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मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

सीखने का सिलसिला

अगर आप कुछ सीख रहें है,
य सीखना चाहते हैं तो आप, सीखने
का सिलसिला लगातार जारी रखे।बीते हुए कल
से आज हमारा कुछ बेहतर हो।
यह बेहतरी की सोच बिचार किसी भी
मामले मे हो सकता हैं।
   कुशलकरमी  बने रहने के लिए
अपने कौशल को बढातेऔर निखारते
रहना चाहिए।हम सब जानते हैं।
दुनिया परिवर्तन शील हैं।

नौकरी का बाजार भी कई प्रकार के
परिवर्तन का गवाह रहा।
 आज मै यानी वर्तमान मे जीना श्रेष्ठ माना जाता है।
यह विज्ञान नही एक कला हैं।

सोमवार, 23 दिसंबर 2019

सुबह उठकर न करे ऐसा

अगर आप सुबह उठकर
ऐसा करते हैं, तो आज से
आप यह जान ले,कि आगे से
आप ऐसा न करे...सुबह उठतेही
आप नहाये नही ,आप के शरीर
का तापमान विगड सकता हैं।


शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

यह प्यास कब बुझेगी

चुप खडा बगुला,
डुबाए टाँग जल मे,,
देखते ही मीन चंचल,
ध्यान निद्रा त्यागता हैं,,
चट दबाकर चोच मे,
नीचे गले के डालता हैं,,
एक काले माथ वाली, चतुर चिडिया,
सफेद पंखो के झपटे मार फौरन,,
टूट पडती हैं भले जल के ऊपर,
एक उजली चटुल मछली,,
चोच पीली मे दबाकर,
दूर उडती हैं गगन मे,,,,,,,,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

सही निर्णय

कुछ समय पहले की बात है,
  एक बार राजकुमार गौतम,
अपने बगीचे में सैर कर रहे थे।
    उसी समय अचानक एक,
घायल हंस उनके सामने आ गिरा।
  उसका शरीर
तीर लगने से घायल,
हो गया था।
  राजकुमार को उस  हंस पर दया
आ गयी।
और फिर उसने उस हनस को गोद
   मे उठा लिया।
वे प्यार से उनके पंखो को सहलाने लगे।
  फिर उसने धीरे से उसके शरीर से
तीर निकाला, और उसके घाव को साफ
  किया, फिर उस हंस को पानी पिलाया
धीरे धीरे हंस की पीडा कम होने लगी।
  कुछ समय बाद राजकुमार का चचेरा
भाई गौतम दौडता हुआ वहां आया।
  वह बोला यह।इस मजे दे दो यह मेरा
शिकार हैं।
  गौतम ने सवाल किया‌‌,,,तुमने इस पक्षी
     को घायल किया।इसने तुम्हरा किया
वीगाडा था।
    मैंने इसे बचाया हैं यह मेरा है,मैं इसे
तुमको नहीं दे सकता।यह कहकर वह
राजमहल की ओर चल दिया ,देवदत्त
भी पीछे पीछे चल दिया।
  दोनों निर्णय के लिए राजा के पास पहुंचे।
देवदत्त ने अपनी बात कही ।गौतम मेरा हंस
नहीं दे रहा है।यह हंस मेरा है इसे मैनै मारा है।
   गौतम बोला मैंने इसे बचाया हैं,यह मेरा है।
राजा ने दोनों की बातो को सुना।
  राजा ने कहा,,,, मारने वाले से बचाने
वाला अधिक बड़ा होता है,,,,
  अतः इस हंस पर गौतम का अधिकार है।
राजकुमार गौतम आगे चलकर,,,

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

चालाक लोमडी और सारस

कुछ समय पहले की बात है।
  किसी जंगल में एक लोमडी,
और एक सारस रहते थे।
   दोनो मे खूब मित्रता थी।
दोनो सारे काम साथ साथ ,
   करते थे।
एक दिन की बात है, लोमडी ने,
    सारस को अपने यहाँ दावत
पर बुलाया।
  लोमडी ने अपने मित्र के सम्मान में,
     मीठी खीर बनाई।
उसने इस खीर को एक चौडी,
   थाली मे परोस दिया।
लोमडी बोली भाई सारस,
  आओ खाना शुरू करें।
दोनो साथ साथ खाने बैठ गये।
   लोमडी तो तेजी से सारी,
खीर खा गयी।
   लेकिन सारस की बडी चोच,
मे खीर न पहुंच सकी।
    उसे भूखा रहना पडा।
वह लोमडी से वोला.....
   आप का भोथन वहुत,
स्वादिष्ट था।
   आज शाम का खाना आप को,
मेरे यहाँ करना हैं।
   सारस लोमडी से बदला लेना,
चाहता था।
उसने बढिया शोरवा पकाया।
  शाम को लोमडी मित्र के घर,
आ पहुंची।
    शोरवे की मीठी सुंगध से,
लोमडी की भूख तेज हो गयी।
  सारस ने सुराही मे शोरवा परोसा।
जिसका मुँँह बहुत छोटा,और ,
   पतला था।
सारस ने बहुत आराम से,वर्तन
  मे चोच डाली और बडे मजे से
सारा सोरवा पी लिया।
   लोमडी भूख के मारे चुपचाप,
बैठी यह सब देखती रही।
  लोमडी अब समझ चुकी थी,
कि उसने अपने मित्र के साथ ,
 चालाकी दिखा कर बहुत बडी,
 गलती की हैं।
ऐसा करके अब वह अपने,
व्यावहार पर पछता रही थी।

रविवार, 8 दिसंबर 2019

मेरा कल्पना शील मन

मेरा कल्पनाशील मन अनेक
बार अनेक चीजो को देखता हैं।
कभी कभी मै कल्पना करता हूँ
कि यदि मेरा खुद का स्कूल
होता तो....
  मुझकों लगता कि मानो
हमारे ऊपर बहुत सी जिम्मेदारी
आ जाती।और मै उसे बाखूबी
निभाता।
 सबसे पहले मै स्कूल की सारी
व्यवस्था को नियमित रूप से
करता।
 स्कूल सही समय पर खुले,
सही समय पर उपस्थित,
  सही समय पर प्रार्थना हो,
समयनुसार सभी कलास
 पीरियड लगे,इस काम को
मै प्राथमिकता देता।
 हमारी देख मे ,परीक्षा की
योजना पढाई के लिए अत्यंत
 हितकर हैं।
और हम प्रयास करेंगे कि,
 छात्रो की समय समय पर
छोटी छोटी परीक्षाएं हो।
  साल भर मे कम से कम
दो बार बडी परीक्षा कराते।
 जिससे छात्र छोटी परीक्षा
के माध्यम से, विषय को
सारपूर्ण समझ सके।
 और बडी परीक्षा के द्धारा
पूरा पाठ्यक्रम तैयार कर सके।
  नकल और धोखाधड़ी को
समाप्त कर देता।
  मै स्कूल में उन गुदडी के
लालो को पहचानने और
विकसित करने का पूरा प्रयास
करता,...जो गरीबी के कारण..
अपनी प्रतिभा का विकास
नही कर पाते।ऐसे छात्रो
को प्रोत्साहन और सहायता
दिलाने का प्रयास करता।
  खेल कूद का बढावा देता।
बच्चों को समय समय पर
खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित
कराते,और उसमे उनको
पुरस्कार विजेता घोषित करते।
   बाद विवाद ,नाटक,अभियान,
भाषण,आदि कार्य मे बच्चों
को गहरी रूचि दिलाते।

 इसकेलिए मै कला संपन
अध्यापक का एक उत्साही
मंडल तैयार करता,जो
बच्चों में यह सब कला
विकसित करतेऔर
उनका चहुंमुखी विकास
करने मे उनकी सहायता प्रदान
करते।
  हमारा प्रयास होता कि
  हमारे स्कूल के छात्र केवल
ग्रहक न हो,अध्यापक ज्ञान
विक्रेता न हो।
  उनमे ज्ञान,श्रद्धा और प्रेम
का गहरा सम्बध हो।
   इसके लिए मै हर संभव
प्रयास करता।
   मै अपने अध्यापक और
छात्रो के बीच निरभयता का
वातावरण वनाता,जिससे
सब एक दूसरे को अपनी
भावनाऐ कहसुन सके।
     मै समझता हूँ कि...
इन उपायों मे मेरा स्कूल...
   एक श्रेष्ठ स्कूल बन जाता।

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

एक सज्जन इलाहाबाद पहुंचे

गांव से चलकर एक सज्जन इलाहाबाद
पहुंचे। जेसे ही ्् वह टेंशन से
उतर कर बाहर निकले , वैसे ही
एक लड़का आकर उनके पैरों
पर गिर जाता है,और कहता है,
अरे चाचा जी ,आप कहां थे,,,
    आप ने यहां तक आने में
इतनी देरी लगा दी।और हम
कब से आप की राह देख
रहे हैं।तभी सज्जन महोदय
ने कहा आप कौन हो भाई
हमने आप को पहचाना नहीं।
   अरे आप ने हमें नहीं पहचाना,,
हम आप के दूर के चाचा के
मामा का लड़का मोहन हूं।
  मोहन ,,कौन मोहन,,
खैर छोड़ो,अब मैं बूढ़ा हो गया,
इसीलिए,निगाहें कमज़ोर हो
गरीब हैं,हो तुम पहचान में
नहीं आ रहे हो।
   खैर छोड़ो,अब एक से भला
दो लोग हो गये
  अब इलाहाबाद घूमने मे काफी
मजा आएगा।
  अब वह सजजन अब मोहन
के साथ इलाहाबाद घूमने लगे।
   चलो कोई साथ तो मिला।
कभी इस मंदिर से उस मंदिर,
अब पहुंच गये गंगा घाट।
मोहन,,न हां ले।
 हां हां नहा लीजिए।इलाहाबाद
घूमने आऐ हैं, नहाये नहीं,
यह कैसे हो सकता हैं।
अब महासय  गंगा मे डुबकी लगाई
हर हर गंगे।बाहर निकले तो
महासय का सारा सामान गायब।
  कपड़े गायब,,मोहन भी गायब।
मोहन ऐ मोहन।
लेकिन मोहन वहां पर हो
तो बोले।अब महासय
तौलिया लपेटे खड़े हैं।अरे
भाई साहब आप ने मोहन
को  देखा है ।
कौ



गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

एक बेटी का खत

एक पिता कहता है कि, बेटी हमें
अफसोस है कि तुम इस देश में
पैदा हु ई है। जहां लोग एक जुर्म
छुपाने के लिए,दूसरे जुर्म का सहारा
लेते हैं। जहां पीड़ित पीड़िता के
बजाय अपराधी और उसका धर्म
महत्व पूर्ण हो जाता है।
     औरत के शरीर के भूगोल
को देखने वाला हमारा समाज
पता नहीं उनकी आत्मा को क्यों
नहीं देख पाता।
  आप को पता है ,औरते चुप क्यों
रहती हैं, क्यों कि बोलना उन्हें
बचपन से ही सिखाया ही नहीं जाता।
      अगर वे आवाज ऊंची करके
बोलती हैं तो उनको धीमा बोलना
सिखाया जाता है।
    जहां तुम परी बनकर उतरी
थी वहां नारी को देवी मानकर
पूजा करना एक ढोंग है।
     तुम जैसे करोड़ों बेटियों
ने यहां पर जन्म लेकर गलती की है ‌।
       यहां राजनैतिक यह आर्थिक
बदला लेने के लिए बेटियों को ही
चुना जाता है।
   आपबीती सुनाने में
बेझिझक शब्द फूटते नहीं
गले से ।
   अपनी सखी सहेलियों से से ही
कह पाती है।


