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बुधवार, 21 जनवरी 2026

चालाक हंस

 एक तालाब में पानीं कम था ।

उस तालाब में मछलियां और केकड़ा रहते थे।

अचानक से वहां एक बगुला जाता है।

उसकी नजर मछलियां पर पड़ती हैं।

वह तालाब के एक किनारे पर खड़े होकर,

मछलियां को पकड़ता और खा जाता।

ऐसा करते-करते कुछ समय बीत गया।

और एक दिन.....

तालाब का पानी अचानक से सूखनें लगा।

बगुला ने सोचा ... तालाब का पानी कम हो गया।

        अब मछलियां को पकड़ कर खाने में मजा आ जायेगा 

तब बगुला ने दिमाग लगाया।

और मछलियां से कहा...

इस तालाब का पानी कम हो गया है।

तुम सब हमारे पास आ जाओ।


हम तुम सब को एक एक कर ,

दूसरे तालाब में छोड़ दूंगा।

और तुम सब सच जाओ गे।

मछलियां बगुला की बात मान कर सब उसके पास आ गई।

बगुला अपनी चोंच में एक मछली को पकड़ता,

  और दूर ले जाकर उसे खा लेता।

तब केकड़ा ने सोचा,,,,यह मछलियां को लेकर किधर जाता है 

केकड़ा ने कहा...अरे बगुला चाचा ,उस तालाब में मुझे भी

                    लेकर चलो ना।

बगुला केकड़ा कों चोंच में पकड़ कर लेकर उड़ गया।

थोड़ी दूर जानें के। बाद,

केकड़ा ने जमीन पर देखा तो,

बहुत सारी हंडिया पड़ी हुई दिखाई दी।

केकड़ा समझ गया,,

हो न हो यह बगुला की चाल है।

तभी केकड़ा ने,,,अपने मजबूत हाथों से बगुला के गले पर

                   जोर से दबा दिया।

बगुला ऊपर से जमीन पर गिरा धड़ाम।

और केकड़ा वहां से भाग निकला।

और तालाब में जाकर सभी मछलियां और केकड़ा कों बता दिया।

दूसरे दिन,,,जैसे ही बगुला तालाब पर जाता है।

सभी मछलियां और केकड़ा 

मिलकर उस बगुला को मार डालते हैं।

किसी भी विपरीत परिस्थितियों में,सभी पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।



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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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