एक बाज को,
लोगों का खाना ,
चुरा कर खाने में,
बड़ा मज़ा आता था ?
एक दिन...
एक लोमड़ी अपने बच्चों के साथ,
भोजन की तलाश में जा रही थी।
तभी वहां बाज आया।
लोमड़ी ने बाज से कहा...
क्या तुम हमारे बच्चों की देखभाल करोगी।
जिससे हम , बेफिक्र होकर,,,
खाना ढूंढ कर ला सकूं।।
बाज ने कहा क्यों नहीं।
अगले ही पल ,,,
लोमड़ी जैसे ही खाना ढूंढने वहां से जाती है।
वैसे ही बाज लोमड़ी के बच्चे को
उठा कर ले चली जाती है।
लोमड़ी जब वापस आ कर देखतीं हैं ।
तो उसके बच्चे गायब थे।
लोमड़ी समझ गयी ,,,
हो न हो ।।।।
बाज ही हमारे बच्चों को लेकर गयी हैं।
लोमड़ी रोई और चिल्लाई।।।
और कहां,....
हे मेरे मालिक।।।।
अब तू ही इनके कर्म का हिसाब कर।
उधर कुछ समय बाद,,,
बाज पहले की तरह ,,
दूसरों का खाना जैसे ही चुरा कर ले भागा,,
इस बार खाना ,
काफी गर्म था।
बाज ने अपने पंजों में पकड़ ले भागा।।।
और
अपनें घोंसले में ,
जैसे ही गर्म खाना रखता है।
वैसे ही कुछ ही देर बाद,
उस बाज के
घोंसले में अचानक
आग लग जाती है।
और बाज तड़प कर
गिर जाता है
तभी
लोमड़ी बाज को
उठा ले जाती है।
बाज के क्रम की सजा
और
हिसाब
दोनों बाज को मिल जाती है।
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