बुधवार, 4 दिसंबर 2019

अनुशासन की प्रथम पाठशाला

अनुशासन काअर्थ है,
       शासन .....ब्यवस्था के
अनुसार जीवन यापन करना।
यदि कोई ब्यवस्था निश्चित हैं,
तो उसके अनुसार जीना।
    जीवन मे कोई नियम ब्यवस्था,
या क्रम बनाना।
  अनुशासन जीवन को चुस्त दुरुस्त
बना देता है।
इससे कार्य कुशलता बढती हैं।
 समय का पूरा पूरा सदुपयोग होता हैं।
      अनुशासन का पहले पहल
परिवार से सीखा जाता हैं।
यदि परिवार में सब कार्य ब्यवस्था से
किये जाते हैं तो बच्चा भी अनुशासन
सीख जाता हैं।
इसलिए मनुष्य को सबसे पहले
अपना घर अनुशासित होनी चाहिए।
    सामाजिक जीवन में अनुशासन होना
अनिवार्य है। जैसे ‌‌‌‌,,,
     गाड़ी, बसे, स्कूल, कार्यालय,
सभी समय से खुले,,,
समय से बन्द हो।
    कर्मचारी ठीक समय पर अपने अपने
स्थान पर कार्य के लिए तैयार हो।
   यहां पर टालमटोल न हो।
  इसी के साथ छात्र भी समाजिक
कार्यो में यथासमय पर पहुंचे।
वेवहां की सारी नियम ब्यवस्था
 का पालन करें।
वास्तव में अनुशासन एक स्वभाव है।
     एक ज्ञान है।
जीवन को समधुर सुविधा पूरा करना।
वह न केवल स्वच्छता पर ध्यान
देता है, अपनी बोलचाल और ब्बयवहार
पर भी ध्यान देता है।
     इस प्रकार,,,,
  अनुशासन जीवन मूल्य है।
मनुष्य का आर्दश है।

मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

लक्ष्य मानव का

हर मानव का कोई न कोई
लक्ष्य होना चाहिए।
लक्ष्य बनाने से जीवन में रस
आ जाता है।
मैने तय किया कि हम पत्रकार
बनूंगा।नव भारत टाइम में संबाददाता
बिरोधी बिभाग के प्रमुख पत्रकार।
  जो पिछले वर्ष गैस सिंलेडर
मे हुए बडे पैमाने पर धाधली
को अपने लेखो के माध्यम से
बन्द करवा दिया था।
उन्हीं के लेखो के कारण...
   आज हमारे शहर मे बहुत
से गरीब परिवार के लोगो
और दीन दुखियों को न्याय मिला।
    बस यही सब कारण है कि
आज हम उनका आदर करते हैं।
  और मेरा भी मन करता हैं कि
हम उनकी तरह पत्रकार बनकर
रोज बढती समस्या का डट कर
मुकाबला करें।
   जबकि हमको पूरी तरह से
पता हैं कि एक पत्रकार बनने
मे खतरा बहुत ज्यादा है, और
तो और पैसा भी बहुत कम मिलता


बुधवार, 27 नवंबर 2019

ऐसे बनेगा अयोध्या राम मंदिर

अयोध्या में जन्मे त्रीराम
प्राचीन इतिहास के महानायक
हैं। सारी दुनिया में राम
लीला होती हैं।इन्ही त्री
राम की जन्मभूमि का
प्राचीन मंदिर घ्वस्त हुआ।
मंदिर के लिए तमाम
संघर्ष हुऐ।समूचा भारत
आंदोलित था। न्याय
पीठ के फैसले की सहज
लोकस्वीर्कत से अदभूत
वातावरण वना।फैसले को
लेकर विश्व जिक्षासा थी।
तमाम आशाऐ भी थी।
दुनिया में भारत की संबैधानिक
संस्थाओं की प्रतिष्ठा बढी।
   अयोध्या में प्रस्तावित राम
मंदिर दुनिया का सबसे
दिब्य व सबसे अलग होगा।
मंदिर निर्माण की मरमपरिक
नगर शैली में बनने वाल
यह मंदिर आठभुजा मे
बनेगा।108 फिट का
गुम्मबद भी आठ भुजा
मे बनेगा।
यह दो मंजिला होगा।
 मंदिर परिसर ढाई एकड का होगा।
दो से तीन साल में यह बन
कर तैयार हो जायेगा।
  जिसके लिए 250 से
300 कारीगर काम करेंगे।
  राजस्थान भरत पुर के
बंसी पहाडपुर गांव के
गुलाबी पत्थरो से यह
तैयार किया जाऐगा।
   सबसे पहले मंदिर की
चौकी होगी।
   251 खम्भों पर टिका
होगा मंदिर।
  500 सौ लोग एक बार
मे दर्शन व आरती कर सकेंगे।
 यह दुनिया का एक
अदभुत व अनोखा होगा।
जिसे देखने व दर्शन
करने के लिए पूरी दुनिया भर
के लोग आयेगे।


शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

महिला की ईमानदारी

किसी गांव में एक गरीब परिवार
रहता था।उस परिवार में एक छोटा
सा लडका और उसकी माँ रहती.थी।
और उस परिवार में कोई नही था।
वह गरीब महिला अपने छोटे से पुत्र
के साथ अपने झोपड़ी में रहती थी।
  और थोडी दूर पर सेठ धनी राम
का मकान था।वह गरीब महिला
सेठ धनी राम के घर पर झाडू पोछा
कर अपना और अपने लडके का
पेट पाल रही थी।
     एक दिन की बात हैं, सेठ धनी
राम कुछ धन और कुछ पैसा लेकर
घर से लेकर निकले,और थोडी दूर
जाने के बाद रास्तें मे उनका धन
गिर गया।और सेठ धनीराम को
यह.समझ नही आया कि हमारा
धन कहांं पर गिर गया।
   सेठ धनी राम अपने धन को
लेकर बहुत परेशान थे।
   उधर महिला अपने घर से निकली
सेठ के घर काम करने के लिए।
थोडी दूर आने पर देखती हैं कि
रास्ते में एक पोटली पडी हुई हैं।
वह महिला उस पोटली के पास
जाती हैं और उसको उठा ती हैं
और उस पोटली को खोलकर
देखती हैं, तो उस पोटली मे
सोने की मोहरे और पैसे भरे
हुऐ थे।
    उस महिला को कुछ समझ मे
नही आ रहा था,कि वह उस पोटली
को किसे दे,
   वह उस पोटली को सेठ धनी राम
के पास लेकर गयी,चूंकि महिला
ईमानदार थी ।
    सेठ धनी राम उस पोटली को
अपने हाथ मे लिया,उसे खोला
और देखा,बहुत खुश हुआ।
   फिर सेठ ने उस महिला को
खूब ढेर सारी सोने की मोहरें
दिया और उसके लडके का नाम
बढिया स्कूल मे लिखा दिया, और
उस महिला के लडके की पूरी
जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लिया।


  महिला की ईमानदारी को देख
   सेठ बहुत प्रंसन था।

मंगलवार, 19 नवंबर 2019

मन कहतख है...

मन कहता हैं, तारे बन कर,,
आसमान को ,देखकर आऊ,,
 मन कहता हैं, पंक्षी बनकर,,
आसमान की,सैर कर आऊ,,

मन कहता हैं, भंवरा बनकर,,
फूलों का मै,रख चख आऊ,,
मन कहता हैं, कोयल बन कर,,
मीठे   मीठे,        बोल सुनाऊ,,

मन करता हैं, मै चरखी लेकर,,
लाल    पीली,  पंतग  उडाऊ,,
मन करता हैं, मै तितली बनकर,,
दूर   दूर  तक,  उड़  कर सैर कर आऊ,,
                            ---आर.कुमार...

शनिवार, 16 नवंबर 2019

खुशी के पल

कठिन परिश्रम सफलता की कुंजी होती हैं।
   लेकिन अति के लालसा के परिणाम
भयानक होते हैं।इसलिए मनुष्य कितना भी
    अर्जित कर ले लेकिन वह और अधिक की
लालसा मे,अपना सुख चैन खो बैठता हैं।
     उसे खुशियां तो तमाम मिलती हैं,
      लेकिन न तो उनको वह देख पाता
      हैं, और न ही उनका आनंद उठा पाता हैं।
कस्तूरी मृग की भांति, हम खुशियों को
     यहाँ वहाँ खोजे जा रहे हैं।
स्थिति सकारात्मक हो या
नकारात्मक जीवन को सदैव
आनंद के साथ जीना सीखना चाहिए।जीवन मे कर्म प्रधान ही
सफलता का मूल आधार है।
"कर्म किए जा फल की इच्छा,
मत कर यह इंसान,,
जैसा कर्म करेगा,
वैसा फल देगा 
 भगवान.....

रविवार, 3 नवंबर 2019

सनकी सेवक

राजा के दरबार में एक सनकी सेवक
रहता था।राजा ने उसे अपने काफी
नजदीक रहता था।वह राजा का वफादार
सेवक था।वह राजा की खूब सेवा
करता था। राजा भी उस सेवक की
वफादारी से खूब खुश रहता था।
   एक दिन की बात है,
   राजा अपने कमरे मे
  आराम कर रहे थे।और
  वह वफादार सेवक
 राजा को पंखे हाक रहा
था।तभी राजा के ऊपर
एक मंखी उड कर आकर
बैठ गयी।सेवक उसे उडाता
वह मंखी फिर आकर राजा
के कपडो पर आकर बैठ जाती।
तभी सेवक ने बगल रखा हुआ
एक डंडा अपने हाथ मे उठाया,
और जैसे ही मंखी दूबारा राजा
के ऊपर बैठी तभी सेवक ने
उस डंडे से राजा के ऊपर
जोरदार उस डंडे से वार किया
और फिर मंखी तो उड गयी,
लेकिन राजा को कफी गंभीर
चोटे आई,राजा बेहोश....
...इससे हमे यह सीख,
..मिलती है कि एक मूर्ख,
.से ठीक एक बुद्धिमान,
ठीक होता हैं।....

