रामू नाम का एक आदमी था।
उसके पास एक गाय थी।
जो दूध देती थी।
जिससे दूध बेच कर ,रामू अपना जीवन व्यतीत करता था।
एक दिन रामू दूध बेचने गया।
तभी रामू की गाय ,
सामने वाली तालाब में,
घास खाने के लिए जाती है।
और उसी तालाब में डूबकर मर जातीं हैं।
रामू जब घर वापस आता है तो,
यह नजारा देख कर बहुत दुखी होता है।
अब वह तालाब के पास जाकर ,
बैठकर सोचने लगता है कि अब हमारी,
जीवन यापन कैसे करें।
तभी वह कहता है कि....
बैठने से कुछ नहीं होगा ।
अब हमें कुछ आगे करना होगा।
तब वह दूसरे दिन
उसी तालाब से,
मछलियां को पकड़ता और बाजार में,
लेजाकर बेचता।
जिससे रामू को डबल फायदा मिलने लगा।
जीवन में बेकार बैठने से अच्छा है।
कुछ न कुछ करते रहे।
जिससे अपनी जीविका चलाते रहे।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें