एक संत नंदी के किनारे बैठा था।
तभी उसने पानी में एक बिच्छू को जाते देखा ।
संत जी ,,, तुरन्त उठे ,
और
उस बिच्छू को जैसे ही हाथ की हथेली पर,
पानी से उठाया, वैसे ही बिच्छू ने,
संत जी को डंक मार दिया।
संत ने ,,, दूबारा बिच्छू को उठाया,
बिच्छू ने,,,, फिर संत को डंक मार दिया।
तभी व हां पास खड़ा हुआ शिष्य।
संत जी से बोला,,,,
यह आप को डंक मार रहा है।
और आप इसे पकड़ रहें हैं।
संत ने बड़ा सुन्दर जबाव दिया।
कि यदि हम भी इसके जैसे बन जायेंगे तो...
हममें और
इस बिच्छू में फर्क क्या रह जाएगा...?

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