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2019

संत की बात

गांव की एक गरीब महिला, जो
बहुत परेशान रहती थी वह एक
दिन पडोस मे रह रहे एक कुटी
पर संत के पास गयी।उस गरीब
महिला ने उस संत से कहा....
   बाबा मै बहुत परेशान रहती हूँ।
    मै मेहनत करती हूँ, पर घर मे,
      हमारे बरकत नही होती हैं।
मेरा परिवार बहुत दुखी  हैं।
बाबा.. मुझे कोई उपाय बताए।
उस गरीब महिला की बात को
सुनकर बाबा ने महिला को एक
पर्ची दी और कहा इसे सहेज कर
रख देना,और इसे तब खोलकर
देखना जब तुमको बहुत जरूरत हो।
   उस महिला ने वैसे ही किया।
  उस पर्ची को सहेज कर रख दिया।
और खाना पका खा कर सो गयी।
     सुबह जब वह महिला उठती हैं,
तो देखती हैं उसके आगन मे एक
नोटो से भरा हुआ बैग पडा हुआ हैं।
उस महिला ने उस बैग को उठाया
और उसे खोला ,उसमे एक बडी सी
पर्ची भी थी,जिसमे लिखा था कि इस
पैसे से कोई करोबार कर लेना....
  उस महिला ने दूसरे दिन किराये पर
दुकान लेकर कारोबार शुरू किया।
उस महिला को उस कारोबार से
इतना फायदा हुआ मानो पैसों की
बारिश उस महिला के घर मे होने
लगी..उस महिला का कारोबार ठीक चलने लगा।
     कुछ दिन बाद अचानक एक दिन
     उस महिला को बाबा की दी हुई
    पर्ची की याद आई...
फिर उस महिला ने छट से जाकर
उस पर्ची को देखा और उसे खोला...
    फिर पढा...
   "जिस पर्चा मे लिखा था"
"यदि किसी के घर मे रात को,
बच्चों की रोने की अवाज आए,
तो कुछ पैसे उनके घरो मे भी डाल देना"/

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

राम राम दो बार

सदियों से चला आ रहा हैं।
जब लोग एक दूसरे से मिलते,
हैं तो आपस मे एक दूसरे को
दो बार "राम राम"बोलते हैं।
   आखिर क्क्यो हम हम राम
राम एक य तीन बार नही बोलते।
   दो बार राम राम बोलने के पीछे
बहुत बडा राज छुपा हुआ हैं।
जो आदि काल से चला आ,
रहा हैं। जो कि ...
"हिंदी की शब्दावली मे
   र  सत्ताइसवा शब्द हैं...27
               और
आ की मात्रा दूसरा शब्द हैं...2
              और
म पच्चीस वा शब्द हैं...25
      और
अब तीनो का योग करे तो...
  27+2+25=54
        अब
एक राम का योग 54 आता हैं
          इसी तरह
दूसरे राम का योग
   27+2+25 =54
       अब दोनो राम क योग...
      54+54=108 होता हैं।
और हम जब कोई जाप करते
हैं तो "मन के की माला"
गिन कर करते हैं..
    इस तरह से
राम राम
दो बार
कह देने
से ही
पूरी
मन के
की माला
का जाप
हो जता हैं।
एक पौध

रविवार, 13 अक्टूबर 2019

यह वक्त गुजर जायेगा

एक समय की बात हैं,
     अकबर ने बीरबल को अपने दरबार
    मे बुलाया, और कहा,
बीरबल...मै जहाँ बैठा हू इसके ठीक
            सामने वाली दीवार पर कुछ
           ऐसा लिखो कि,मै...
"गम मे उसे पढूं  तो खुशी हो" !
"खुशी मे मै उसे पढूं, तो गम हो" !
     यह सुनकर बीरबल थोड़ी देर
     खडे होकर सोचने लगे ,और फिर
वह जाकर सामने वाली दीवार पर लिखा...
       "'यह वक्त गुजर जायेगा"
अकबर को बीरबल की लिखी हुई यह
बात बहुत पसंद आई,फिर अकबर ने
बीरबल को ढेरों, सोने चादी के उपहार दिया।
  किसी ने सच ही कहा हैं...
    यह वक्त कब गुजर जाता है,
किसी को पता ही नही चलपाता,
इसलिए समय के साथ चलना सीखो,
जो समय के साथ चला हैं,
वही आगे वढा है।।
   चलते रहने का नाम जिंदगी है।
चलते रहेगे तो एक दिन, मंजिल तक
अवश्य पहुंच जायेंगे।.....C.t.m.founder

गुरुवार, 10 अक्टूबर 2019

एक गरीब आदमी

किसी गांव में एक बहुत ही
गरीब परिवार रहता था।उस
परिवार के मुखिया का नाम
दीनानाथ था।उस परिवार में
दीनानाथ और उनकी पत्नी
रीना ,और एक बेटा राहुल था।
दीनानाथ का परिवार बहुत ही
गरीब था। वह दिन भर मेहनत
मजदूरी कर किसी तरह अपना
और अपने परिवार के लिए
कमा कर लाता था,और बडे
ही मुश्किल से रोटी का जुगाड़
कर पाता था।वह गाँव मे जब
निकलता था,गांव के लोग
उसके गरीबी का मजाक उडाते
थे। दीनानाथ को यह सब ठीक
नही लगता था।उसे गांव के लोगों
की बाते सुनकर बहुत दुख होता
था।उनको समझ मे नही आता था
कि आखिर वह का करे कि उनका
परिवार भी खुशहाल जीवन जिये।
   एक दिन दीना नाथ मजदूरी करने
गांव से कुछ दूर पर गया।वहा पर बहुत
पुरानी जमीन जो कई सालो से
बंजर पडी हुई थी ,उसी जमीन पर
उसे खुदाई करना था।वह अपने
हाथ मे एक फावडा और टोकरी
साथ लेकर गया था।उसने वहाँ
पर खुदाई करने लगा।धीरे धीरे
उसने दो घंटे तक खुदाई किया।
    चूंकि जमीन कफी पुरानी,
     और बंजर थी इस लिए
 खुदाई करने मे परेशानी होती
  थी,लेकिन फिर भी ,दीनानाथ
  ने खुदाई बन्द नही कीऔर
धीरे धीरे पाँच फिट गहरा गडढा
खोद डाला,पांच फिट के बाद
दीनानाथ ने जैसे ही और गहरा
गडढा खोदना चाहा, उनको
कुछ दिखाई दिया।उसने फावडे
से मिटटी हटा कर देखा तो वह
दंग रह गया।वहां एक संदूक मे ढेर
सी अर्सफी भरी हुई थी।
   अब तो दीनानाथ की तकदीर
ही बदल गई।वह उसे उठा कर
घर ले आया।
  और फिर दूसरे दिन वह नहां
धोकर तैयार हुआ, और उसने
कुछ अर्सफी लेजाकर बाजार
मे बेच दी।और उस पैसे को
घर ले आया। चूंकि घर की
माली हालात ठीक नही थी
इसलिए पहले उसने उस पैसे
से बाजार से अनाज ,और खाने
पहनने का सामान खरीदा,फिर
उसे घर ले आया।उसके बाद
फिर उसने अपना रहने के लिए
घर का प्रबंध किया।
और ठीक ठाक रहने लगा।
अब गांव के जो लोग
उस पर हसते थे वही
लोग राह चलते य इधर
उधर कही पर मिलते
दीनानाथ को नमस्कार
अवश्य करते थे।
कहते हैं.. मालिक जब देता हैं..
  तो छप्पर फाड कर देता हैं।।
यह कहावत दीनानाथ पर
बहुत सही साबित हु ई।
  कभी किसी गरीब का
  मजाक नही उडाना चाहिए।
कब किसकी किस्मत कहाँ
बदल जाय यह कोई नही जानता।।
          Co founder. R.kumar
            "Click tech money.com"
................................................


शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2019

स्वच्छता ही जीवन

स्वच्छता के कमी के कारण
बच्चों में डायरिया, और कुपोषण
बढ जाता हैं जिससे बच्चों की
मृत्यु हो जाती हैं।
 विश्व बैंक की रिपोर्ट....
         दूनिया भर मेएक वर्ष मे
गंदगी के कारण लगभग 17 लाख
मौते होती हैं, जिसमे 30%बच्चे
होते हैं।
  लोगों मे स्वास्थ्य मे सुधार के
  लिए व्यक्तिगत और समुदायिक
दोनो स्तर पर स्वच्छता अनिवार्य है।

   स्वच्छता ग्राही रिपोर्ट......
           यह दरशाता हैं कि हम अपने 
आस पास फैली सक्रामण विमारियों
पर काबू पा सकते हैं, यह वदलाव
केवल स्वच्छ भारत मिशन की
वजह से देखने को मिल सकता
हैं। आज हम स्वचछ भारत मिशन
से संतुष्ट हैं, लोगों मे जागरूकता
देखने को मिल रही हैं।
  स्वच्छ भारत मिशन का मिशन
का यह आन्दोलन देश के समस्त
विकास का आधार भी बनेगा।

             ,स्वच्छ भारत मिशन, से
                     आर .कुमार,


गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019

एक कदम स्वच्छता की ओर

गांधी जी के स्वच्छ भारत के
सपनो को पूरा करने के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2अक्टूबर
2014 को स्वच्छ भारत अभियान की
शुरुआत की।इस अभियान में प्रशासन के साथ
आम लोगों को भी जोडा गया।
  और उनको जागरूक किया,
यही कारण हैं कि आज देश
के हर गाँव में,शौचालय का
निमार्ण हुआ।स्वच्छता को
लेकर आम लोगों मे अधिक
जागरूकता देखने को मिली।
  इसे आनदोलन का रूप देकर
स्वच्छ भारत मिशन मे स्वच्छता ग्राही
की नियुक्ति की गई और इनकी
तैनाती गांव मे की गई।
इन्होंने गांव में जाकर वहां के
प्रधान, आशा बहू, आगनबाड़ी
कार्य कत्री,सेक्रेट्री के साथ
मिलकर  गांव के लोगों को
इकट्ठा कर लोगों को इसके
विषय में जानकारी दी।
 और घर घर जाकर सव्रेक्षण
कर लोगों को इसकी पूरी
जानकारी दी,।और शौचालय
का निर्माण कार्य करा गाँव को
"खुले मे शौच मुक्त"
 करा एक मुकाम हासिल किया।
कहते हैं... जिसने ठान ली
          ... जीत उसी की हैं,,
और यह सब कर दिखाया
गाँव में तैनात "स्वच्छता ग्राही"ने।।
इनहोने इस काम में अपना
पूरा योगदान दिया है।...S b.m...R.ku.

