व्यवहारिक दुनिया ,
में ...
लोग सत्य के लिए नहीं,
लाभ के लिए लड़ते हैं !!
इसलिए ...
यह उन्हीं के साथ खड़े होते हैं ,,,
जिसके पास ...
पैसा प्रचारक समर्थ और भीड़ हो !!
यही कारण है कि...
व्यावहारिक दृष्टि से ऐसा लगता है !!
की सत्य...
पीछे रह गया है ,,
और
शोर आगे बढ़ गया है !!
यह जीवन का दोष नहीं ...
भीड़ की प्रवृत्ति का दोष है !!
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