मैं किस्मत को,
दोस् नहीं देता ,
क्योंकि
किस्मत का मारा नहीं हूं मैं !
अभी कुछ तो शेष है,
मुझ में,
अभी मैं हार नहीं हूं मैं !
एक दिन चमक ना,
है मुझे,
भले ही आकाश का तारा नहीं हूं मैं !
मेरे भीतर भी,
परवाह रहता है,
पर जल की धारा नहीं हूं मैं !
मेरे हृदय में भी,
प्यार पलता है ,
भले ही सूरज का प्यार नहीं हूं मैं !
सबके सामने अक्सर खुश ही नजर आता हूं,
पर खुश भी सारा का सारा नहीं हूं मैं !!
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