रविवार, 29 सितंबर 2019

एक बन्दर

किसी जंगल मे बन्दरो का
झुंड रहता था।वह सव बहुत उछल कूद
करते रहते थे।उसी जंगल मे
शेर भी रहता था।
एक दिन शेर सो  रहा था।
तभी एक वन्दर ने
उस शेर के पास जाकर
उसका एक कान खीच
लिया,शेर उठा और बोला
किसी ने देखा तो नही
हमारा कान खीचते हुए,
वन्दर वोला नही,
शेर फिर वोला ,दुवारा
खीचो खीचते रहो,
मझे अच्छा लगता है।
इस जंगल में अकेला
रहते रहते मै बोर हो
गया हूँ, कम से कम एक
मुझे दोस्त तो मिल गया।
जिसके साथ मै कुछ पल
विता तो सकता हूँ।

गुरुवार, 26 सितंबर 2019

"अपनो की याद"

"जहाँ अपनो की याद न आऐ।
"वह तन्हाई किस काम की।।
"बिगडे रिश्ते न मिले।
"वह खुदाई किस काम की।।
"बेशक अपनी मंजिल तक ।
          "जाना है मुझे।।
"पर जहाँ से अपने न दिखे"
"वह ऊँचाई किस काम की"

"रिश्ता वह नही होता हैं"
"जो दुनिया को दिखाया जाता हैं।।
"रिश्ता वह होता हैं।
"जिसे दिल से निभाया जाता हैं।।
"अपना कहने से कोई अपना नही होता।
" अपना वह होता हैं ,।
"जिसे दिल से अपनाया जाता हैं।।
🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
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बुधवार, 25 सितंबर 2019

कहानी एक घर की

सेठ हीरा चंद ,बडी ही,
खुशी से कही आने जाने,
के लिए बडे ही प्यार से,
अपने और पूरे परिवार की,
खुशी के लिए ,एक महगी,
फोर ब्बीहीलर कार घर ,
लेकर आया।और उसी कार ,
से वह और उसका परिवार,
जहां कही भी आना जाना,
होता था वह लोग आया जाया,
करते थे।एक दिन सेठ हीरा चंद,
अपनी गाडी की धुलाई,
कर रहे थे,तभी वहां पर,
उनकी पोती पहुचती हैं,
और उसके हाथ मे एक ,
नुकीला पत्थर था ,वह
उसी से गाडी के सीसे पर,
लिख देती हैं, पापा "आई...
लव यू"....इससे पहले की
वह कुछ लिखा हुआ देखता,
सेठ ने अपनी पोती को यह,
करते देख इतनी जोर से छिटका,
कि उसके हाथ मे जोर की,
चोट आ गयी...फिर उसने डा.कटर,
को बुलाया और उसका इलाज,
कराया...बाद मे सेठ को बहुत,
पछतावा हुआ।फिर सेठ जाकर,
गाडी पर अपना गुस्सा निकालने,
लगा ,तभी उसकी नजर उस ,
लिखे हुए स्क्रेच पर पडती हैं,
जिस पर लिखा हुआ था..
"पापा आई लव यू"
  यह लिखा हुआ देख सेठ की ,
आँखे भर आती हैं और वह,
जोर से फफक कर रोने लगता,हैं,
उसे अपनी गलतियों पर ,
पछतावा होता हैं।..?
...गुस्से और प्यार की सीमा,
             नही होती हैं।
...याद रखे चीजे प्रयोग,
         करने के लिए होती हैं।
...और इंसान प्यार करने,
           के लिए होते हैं।
.... 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
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🌲🌲🌲🌲🌲

सोमवार, 23 सितंबर 2019

यह जिन्दगी

जिन्दगी एक अभिलाषा हैं।
गजब इसकी परिभाषा हैं।।
जिन्दगी कैसे हैं, मत पूछो।
सवर गयी तो तकदीर,
         और
बिगड गयी ,तो
तमाशा हैं।।
  यह जिन्दगी अजीब है।
सपने तो सब देखते हैं,
ऊची उडान सब कोई ,
उडना चाहता हैं, पर
दौडते तो सब हैं, लेकिन
इस दौड मे ,पहला स्थान
केवल एक ही को मिलता
हैं।ठीक उसी तरह सब लोग आगे
निकलना चाहते हैं।पर कोई हाथ
उठाकर आसमान को छू लेता हैं
तो कोई पीछे रह जाता हैं।
 ऐसे लोगों को केवल इतना
समझाने की आवश्यकता है
कि उनका जीवन सही वने
या बुरा इसका निणर्य पूरी
तरह उसे खुद ही करना हैं।
  उसे य उस जैसे मानवो
को य तो स्यम की विचार
मेधा के सहारे अथवा किसी
को विवेक वान आदमी के
शिक्षण द्धारा निरंतर मनन
करना होगा,कि जीवन काल
मे किसी भी मनुष्य की विफलताऐ
भूल जाने वाले दु:ख दर्द और
       सुख शांति
पाने मे किसी भी प्रकार
की मदद नही कर सकते।

रविवार, 22 सितंबर 2019

"अचानक एक मोड पर"

एक समय की बात है।
किसी रास्ते से ,इधर से,
दु:ख जी जा रहे थे,और ,
उसी रास्ते से उधर से सु:ख,
जी चले आ रहे थे। कि उसी,
रास्ते पर एक तिराहा था,उसी,
तिराहे पर दु:ख और सु:ख दोनो,
की मुलाकात हती है। दु:ख ने सु:ख,
से कहा,तुम कितने भाग्य शाली हो,
जो लोग तुमको पाने की कोशिश,
मे लगे रहते हैं।तब सु:ख ने,
हसते हुऐ कहा...भाग्य शाली मै,
नही तुम हो....तब दु:ख ने हैरानी,
से पूछा, भाई वह कैसे.... तब सु:ख,
ने बडी ईमानदारी से जबाब दिया......,
यह ऐसे कि , .......
"तुमको पाकर लोग "
"अपनो को याद करते हैं"
"लेकिन मुझको पाकर"
"सब अपनो को भूल जाते हैं"

शनिवार, 21 सितंबर 2019

काम चोर आदमी

एक गांव में बच्चों के पढने के।
लिए स्कूल नही था।उस गांव में।
बच्चे बहुत दूर नाव के सहारे ,नदी।
पार कर ,अपनी जान जोखिम में।
डाल कर बच्चे स्कूल पढने जाया।
करते थे।....
  और फिर एक दिन गांव के लोग
इकट्ठा हुए और आपस मे बिचार,
किया कि हम लोग थोडा ,थोडा
पैसा ,चन्दा लगा कर गांव के पास ,
जो थोडी सी जमीन पडी हुई हैं ,उसी
पर छोटा सा स्कूल बना लिया जाय।
गांव के सभी लोग राजी हो गये।
गांव के सरपंच, और लेखपाल, सेक्रेट्री,
को बुलाया गया।यह सभी लोग आये
जमीन देखी गयी,और उस जमीन की
पैमाइस की गयी।....
    और फिर गांव के सभी लोगों ने,
अपने अपने पास से ,थोडा थोडा पैसा,
₹पया ,देकर ढेर सा पैसा इकट्ठा किया।
      फिर उस इकट्ठा किया हुआ पैसा से
समान मगाया गया।और फिर निमार्ण का
काम चलू कर दिया गया।
     उस गांव के महिला, पुरुषों ने मिलकर
अपना श्रम दान भी दिया।और काम तेजी
से होने लगा।
  दूसरे दिन सभी लोग काम कर रहे थे,
पर रामू मुह लटकाकर खडा हुआ था।
तब वहां पर खडा हुआ देखकर सेक्रेट्री
ने पूछा,अरे रामू का हुआ तुम ऐसे,काहे
को खडे हुऐ हो,जाओ काम करो....
   तब रामू बोला,...मुझे जोर से भूख
लगी हुई हैं।तब सेक्रेट्री ने अपने पास से
पैसे निकाल कर दिया और  बोले जाओ
खाना खा आओ। तब रामू भागकर
जाता हैं और खाना खाकर वापस आता हैं।
     तब रामू से सेक्रेटरी कहते हैं.....
    अरे रामू अब तो तुम खाना भी..
   खा लिए, अब काम पर लग जाओ..
  रामू बोला...अभी नही, हमने खाना,
इतना अधिक खा लिया है कि हमारा
पेट भर गया हैं, अब थोडा आराम कर ले
तब हम काम करेंगे।।।
 इसीलिए तो....
   काम करने वाले काम करते हैं।
 और काम न करने वालो के बहुत,
       बहाने होते हैं।
उधर निर्माण कार्य कुछ दिन में पूरा
हो गया,और गांव के छोटे बच्चे उसी
स्कूल मे हसी खुशी पढने लगे....
इसी लिए तो कहते हैं.....
 अनेकता से ऐकता ठीक होती हैं।
 ऐकता मे बहुत बल होता हैं।।

🌲🌲🌲🌲🌲एक पौधा लगाओ......
🌲🌲🌲🌲🌲प्रयावरण वचाओ......।।

शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

जिस घर के लोग

"जिस घर के लोग,
"ऐसे होते हैं।
"उ स घर मे,
"ऐसा ही होता हैं।
 अपने घर में। सुख शांति ,
बना कर रखे, कभी लडे नही,
कभी झगडे नही,कोई भी बात ,
हो घर मे खुलकर करे, और,
आपस मे बैठ कर उस पर बिचार,
करे,इसी मे सब की भलाई.......
🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
🌲🌲🌲 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
🌲🌲 🌲एक पौधा लगाओ 🌲 tree
🌲🌲🌲स्वच्छ भारत मिशन
........................................







मंगलवार, 17 सितंबर 2019

"पैसे से"

"माना कि आज के इस दौर मे
पैसा आगे आगे चल रहा हैं, और
इंसान उसके पीछै पीछे भागता
चला जा रहा है, पर इंसान अगर
सौ मे एक दो लोग इसे पा भी लेते
हैं तो इससे सारी सुख सुविधाएं नहीं
खरीद सकते हैं ,वह सुख सुविधाएं
हैं क्या आइए जानते हैं.....?
"पैसे से सुख खरीद सकते हैं"
      पर शांति नही ।।

"पैसे से औरत खरीद सकते हैं"
          पर पत्नी नही ।।

"पैसे से नौकर खरीद सकते हैं"
        पर सेवक नही ।।

"पैसे से कलम खरीद सकते हैं"
           पर विचार नही ।।

"पैसे से पाउडर खरीद सकते हैं"
         पर सुन्दर ता नही ।।

"पैसे से दवा खरीद सकते हैं"
         पर स्वास्थ्य नहीं ।।

"पैसे से आदमी खरीद सकते हैं"
          पर वफादारी नहीं ।।

"पैसे से ऐनक खरीद सकते हैं"
          पर आँखे नहीं ।।

"पैसे से भोजन खरीद सकते हैं"
          पर भूख नहीं ।।

"पैसे से विस्तर खरीद सकते  है"
         पर नीद नहीं ।।

इंसान कमाता तो है,
पर हर इंसान के पास,
हर सुख सुविधा उपलब्ध,
नहीं होता हैं, कुछ न कुछ,
उसके पास कमी अवश्य,
        रहती हैं ,?/₹₹₹₹₹₹
₹₹₹₹₹₹₹₹₹


₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹

रविवार, 15 सितंबर 2019

"Two bullocks in a forest"

"There were two bullocks
In a forest.they were
Fast friends.they always
Kept company and were
Always ready to help
Each other.Even the
Lion did not dare attack
Them .Once the thought
If he could separate
Them,he might kill one
Of them .so he went to
One of the bullock and
Said ,"Look! your friends
Is very selfish.He himself
Eats green grass ,and
Leaves you dry one
."The bullock beloved
The lion and began to graze
Alone.the lion whispered 
The same word to the
Second bullock.the
Result was that the
Second bullock also
Started grazing alone.
The lion got the chance.
He attacked one and
Devourd it.
  Soon , he devourd
  The second one.
.............. 🌲🌲🌲🌲🌲.........

