एक राजा था।
जिसके यहां बेटा पैदा नहीं हो रहा था।
तब राजा को एक तांत्रिक मिला।
तांत्रिक बोला.... अगर आप अपने नगर से, किसी एक छोटे बच्चों की बलि चढ़ा दे तो, आपके यहां बेटा पैदा हो जाएगा।
दूसरे दिन... राजा ने पूरे नगर में ऐलान करा दिया कि, जो अपने बेटे को हमारे यहां बलि चढ़ाने के लिए भेजेगा उसे हम ढेर सारे
सोने की मोहरी देंगे।
नगर में एक गरीब परिवार था, उसे परिवार में एक छोटा बेटा था। परिवार वालों ने कहा यह हमारे किसी कामकानहीं है
इसे राजा के यहां भेजदेते हैं।
परिवार वालोंने खुशी खुशी उसे लड़के को राजाके यहां भेज दिया।
उधर राजाके यहां बलि चढ़ाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी।
लङके को दरबार में पेश किया गया।
राजा ने कहा... बेटा तुम्हारी कोई आखिरी इच्छा।
तब लड़के ने कहा...
मुझे थोड़ी गीली मिट्टी लाकर दे दो ।
उस मिट्टी से लड़के ने,,,, छोटे-छोटे चार मकान बनाए।।
और तीन मकान को उसने अपने पैरों से घिरा दिया।
राजा ने पूछा तुमने। यह क्या किया।
लड़के ने जबाव दिया...
पहला मकान मेरे मां बाप का था। जिन्होंने हमें रोका नहीं।
इसलिए मैंने इसे गिरा दिया।
दूसरा मकान,,,,मेरे रिसते दार का है,, जिन्होंने हमारे पिता को ऐसा। करनें से रोका नहीं।
इसलिए मैंने इसे भी गिरा दिया।
तीसरा मकान... राजा आप क है।जिनको न्याय करना चाहिए
वह हुआ ही नहीं।
इसलिए मैंने तीसरे मकान को भी गिरा दिया।
चौथा मकान.....मेरे भगवान का है,, इसलिए मैं इनके सामने
हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया।
और बोला,,,,,,
भगवान अब तू ही देख और तू ही न्याय कर।
यह सुनकर राजा की आंखों में आसूं आ गया।
राजा ने कहा,,,,,यदि हम इस मासूम की बलि चढ़ा कर,
हमारे यहां बेटा पैदा हो भी गया तो वह किस काम का।
तब राजा सिंहासन से उठ कर उस लड़के को गले लगा लिया और। बोला आज से तू ही मेरा बेटा है।।
इस कहानी का मतलब है,,,, लोगों के सामने झुकने से कोई मतलब नहीं है।
अगर तुम को चुकाना है तो उस भगवान के सामने झुको
जहां से तुम को न्याय मिले।
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