एक तालाब में बहुत सारे मेंढक रहते थे।
उसी तालाब के बीच में एक चिकना बड़ा सा खम्भा था।
एक दिन सभी तालाब के मेढकों ने सोचा कि....
चलो इस खम्भे पर चढ़ने की एक प्रतियोगिता कराई जाय।
जो इस खम्भे पर सबसे पहले चढ़ जायेगा,,,,
वहीं यहां का विजेता बनेगा।
तालाब के सभी मेंढक ने कहा ठीक है।
और दूसरे ही दिन प्रतियोगिता शुरू हुई।
चारों तरफ जोर जोर से आवाज आ रही थी।
सारे मेंढक उस खम्भे पर कुछ उंचाई पर चढ़ते,,,
और फिसल कर गिर जाते।
उसी बीच में एक छोटा मेंढक था।
जो बार बार उस खम्भे पर चढ़ता,
और फिसल जाता।
लेकिन उस मेंढक ने निरन्तर प्रयास जारी रखा।
और कोशिश करता रहा,,,
लेकिन उस मेंढक ने हार नहीं मानी।
वह छोटा मेंढक अथक प्रयास से,,,
आखिर में ,,,
उस खम्भे पर चढ़ने में सफलता प्राप्त कर ही ली।और वह विजेता बना।
दोस्त कोशिश करते रहना चाहिए।
क्या पता,,,,मेरी मंजिल
कब और कहां
मिल जाए।।
तब सभी मेंढक ने पूछा,,,,अरे तुम यह कैसे कर दिखाया।
तब उसी बीच से,,,,एक मेंढक ने कहा।
अरे यह बहरा है।
सुन नहीं सकता।
उस बहरे मेंढक कों लगा कि,,,,
तालाब के सभी मेंढक,,,,
हमारा हौसला बढ़ा रहे हैं।
इसी हौसला कों देख कर,
मैं धीरे धीरे,,
प्रयास करके इस खम्भे पर चढ गया।
किसी भी चीज को करने के लिए
खुद में विश्वास होना चाहिए,,
तभी आप कामयाब हो सकते हैं।।
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