शनिवार, 14 सितंबर 2019

निन्दा से घबरा कर

"निन्दा से घबराकर अपने
लक्ष्य को न छोडे"
"लक्ष्य मिलते ही निन्दा
करने वालो की राय बदल
जाती हैं"।
"निन्दा उसी की होती हैं,
जो जिन्दा हैं, मरने के बाद
तो सिर्फ तारीफ होती हैं"।
"कभी पीठ पीछे आप की
बात चले तो,घबराना मत,
बात तो उन्हीं की होती हैं
जिनमे कोई बात होती हैं"।
"छोटी छोटी बात दिल मे
रखने से बडे बडे रिश्ते
कमजोर हो जाते हैं"।
"प्रोत्साहित करने की आदत
डालो, हतोत्साहित करने
वालो की कमी नही हैं"।
"ऊपर उठने की आदत
डालो, टाँग खीचने वालो
की कमी नही है"।
"मुस्कुराने की आदत डालो,
रूलाने वालो की कमी
नही है"।
"सुनने की आदत डालो,
ताने मारने वालो की कमी
नही है"।
  यदि आप ऐसा करते हैं,
तो निन्दा से बचे रहेगे।
 यह समाज है, यहाँ पर
हर तरह के लोग रहते हैं।
हर लरह की बाते करते हैं,
पर इनकी बातो पर ध्यान
मत दे,जो सही हो उसे चुने
बाकी बाते दिमाग से निकाल दे।

गुरुवार, 12 सितंबर 2019

कभी वक्त मिले तो पढ लेना

यह दुनिया भी कितनी निराली हैं।
कैसे कैसे विचार धारा और सोच के
लोग रहते हैं।
?...जिनकी आँखो मे नींद है,..
.....उनके पास अच्छा विस्तर नहीं है...
...जिनके पास अच्छा विस्तर हैं....
...उनकी आँखो मे नींद नहीं.........
आज के इस दौर मे अच्छी सोच,और
सही विचार धारा के लोग बहुत कम मिलेंगे।
?...जिनके मन मे दया हैं........
....उनके पास खर्च करने के लिए धन नही...
...जिनके पास खर्च करने के लिए धन हैं..
...उनके मन मे दया नहीं हैं.......
यह रिश्ते भी अजीब होते हैं, किसी को
बाखूब निभाना आता है, तो कोई इस
रिश्ते की कदर नही करत और निभा
नही पाता।
?...जिन्हें कद्र हैं रिश्ते की....
...उनसे कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता है...
...जिनसे रिश्ता रखना चाहता हैं.....
....उन्हें कद्र नहीं है रिश्तो की........

यह पेट की भूख भी अजीब होती हैं।
कोई भर पेट भोजन कर आराम के,
विस्तर पर सोता हैं, तो किसी को भोजन
नसीब नहीं होता, वह भूखो पेट सो जाता हैं।।
?...जिनको भूख हैं......
.....उनके पास खाने के लिए भोजन नही है...
.....जिनके पास खाने के लिए भोजन है...
.....उनको भूख नही हैं........

यह इंसानी रिश्ता भी अजीब होता हैं,
कोई अपनें के लिए आधा पेट भोजन करता हैं,
तो कोई भोजन के लिए ही,अपनो से
रिश्ता तोड़ देता हैं।
?...कोई अपनो के लिए .....
....रोटी छोड देता हूँ......
....तो कोई रोटी के लिए.....
....अपनो को छोड देता हैं......

...बिना सघर्ष के इंसान....
...चमक नही सकता....
.....जो जलेगा उस दिये मे.....
...तो उजाला होगा ही.......

...उदास होने के लिए....
...उम्र पडी हैं.......
...नजर उठाओ .....
...सामने जिन्दगी खडी हैं........

...अपनी हसीं को होठोँ से मत जाने देना...।
...आप की मुस्कुराहट के पीछे, दुनिया पडी हैं...।

बुधवार, 11 सितंबर 2019

भागम भाग जिन्दगी

इंसान की लाइफ भी किसी "भागम भाग
जिन्दगी "से कम नही है। सुबह हुआ कि
फ्रेश हुऐ और न हाया नास्ता किया फिर
घर से निकल लिए।
  हाय पैसा हाय पैसा हाय पैसा...
इतना पैसा आऐ कहाँ से, कौन सा
काम करे कौन सा बिजनेस करे ,
कौन सी नौकरी करे ,कौन सा कोर्स करे,
दिन भर माथापच्ची, इस भाग दौड मे
टेंसन अलग बनी रहती हैं।
   फिर भी समझ मे नही आता ...
अपनी जिंदगी को कैसे सुधारा जाय।
समस्या जटिल है, दिन का दिन परेशानी
बढती जा रही हैं।
  आज जो हो रहा हैं वह कुछ हद तक ठीक
हैं, पर आने वाला कल कैसा होगा,यही
सोचकर दिमाग फटा जा रहा है।माथे पर
चिंता की लकीर बढती जा रही हैं।
   ऐसा न हो इसके लिए कुछ करे।
समय रहते चेत जाय।
    परेशानी कितनी भी कठिन हो,
हमेशा डट कर उसका सामना करें।
    किसी भी परेशानियों में डरे नही।
परिस्थितियों से इतनी जल्दी समझौता न करे।
     अपनी परेशानिया अपने दोस्तों से साझा करे।
इससे आप का मन हल्का हो जायेगा।
       मन मे घबराहट और बेचैनी न लाये।
घर से निकले तो ,घर की परेशानी घर छोड जाये।
     आप जिस काम से निकले हैं उसके विषय मे सोचे।
परेशानिया तो हर घर मे हैं, पर डट कर ,
   इसका सामना हम सब को करना ही पडेगा।

सोमवार, 9 सितंबर 2019

India ke former

An Indian former is poor.
So his house is not good.
It is not cemented.
It has no decent roof.
There is a thatch on
It.its door and window
Are old-fashioned.
... His life is very hard.
He rises early is the
Morning.he works
hard throughout the
Whole day.He goes to
his field before sunrise.At
Noon he takes his food.
And rests . for sometime
.He return home in
the evening.then he
Takes his food.
...He is poor and backward
.......................................

शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

"साहसी बूढा आदमी"

"गाँव से दूर एक बहुत बडा बाग,
था।उस बाग मे बहुत सारे बन्दर,
रहते थे।एक बार वह बन्दर कूदते,
फादते पहाडी पर बने एक मन्दिर,
पर पहुंच गये।उस मन्दिर मे उन्होंने,
कुछ घंटियों को देखा।और उन
बन्दरो ने उस घंटी को निकाल
कर अपने साथ ले गये।जब बन्दर
घंटी को हाथ में लेकर भाग रहा
था तव घंटी बज उठी और दूसरे
बन्दर बहुत खुश हो उठे।....
"इस तरह घंटी का बजना दूसरे
बन्दरो के लिए एक खेल बन गया।
उनको यह इतना पसंद आया कि,
वह दिन और रात घंटियों को
बजाने लगे।....
" गांव के लोग इस विचार से अनभिज्ञ
थे और सोचते थे कि कोई राक्षस पव्रत
पर घंटी बजाता हैं।इस कारण गांव के
लोगों मे राक्षस का डर बैठ गया।
इस तरह गांव के लोगों ने उस राक्षस
का नाम "घंटालिका" रख दिया।
और उसके डर से गांव छोडकर
भागने लगे।....
"उसी गांव में एक गरीब बूढ़ा
आदमी रहता था।वह गांव
छोडने मे स्र्समर्थ था।
और कही जा नही सकता था।
लेकिन वह बहुत साहसी था।
एक दिन इसका कारण जानने
के लिए वह पहाड पर चला गया।
वहां उसने देखा कि कुछ बन्दर
इधर उधर उछल कूद कर रहे थे,
और उनके हाथ मे घंटी थी वह
बज रही थी।यह देखकर वह हसा
और गाँव में आ गया।
वह गांव के मुखिया के पास गया,
और बोला...यदि हम पहाड से
राक्षस को खींच लाऊ तो ,आप हमे इनाम देगे।
गाँव का मुखिया खूशी से उसे
इनाम देने के लिए सहमत हो गया।
अगले दिन वह एक टोकरी में
कुछ फल लेकर पहाड़ी की ओर
गया।पहाड़ी पर उसने बन्दरो को
घंटी बजाते देखा।उसने कुछ दूरी
पर एक एक करके फल रख दिया।
बन्दर घंटी बजाना छोडकर
फलो की ओर दौडे।और उस बूढ़े
आदमी ने सभी घंटियों को अपने
हाथ मे लिया, और गाँव की ओर
चल दिया।
...उसने रास्ते में घंटियों को जमीन
मे गहराई में दवा दिया।तव वह
गाँव के मुखिया के पास गया,और
उसने कहा...कि उसने "घंटालिको"को
भगा दिया।सभी लोग और गाँव का
मुखिया उससे बहुत खुश हुए।उन्होंने
उस बूढे आदमी को धन्यबाद दिया।
और उसे उचित इनाम दिया।
..अब गांव के लोग शान्ति..
...से रहते थे।.....

गुरुवार, 5 सितंबर 2019

"अब चला मन्दी का दौर"

"बढती आबादी और जनसंख्या"
को देखकर यह अंदाजा लगाया
जा सकता हैं, कि इस समय
मंदी का दौर तो आना ही हैं।
" इस बढती हुई जनसंख्या वृद्धि
यह पूरी तरह से पहले से ही
इसारा करती हैं कि बेरोजगारी
तो बढना तय हैं।
"सरकार का ध्यान भी इस
ओर नहीं जा रहा हैं।
" कि एक कमेटी गठित कर
इसपर विचार किया जाय ,
और इसे रोकने का कोई,
उपाय ढूढा जाय,य प्रयास
किया जाय।
"लोग अपने घरो से निकलते,
 हैं काम के लिए चौक मंडी
मे जाकर घंटों इंतजार करते
हैं कि कोई अभी आयेगा, और
हमे काम पर लेकर जायेगा।
मगर ऐसा नहीं होता हैं, उसमे से 85%लोग
घरो को वापस लौट जाते हैं,
जिनको काम नही मिल पाता।
"अगर ए
ऐसा ही मंदी का दौर चलता
रहा तो वह दिन दूर नही जब
जब लोग अपने घरो मे दो
वक्त की रोटी जुटा पाना
मुश्किल हो जायेगा।
"सरकार को इस ओर ध्यान
देना चाहिए और यू.पी मे
जगह जगह कारखाने लगवाना
चाहिए और उधौगो को बढावा
देना चाहिए।"
"बडे बडे उधोगपति के साथ
सरकार को मीटिंग करना
चाहिए ,और उन से इस विषय पर
खुल कर विचार करे,और उनको
यह जानकारी दे,कि वेरोजगारी
की दर दिन प्रति दिन बढती ही
जा रही हैं।
"आखिर इसे कैसे रोका जाय"
इसे रोकने का उपाय अगर जल्द
ही न किया गया तो आने वाले कल मे इसका परिणाम क्या
होगा, इस बात का अंदाजा
इस बढ़ती हुई जनसंख्या वृद्धि
से लगाया जा सकता हैं।
"बेरोजगारी दर को कम करने,
का उपाय किया जाय"।
"इस तरह से बढ़ती हुई जनसंख्या वृद्धि
पर अंकुश लगाया जाय"/
"रोजगार को बढावा दिया
जाय"
" रोज गार के नया अवसर
वनाया जाय"।
"बढती हुई महगाई पर अंकुश लगाया
जाय"।
"सरकार को इस पर गहराई के
साथ सोच विचार करना चाहिए"
" यहां पर आज के इस मंदी
के दौर मे हर युवा पीढ़ी, चाहे
वह वेरोजगार हो य रोजगार
मे हो ,जागरूक बने,अपने
और अपने दोस्तों के साथ
इस बिषय पर बाते करे,
चर्चाएं करे,अपने आस
पडोस के लोगों को जागरूक
करे और उनको बताऐ कि,
वह ऐसा न करे"।
"हम दो हमारे दो "
  का नाम दे।
 आप जहाँ चाय पीते हो,
         य
पान खाते हो
  अथवा
जहाँ पर आप चार छ:लोगों
के साथ उठते बैठते हो,
वहां लोगों के साथ इस विषय पर
चर्चा अवश्य करें, और बताये
और उनसे यह कहे कि कम
से कम तीन लोगों को वताये"।
कि जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश
लगाये और रोके।
"आप यकीन मानो दोस्त
अगर हम तीन को वताये,
"आप ने तीन को बोला"
"फिर अगले ने तीन को बोला"
इस तरह से हम सब मिलकर
इसे बढती हुई जनसंख्या को,
पूरी तरीके से रोक तो नही,
सकते,मगर हाँ इसे कुछ हद
तक कम किया जा सकता है"।

