,,रामू से कहां,,
खजाना तुम ही खोदकर निकाला लो।
तब रामू ने खजाना को खोदा और बाहर निकाल लिया।
रामू ने खजाना को,,, घोड़े की पीठ पर रख कर घर की ओर चल दिया।
घर पहुंचकर मां ने पूछा,,, बेटा
क्या भगवान तुम को मिले।
रामू ने कहा हां मां,,,
हमें भगवान भी मिले
और पैसा भी मिला।
फिर रामू ने अपनी सारी बातें मां को बताया।
मां ने उस संत को प्रणाम किया।
और अब मां बेटे खुशी खुशी रहने लगे.......