धन की खेती सब चुगे ।
रिश्ते बने हजार।।
सूखा पड़ा जब खेतों में।
उजड़ गया सब बाजार।।
जब तक आप की हांडी पक रहीं हैं।
हर कोई अपना चम्मच,
लेके खड़ा हुआ है।
हांडी ठंडी हुई नहीं।
कि
लोग रास्ता ऐसे बदल लेंगे।।
जैसे
कभी आप को जानते
ही नहीं थे ।
दुनिया की रीत यहीं है ।।
फसल कटी तों मेला।
बाक़ी सब अकेला ।।
बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया ।।
यही तों है,,,,,धन की खेती ?
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