बुधवार, 4 सितंबर 2019

एक ऐसा राजा

" एक समय की बात है,
महाराजा "विजय सिंह"
अपने सिपाहियों के साथ
सैर पर जा रहे थे।तभी

अचानक एक ढेला आकर
राजा के सर पर लगा।राजा
को बहुत ज्यादा कष्ट हुआ।
 तव सैनिकों ने देखा ढेला
किधर से आया,उसने देखा
कि पास खडी हुई एक बुढिया
पके हुऐ आम के फल को ढेले
से तोड रही थी। तभी सैनिकों
ने उसे पकड लिया।
और बुढिया को महराजा के
सामने लाया गया।वह डरी हुई
थी।बुढिया ने हाथजोडकर
विनती करते हुऐ कहा,....
, महराज मेरा बेटा दो दिनो
से भूखा है।हमने पके हुए आम
के फल को देखकर ढेला मारा था।
ढेला लगने से पका हुआ आम गिर जाता
तभी आप बीच में आ गये।
..,मै यह ढेला आप को नही मारना
चाहती थी,मुझे क्षमा कर लीजिए।
,,,,महाराजा ने बुढिया की बात को
सुन कर अपने सैनिकों से कहा....
" इसे खाने के समान के साथ कुछ
धन देकर इज्ज़त से  घर भेज दो।
सैनिकों ने पूछा....सरकार इसे तो
इस अपराध का दंड मिलना चाहिए।
राजा ने कहा....जब ढेले की चोट
खाकर पेड़ सुन्दर फल दे सकता हैं,
"तो मै एक बुद्धि वाला प्राणी होकर
सजा कैसे दे सकता हूँ?/।ःःःःःःःः

मंगलवार, 3 सितंबर 2019

एक दयालु राजा

एक समय की बात है।
जूनागढ़ नामक राज्य में,
एक वीर और दयालू राजा,
रहता था।वह सदैव अपनी,
प्रजा की भलाई के बारे मे,
सोचा करता था।वह अपनी ,प्रजा
का हाल जानने के लिए खुद ही
अपने राज्य में प्रजा से मिलने
जाया करता था।
...एक दिन वह इसी प्रकार घूमने
निकला तो उसने एक बूढ़े आदमी
को देखा,वह बूढा आदमी जमीन
पर बैठ कर पौधा लगाने का काम
कर रहा था।वह इतना बूढा था,कि
उसका पूरा शरीर कमजोर पड गया
था।और पेड लगाते समय उसका
हाथ पैर काप रहा था।लेकिन
फिर .भी वह बूढा आदमी धैर्य
के साथ पौधा लगाने का काम
कर रहा था।
   उसकी मेहनत को देखकर
राजा सोचने लगा.....
..कि यह बूढा आदमी इतनी
मेहनत से पेड लगा रहा हैं,
पेड बडा होने तक यह आदमी
जीवित ही नही रहेगा।और फिर,
...राजा उस बूढा आदमी के पास
गयाऔर पूछा....."बाबा "जो पेड आप लगा
रहे हैं, आगे चलकर उसके फल
आप खाँ पाऐंगे।?"
...बूढा आदमी.... ने राजा को जबाब दिया...
...ऐसा तो नही हो पाऐगा राजा?"।
   "राजा ने फिर पूछा":::तो बाबा आप
फिर भी यह पेड  कियो लगख रहे हो?"।
"""बूढे आदमी ने राजा से कहा"...
  राजन हमने भी अजीवन दूसरे
के लगाये हुए फल खाऐ हैं।
वैसे ही आगे चलकर लोग,
हमारे लगाये हुए पौधे से
लोग फल खायेंगे।।""राजा
य  ह उत्तर सुन कर बहुत
खुश हुआ।और वह खुश
होकर बूढे आदमी को ढेर
सा री सोने की मुद्राऐ दी।।"
""इसीलिए कहते हैं"
हर आदमी को कम से कम ,
एक पौधा अपने जीवन मे,
अवश्य लगाना चाहिए।।"

सोमवार, 2 सितंबर 2019

दो दोस्त

कहते हैं एक दोस्त दूसरे
दोस्त के काम आता हैं, और
समय आने पर एक दूसरे
का साथ देते हैं।..
   राहुल और रवि दो सच्चे
दोस्त थे।गांव में लोग उनकी
दोस्ती की मिशाल देते थे।
गांव के लोग कहते थे ,दोस्त
हो तो ऐसा।
 एक दिन दोनो घूमने
निकले । रास्ते में उनको
एक भालू मिला।भालू ने
दोनो को दौडा लिया।
 चूंकि राहुल तेज था ,पेड
पर चढने जानता था,इस लिए
राहुल तेज दौड कर पेड पर
चढ गया।उस समय राहुल
अपनी दोस्ती भूल गया।
 मगर रवि ऐसा कुछ कर नही
सका,वह थोडी दूर भागा
उसके बाद उसे कुछ भी न समझ
मे आया तो वह जमीन पर लेट गया।
और थोड़ी देर के लिए
रवि ने अपनी सास को
बंद कर लिया।इतने मे
वह भालू रवि के पास
आया।और रवि को
सूंघने लगा।भालू ने
देखा कि रवि की सासे
बंद हैं, और वह मर गया।
यह देख भालू वहां से
वापस चला गया।
 यह सारा नजारा राहुल
पेड पर चढ कर देख रहा
था।.... 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
  फिर राहुल पेड से नीचे उतरने
के वाद ,रवि से पूछता है कि
भालू ने तुम्हारे कान मे का कहा..
  तव रवि वोला...भालू ने
मुझसे कहा कि सही लोगों के साथ रहो
गलत लोगों के साथ मत रहो..
गलत लोग कभी भी साथ
नही देते हैं। 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲

रविवार, 1 सितंबर 2019

एक घटना उस रात की

पहाड़ियों की वादियों में वसा
हुआ एक सुंदर सा गांव।जहां
का रहन सहन बेश भूसा पहनावा
अपने आप मे बिल्कुल अलग
और लोगो को आर्कषित करता
और अपनी ओर खीचता।
...वहां के लोग खेती बाडी कर
अपना और अपने परिवार का
भरण पोषण करते थे।।
...उसी गांव में भानू चिरापली
नामक व्यक्ति अपने वीवी और
दो वेटियो के साथ रहता था।
...खेती बाडी कर वह अपना
और अपने परिवार का पेट पालता
था। उसकी दो बेटियां थी ।बडी
बेटी की उम्र 18 वर्ष से अधिक
और छोटी की उम्र दस वर्ष थी।
...एक दिन उस गांव में पडोस
के गांव से एक लडका उस सुन्दर
से गांव में घूमने के लिए आया।
जिसका नाम वीरहोत्री था।उसके
साथ उसका एक दोस्त भी था।
दोनों उस सुन्दर सेगांव में घूमते
घूमते, भानू चिरापली के घर के
पास पहुचते हैं।और वहां देखते
हैं कि भानूचिरापली की बडी बेटी
छत पर खडी होकर अपने बालो
को सुखा रही थी।
..तभी वीरहोत्री की नजर उस
लडकी पर पडी ,और वह उस
लडकी को देखता ही रहा,कब
तक जब तक वह लडकी छत
से नीचे नही उतर गयी।
...यह बात बीरहोत्री ने अपने
दोस्त को बताई....
उसी रात दोनो ने दोस्त ने मिलकर एक पलान
बनाया।कियो न हम इस लडकी
की फोटो खीचते हैं।फिर दोनो
ने मिलकर रात को चुपके से
भानू चिरापली के घर मे घुसते
हैं, और बाथरूम में जाकर
मोबाइल के कैमरे को आन
कर चुपके से रख कर बाहर
निकल आते हैं।उसकेबाद
...भानूचिरापली की बडी बेटी
बाथरूम में जा स्नान कर बाहर
आती हैं, और फिर क्या...
वीरहोत्री नामक लडका चुपके से फिर  वहां
जाता हैं और अपनी मोबाइल फोन
उठा कर बाहर चला आता हैं।
....यह बात उस लडकी के पिता
को मालूम पड जाती हैं।और फिर
अपनी घर की मान मर्यादा
बचाने के लिए उस लडके को ठूठने
लगते हैं।लडका वहां से भाग कर
अपने गांव चला जाता हैं।
तब लडकी के पिता पुलिस के पास
जाकर अपनी घर मे हूए घटनाओं के
बारे मे डिटेल मे बताते हैं।
पुलिस इस मामले को अपने संक्षान
मे लेती हैं, और पडोस के गांव में
जाकर छापा मारकर ,उस लडके
को जिसका नाम बीरहोत्री था ,जो
उस गांव मे घूमने गया था,पकड
लेती हैं और उससे वह मोबाइल
भी बरामद कर लेती हैं।और उसके
ऊपर धाराएं लगा कर उसे जेल
भेज देती हैं।यह एक कालपनिक
घटना है, इसका किसी घटना
य कहानी से कोई मतलव
नही हैं....
...अगर लक्ष्य को पाना हैं तो।
...निरन्त आगे बढ़ते रहना हैं।।
....एक पौधा लगाओ....
...धरती को खुशहाल बनाओ...
...................................।।।।।
पहाडियो के वादियों में वसा
एक सुंदर सा गांव.....

