बरसात हो रही थी।
अन्दर सरकारी स्कूलों में टीचर बच्चों को पढ़ा रहे थे।
पढ़ाते पढ़ाते कुछ घंटे के बाद,
टीचर...ने सोचा कि
चलों आज बच्चों से कुछ बातें करतें हैं।
तभी टीचर ने...अपनें जेब से। १००₹ का नोट निकाला,
और बच्चों से कहा...
अगर हम तुम को यह १००₹ का नोट दे दूं तो,
तुम लोग अपनें लिए क्या खरीदोगे।
बच्चों ने कहा...
गुरु जी... हम अपने लिए,
चाकलेट खरीदें गे।
हम मिठाई खरीदें गे।
हम खिलौना खरीदें गे ।
उसी में एक बच्चे ने कहा...
हम आपनी मां के लिए चस्मा खरीदें गे।
टीचर ने कहा... वह तो तुम्हारे पिता जी भी खरीद सकते हैं।
बच्चा खामोश हो गया।
टीचर ने कहा... क्या हुआ।
बच्चा ने कहा।
हमारे पिता जी नहीं है।
हमारी मां सिलाई का काम करती है।
औरों के घरों में जाकर,,,
झाड़ू पोंछा का काम करती है।
मेरी मां को कम दिखाई देता है।
बच्चे की बात सुनकर।
क्लास में खामोशी सी छा गई।
तभी टीचर ने... वह १००₹ का नोट उस बच्चे को दिया।
और कहां,,,
यह पैसा मैं तुम्हें उधार दे रहा हूं।
जिस दिन तुम बड़े आदमी बन जाना,,,
उस दिन यह पैसा हमें वापस कर देना ।
और अब आगे ।।।।
जैसे तैसे समय बीतता गया।
उस बच्चे ने खूब मेहनत की।
उसने हर क्लास में टाप किया।
और बीस साल बाद...
वहीं लड़का।।।।
कलेक्टर बना ।
कलेक्टर बनने के एक महीने बाद...
ठीक २० साल बाद...
वह लड़का १००₹ का नोट वापस करनें।
अपनें वहीं सरकारी स्कूलों में टीचर के पास जाता है।
और टीचर के चरणों को छू कर कहता है।
गुरु जी...
आप ने हमें पहचान।
हम वहीं लड़का हूं।
जिसे आप ने १००₹ चस्मा खरीदने के लिए दिया था।
आज हम वहीं १००₹ आप को वापस करनें के लिए आया हूं।
टीचर... उस लड़के को देख कर बहुत खुश हुआ।
१००₹ की कीमत कितनी बड़ी होती है।
टीचर का उधार दिया गया १००₹...
उस बच्चे की सोच बदल दी ।
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