शनिवार, 31 अगस्त 2019

एक बालक उस माँ का

एक मां ने अपने बच्चे को,समसान घाट पर
जन्म देकर थोडी देर तक
जीवित रही ,ओर फिर वह
मर गई।
शमसान घाट पर रह रहे,
शिव दास बाबा ने उस बच्चे
की परिवरिश की,और
उसे अपने पास समशान
घाट पर मुर्दा को जलाने
के लिए अपने साथ रखा।
धीरे धीरे वह बालक
बडा हुआ, जब वह
लडका वीस शाल का
हुआ तो शिव दास बाबा
का निधन हो गया।
...अ्व वह बालक विलकुल
अकेला हो गया।
...एक दिन उसे बहुत जोरो
से भूख लगी, फिर वह
बालक खाने की तलाश में
वह समशान घाट से
निकला, और धीरे धीरे
घूमते हुए वह बालक
एक गांव के किनारे
खाने के ढाबे पर पहुंचा।
वहाँ जब वह पहुंचा तो
ढावे वाँलो ने उसे अपने
होटल पर बैठनेऔर
खाना देने से मना कर दिया।
उसकी वेश भूषा, उसका पहनावे
को देखकर ढावे वालो
ने उसे भगाना चाहा,और
उससे हाथापाई कि।
थोडीदेर तक होटल के
लोगों से और उस बखलक मे
खूब हाथापाई हुई।
...इतने मे होटल की
मालकिन वहां आ जाती
हैं और इस झगडे को
देख दोनो को अलग
करती हैं, और उस
बालक को भरपेट
खाना खिलाया।
चूंकि उसे समाज कार
कोई क्षान न ही था।
समशान।   समशान
घाट पर पैदा हुआ, और
उसे न ही ठीक से हसना
 आता था।






जब हम समझे

अब सीखने की उम्र कहाँ रही।यह सोचकर
सीखना बन्द कर देना,जिन्दगी
का रास्ते बन्द करना हैं।जिन्दगी
की गति बनी रहे, यह सबसे ज्यादा
जरूरी है।क्या आपने कभी घडी
की सुईयों को देखा हैं, इसमे तीन
कांटे होते हैं,एक कांटे सेंकड तो दो
अन्य कांटे मिनट और घंटे, बीतने
पर बदलते हैं।यदि घडी सही काम कर
रही हैं तो सेंकड वाला काटा कभी
नही ठहरता,लेकिन मिनट वाला
और एक घंटे बाद बदलने वाला
कांटा भीअपनी समय सीमा पर
ही बदलता हैं।
.....इसलिए घडी को देखकर
हमे समझ लेना चाहिए कि हमारा
वक्त भी ठहरा हुआ नही हैं।
...अगर आज अंधेरा हैं तो,
...कल उजाला हमरी जिंदगी.
..मे अवश्य आयेगा।बस
हमें अपने हौसले को
जीवित रखना है।
इसके लिए पहले खुद पर
विश्वास, आत्मविश्वास,
पैदा करना होगा।
...कयोंकि यही तो इंसान की,
..सबसे बडी ताकत हैं।
...कहते है कि तकदीर बदलनी
हैं तो सबसे पहले अपनी सोच
को बदले।
...और कुछ अलग करना ह़ो
  तो अलग रास्ते पर चल कर
दिखाओ।
...सपने अपने लिए देखे हैं तो,
कुछ इस कदर पूरा करे कि,लोगों
को भी   न ई रोशनी मिले।
..यह भी सच है कि जिंदगी मे
राहे आसान नहीं होती हैं।
...और यह भी सच हैं कि हमेशा
हमारा साथ देना वाला नही होता।
...ऐसे में अगर मन मे आगे बढने
की जिद न हो तो जिंदगी ठहर
सी जाती हैं।
...लेकिन अगर आप गौर से
देखेंगे तो, बहुत से लोग ऐसे
मिल जायेंगे, जो कठिन परिस्थितियों में
थे,और जमाना उनके खिलाफ था,
फिर भी ऐसी स्थिति में उन्होंने,
खुद के लिए रास्ते बनाया, और
उस रास्ते पर चलकर, औरों को
एक नई सीख दी।
...जिनदगी मे कुछ न कुछ नया
सीखते रहना चाहिए,।
...जिससे हमारे अन्दर ,एक जोश
और कार्य करने की ललक बनी
रहती हैं।
...आप कभी ठहरे नही,निरंतर
चलते रहे, आप यकीन मानो
दोस्त ,वह दिन दूर नही,
कि आप को अपनी मंजिल तक
पहुचने से कोई रोक नही सकता
हैं..
...यह अवश्य याद रखें कि...
...आत्मविश्वास उसी मे होता हैं।
...जिसमे कुछ कर दिखाने की ललक होती हैं।।
................................................
...याद रखे ,
   पेड़ काटते नही हैं।
   उसे रास्ते देते हैं।।
ताकि वह आगे चलकर हमें,
छांया दे सके,यदि फलदार
पेड हैं तो वह हमे फल दे सके।
...इंसान का जीवन कुछ कर
दिखाने के लिए बना हुआ है,
समाज में देश में अगर वह फिर भी
कुछ न कर सके तो, कम से कम
उसे अपने जीवन में एक पौधा
अवश्य लगाना चाहिए।
...आगे यह सीख देता पेड़।।।

शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

वतावरण हो स्वच्छ

...यह देखे कि आप और आप के
    परिवार के लोग अच्छे से हाइजीनिक
   का ध्यान रखते हैं य नही।। 🌲🌲🌲
,,,सक्रामण को फैलाने के लिए,
    अपने बच्चों के नाखून को काटे
   साफ सुथरा रखे।. 🌲🌲🌲
््् त्वचा पर पसीना गंदगी और
       जमी हुई गंदगी को रोकने के
      लिए अपने बच्चों को नियमित
      स्थान कराये व उसे साफ कपडे
      से पोछें। 🌲🌲🌲🌲🌲🌲
ँँँँँ अपने बच्चों को उन लोगो
      से दूर रखे ,जिन्हें त्वचा,
       संक्रमण हैं। 🌲🌲🌲🌲🌲
ःःःःःः अपने आस पास के वातावरण
           को स्वच्छ और कीटाणु
          रहित रखे। 🌲🌲🌲🌲🌲
🌲🌲🌲🌲एक पौधा लगाये.....
🌲🌲🌲🌲वातावरण को स्वस्थ बनाए।...
🌲🌲🌲🌲🌲 Tree 🌲🌲🌲🌲🌲

बुधवार, 28 अगस्त 2019

सेवा का संकल्प

विहारी लाल के ठाठबाट
सबसे अलग ही था।सरकारी
सेवा में कार्य रत पूना के जलकल
विभाग में बढिया पोस्ट पर
नौकरी करते थे।
   एक अधिकारी होने के नाते
उनको मालिन बस्ती में हो
रहे निर्माण कार्य की देखभाल
करने का अवसर मिला।
  वहां जाकर पहले तो इन्होंने
इसे  रूटीन काम की तरह
लिया.....

 फिर उन्होंने वहाँ पर झोपड़ी
मे रहने वाले लोगों को और
उनके दैनिय स्थिति को अपनी
आखो से देखा।......
   उनके रहन सहन और खान पान
को देखकर वह उस रात सो नही
पाये।.....
   उनका मन उनको धिक्कार
ने लगा।कि वह शहर मे सारी
सुबिधाओं से सुसज्जित,
अच्छे मकान में रहतें हैं।
 अच्छा भोजन करते हैं।
  अच्छे कपडे पहनते हैं।
  बढिय़ा गाडी से चलते हैं।
बेहतर ढंग से जीवन यापन,
 करते हैं।....
...जबकि यह गरीब रात दिन
...मेहनत करते हैं, इसके
...बावजूद भी यह दो वक्त
...की  रोटी भी नहीं जुटा पाते।
...यह सब कुछ वह देखकर
..उनका हदय और मन झकझोर
..उठा...
  अगले ही दिन वह अपने
विभाग में जाकर अपने पद
से त्याग पत्र दे दिया....
..तथा गरीब और वंचितों,
..की सेवा का संकल्प लेकर ,
..रचनात्मक कार्यों में जुट,
.गये। और फिर उन्होंने अपना
.जीवन ही गरीबों की सेवा मे
    ....लगा दिया....
.....................।।।।।।............
  जिन्दगी बहुत छोटी होती हैं।
 हम चाहे तो, इसे लोगों के,
 साथ साझा करे,या खुशियां।।
...................।।।।।..............

मंगलवार, 27 अगस्त 2019

सनकी लडका

रीता का परिवार काफी
खुशहाल जीवन जी रहा
था।उसके परिवार में मां,
और पिताजी थे ।रीता के
पिताजी रेलवे स्टेशन पर
नौकरी करते थे।रीता को
पढने का बहुत शौक था।
मगर रीता के पिताजी रीता
की बढती उम्र को देखकर
मना करते रहे,लेकिन रीता
की मां ने,रीता को कोचिंग
सेंटर मे दाखिला दिला दिया।
    रीता कोचिंग संस्थान में
पढने के लिए जाने लगी।
एक हफ्ता बीत जाने के बाद..
    अचानक न राहुल नाम का
लडका उसे रास्ते में मिलता
और रीता को बरा भुला कहता..
ऐसे ही सिलसिला वह लडका
रोज करता...मगर रीता चुप
रहती कुछ भी न कहती ,
अपने मां बाप को भी बताने
से डरती,इसलिए कि कहीं
उसकी पढाई छूट न जाय...
  लेकिन यह सारी हरकते
रीता ने सबकुछ अपनी मां को
एक दिन बता दिया, लेकिन
रीता की मां ने ,कुछ भी करने
के वजाय रीता को समझा,कर
फिर से कोचिंग संस्थान जाने
को कहां, कि वह दूसरे रास्ते
से जाय...लेकिन राहुल ने
फिर भी रीता का पीछा नही
छोडा...वह उसे दूसरे रास्ते
पर मिलने लगा...उधर रीता
राहुल के इन हरकतो से तंग
आ चुकी थीं।
...वह पूरी तरह टूट गयी थी।।।
अब तो राहुल उसे शादी के
लिए भी कहने लगा...
एक दिन रीता अपने
मोबाइल में बैलेंस डलवाने
दूकान पर गयी,उधर राहुल
दूर से पीछा कर यह सब देख
रहा था।जैसे ही रीता अपने
मोबाइल में बैंलेस डलाकर
दूकान छोडकर वापस
जाती हैं... इतने मे राहुल
उस दूकान पर पहुचता हैं
और दूकान दार से रीता
का नंबर मांग लेता हैं...
और अब तो वह रीता को
बार बार फोन करता।।
मगर यह सारी बाते
री ता की मां ने छुपाई
और किसी प्रकार की कोई
कार्य वाही नही कि।
और एक दिन रीता के
मां बाप रीता के लिए
लडका देखने जाते हैं
जैसे ही रीता के मा बाप
घर छोडते हैं... उधर
राहुल रीता के घर पहुंच
जाता हैं और रीता को
बंधक बनाकर उसे शादी
के लिए मजबूर करने लगता
हैं।यह सिलसिला क ई घंटे
तक चला...उधर रीता के मा
बाप घर आते हैं और अपनी
बेटी को बंधक बना देख दंग
रह जाते हैं... और फिर पुलिस
को फोन करते हैं... और पुलिस
आती हैं फिर किसी तरह से
रीता को राहुल के चंगुल से
छुटकारा दिलाती हैं ,और
राहुल को पकड कर ले
जाती हैं........
यह। कहानी किसी घटनाओं
पर आधारित नहीं है...
.....एक पौधा लगाओ.......
...धरती हरा,भरा बनाओ.....
.....................।।।।।...........।।।



रविवार, 25 अगस्त 2019

जल है तो कल है

भारत एक किसानों का
देश है।यहां पर 85% लोग
खेती करते हैं। इससे सबसे
बडी समस्या जल संकट
दिखाई देता हैं। इसकी सबसे
बडी वजह यह है कि जल का
दोहन लगातार बढता चला
जा रहा है।जमीनी हकीकत यह
हैं कि भारत जैसे किसानों के
देश में पेड पौधे लगाये तो जा
रहे हैं, लेकिन वह पेड पौधा
बडे होने तक कैसे संरक्षित
रह सकते हैं, इसकी चिंता
बनी रहती हैं।भारत की इतनी
बडी आबादी एक अरब ,..तीस
करोड की आबादी ने इस समस्या
को अभी तक अपने हाथों में
लिया नही है।
...... भारत मे बरसाती पानी की
 कोई कमी नही है।उन पानी को
एकत्र करने के लिए जो सहयोग
झील झरने और ताल तलैय्या
के जरिये हमे मिला हैं, उनको किसी भी हाल मे
लाभ कमाने के उददेश्य से लुप्त न
होने दे।हमे आज छोटे मोटे जल
संचय से उतना लाभ होता
दिखाई नहीं देता हैं।
.....यदि हमारे देश की बढती
  हुई आबादी अभिशाप हैं तो
आदमी के दो हाथ बरदान
साबित कयो नही होते,इसलिए
आबादी को कोस कर हम हाथो
से काम लेना भूल गये हैं।...

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

यह सब कुछ

आज के दौर मे ,हर आदमी
वह सब कुछ पा लेना चा हता
हैं, जो उसके सुख सुविधा उपलब्ध हो सके।यदि आज पेड नही लगेंगे तो कल छाया
और फल कैसे मिलेगा।...."
"आज यदि गुणों का सम्मान ,
नही होगा तो कल का समाज,
कैसे होगा"---
"आज यदि भोजन कर रहे हैं,
तो पोस्टिक तो तुरन्त मिल ..
नही जाऐगा।......
अक्सर लोग अतीत मे खोये
रहते हैं....
और आने वाले कल के सपने
बुनते रहते हैं......
जबकि होना वह चाहिए कि हम अतीत की गलतियों से
वतमान मे सबक लेकर
अपने भविष्य को बेहतर बनाऐ।.......।।
आज हर आदमी की अधीरता
प्रबल हो रही हैं.....
वह सब कुछ तुरंत ही पा
लेना चाहता हैं.......
उसे अपने कर्म का ऐसा फल ,
चाहिए जो उसकी कामनाओं को पूरा करने मे सहायक हो...
   जो बीत चुका है उसका मोह ,
छोडना सरल नही होता हैं.....
  वर्तमान में जीने वालो की
सख्या कम होती हैं....
   दूसरो के लिए वह तव ही ,
सोचता है, यदि कोई स्वाहित
सिद्ध होता है.....
   वास्तव मे मनुष्य की दृष्टि ,
संकुुुचित होती जा रही हैं....
   दृष्टि का यह संकुुुचन धर्म से,
दूर होते जाने का परिणाम है...
   प्राचीन..काल मे लोग पेड,
लगाया करते थे,ताकि आने,
्वाली पीढियां इसकी छाया मे,
बैठ सकेे,इसके फल खा सके......
   कुऐ खोदेे जाते थे,...
   तालाब वनवाऐ जाते थे...
   जो किसी अनजान  पथिक,
   की प्यास बुछा सके.....
 इसी तरह हर वह आदमी के लिए मात्र  वर्तमा न जीवन,
ही नहीं अगले जीवन को ,
सवांंंर लेने की  प्ररेणा थी।
.....एक पौधा लगाना......
.....और उसकी देखभाल करना.....

गुरुवार, 22 अगस्त 2019

भरोसा

"भरोसा खुद पर रखो"
"तो ताकत बन जाती हैं"
          "और"
"दूूूसरो पर रखो तो"
    "कमजोरी"
"इसलिए खुद से खडा,
होना सीखे,अपने अंदर ,
छिपे हुए हुनर को पहचाने,
और उनको तरासने की ,
कोशिश करें, सफलता आपको,
मिलेगी और आप इसे आप खुद,
महसूस करेंगे......
""एक पौधा लगाये... 

शनिवार, 17 अगस्त 2019

दौड़

एक कुत्ते और गधे मे
दौड़  हुई।कुत्ता ने सोचा
यह गधा  मुझे  का पछाडेगा..
दोनो मे यह तय हुआ कि
दौड़ कर  पहले  सिंहासन पर
कौन  बैठेगा।
दोनो मे दौड हुई...
अरे पर  यह   का..
कुत्ता। दौड  कर आगे
निकल तो गया मगर
उसी केे विरादरी
के कुत्तों ने रास्ते
मे  उस  पर  हमला
कर दिया....
  बेेेेचारा  कुुुता  अकेला
पड गया। और  बुरी तरह से
घायल हो गया।
पर वह    किसी  तरह
झूट कर   वह
सिंहासन तक  पहुुुच
ता हैं.... पर वहां
देखता
हैं  कि  गधा  पहले
से ही   सिंहासन पर
बैठा हुआ है...
......    पेड़ लगाओ.......
...धरती बचाओ.......... 🌲🌲🌲
Tree 🌲 tree 🌲 tree 🌲 tree 🌲 tree 🌲 tree पेड धरा
का भूषण  ...दूर करे प्रदूषण....tree 🌲 tree 🌲 tree 🌲 tree 🌲

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

एक समय की बात

एक समय की बात है,
गांव से पहले थोड़ी दूर,
पर शिव मंदिर के पास,
एक दिन अचानक एक,
साईकिल सवार, का एक ,
दो पहिया वाहन से जोर..
दार टक्कर हो जाती हैं।
टक्कर इतनी जोर की
होती हैं कि ,साईकिल
चला रहा आदमी वही
गिरता है और मर जाता
है।इतनी जोर दार आवाज
सुनकर पास मे होटल पर
बैठे लोग वहाँ दौड़ कर जाते हैं
और देखते हैं कि साईकिल
सवार आदमी मरा हुआ पडा
हैं.....
        अव वहाँँ पर मौजूद लोग
आपस मे बात करनेे लगे कि अव
इनका का किया जाय...
   तभी वहाँ पर खडे
एक आदमी ने पुलिस को
फोन कर दिया, और तव
   कुछ समय वीत जानेे
के वाद वहाँ पर पुलिस
आती हैं, और यह सब
नजारा देख कर दंग
रह जाती हैं...
वही शिव मंदिर के पास
पहले से ही वही क्षेेत्र मे
एक पागल रहता था।
वही घूमता रहता था।वहां के
रहने वाले लोग रोज
कुछ न कुुुछ खाने को
दे दिया करते थे,और
वह खा कर अपनी भूख
मिटा लेता,और वही मंंदिर
के आस पास ही रहता।
जब यह हादसा हुआ,
उस दिन वह वही
मंदिर के आस पास
ही देखा गया था।
और अब उधर
पुलिस वहाँ पर
पहुचती हैं, यह सब
मौके पर हादसा देख
दंग रह जाती है....
पर वह लास को लेेेकर
नही जाती.....
लाश को वही शिव मंदिर
पर रखावा देेेती है
और वहाँ पर दो
कांस्टेबल को रखवाली करने
के लिए रख देती हैं।
यह घटना रात साढे
वारह वजे की हैं....
और अब...
   उस लाश के पास दो
कास्टेबल बैैैठ कर
पहरा दे रहेे
होते हैं...दो. घंंटा
बीत जाने के बाद
अचानक दोनों को
नींद सताने लगती
हैं,तभी दूसरा कंसटेेेवल
भाई सुरती मलो खाया
जाय...वह आपस मे
बाते करते और सुुरती
मलते है,और पीछेे ध्यान नहीं
देते हैं....
तभी वहाँ अचानक
पीछे से पागल आता हैं,
और लाश को उठाकर
दूर खेत मे रख कर ,
वापस लौट कर वही
चादर ओढ कर खुद
लेट जाता हैं....
यह वात उन दोनो
कांस्टेबल को मालूम
ना थी।....
दस मिनट वीत जाने
के वाद वह पागल
अपनी चादर मुंह से
उठाता है और उठकर
बैठ जाता है, और
उन दोनो बैठे हुए
कंसटेवल
से धीमी आवज
मे वोलता है...
ये भाई बीडी है का....
यह आवाज सुनकर दोनो
कांस्टेबल जोर से डर
जाते हैं, और वहां से
डरकर आवाज लगाते
हुए जोर से भागते हैं...
मरा हुआ आदमी
जिंदा हो गया...
एक डर के मारे गाँव की
तरफ भागता हैं.. दूसरा
पास की चौकी पर फोन
करता है।....
उधर से गांव वाले
आते हैं, इधर से
चौकी पर से एक
गाडी भर कर पुलिस
आती हैं...
और सब
साथ मिलकर उस
लाश के पास जातेे हैं..
और फिर दूर से डंडे
के सहारे से चादर को
हटाते हैं और देेेखते हैं
कि लाश की जगह
वह पागल लेटा हुुुआ
हैं... फिर क्या...
उस पागल को
उठाते हैं और लाश
की खोज करते हैं....
कुछ देर खोजबीन
के बाद लाश
थोड़ी दूर खेेे त
मे मिलती हैं... और
फिर क्या... लाश
को वहां से उठाकर
लाते हैं और उस पर
चादर डाल कर, उस
लाश को जीप मे
डाँलते हैं,फिर उसे
थाने लेजाते हैं....
.....।।।।.........
दोस्त.. आप को यह कहानी
कैसे लगी ..अगर सही
लगी हो तो लाइक करें,
कमेंट करे,शेयर करें और हाँ...
एक पौधा लगााना न भूूले...धरती को दूषित होने से बचाऐ... 🌲🌲🌲
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शनिवार, 10 अगस्त 2019

एक समय

किसी देश मे एक राजा
रहता था।वह अपनी शाान
और शौकत के लिए काफी
दूर तक मशहुर था।पडोसी राजा को यह सव पसंद नहीं था।एक दिन उसने योजना
बनाई कि हम इनके खजानो
को लूट लेगे।फिर उसने एक
रात राजा के खजाने पर हमला बोल दिया, मगर राजा
बहुुु होशियार था।उसने दूसरी जगह छिपा रखा था।
यह वात पडोसी राजा को
मालूम नहीं था।राजा ने
हमला किया लेकिन उसे
कुछ हासिल नहीं हुआ और फिर वह मायूस होकर अपने साथ सिपाहियों को लेकर
अपने पडोसी राज्य को वापस चला गया।
   इस तरह राजा की सूझ
बूझ से राज्य का पूूरा खजाना लूटने से  बच गया।
...............।।।।।............।.
🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲पेड लगाओ,धरती को हरा   भरा बनाओ।tree 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
.........एक पौधा लागाना न भूले... 🌲 tree 🌲 tree 🌲🌲 Tree 🌲 tree 🌲
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बुधवार, 7 अगस्त 2019

ठंड बहुत है

पति रोज की तरह ,
मारनिंग वाक पर गया।
और बाहर कुछ दूर जाकर
देेेखा ठंंड बहुत पड रही थी।.....वह वापस वही से
लौट आया।और बीबी के
पास चिपक कर लेट
गया,और बी बी से बोला
बाहर ठंड बहुत हैं......
...।।।।।........।।।।।।.....
निवेदन... बच्चे के जन्म पर एक पौधा लगाये...
और इस धरती को हरा
भरा बनाए... 🌲🌲🌲
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शनिवार, 3 अगस्त 2019

चालाक लोमडी

एक लोमड़ी इधर उधर
टहल रहीी थी।तभी उसकी नजर
पेड पर बैठे एक कौवे पर पडी।
उस कौवे की चोच मे रोटी का बडा
टुकडा था।लोमडी उस टुकडे  को
देख कर  ललचा गयी।
  तब लोमडी ने सोचा कि यह रोटी
का टुकडा मुझे मिलेगा कैसे।
तव लोमडी ने कौवे से कहा,
जरा मीठे सुर मे मुझे एक  गाना
सुना कर दिखाओ।कौवे ने
जैसे ही मुह खोला ,उसकी
चोच से रोटी का टुकडा छूट
कर जमीन पर जा कर गिरा।लो.

मडी  उस रोटी के टुकडे को लेकर
भाग गयी।कौवा देखकर काव काव
करता ही रह गया।......
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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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