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मंगलवार, 24 मार्च 2020

दुनिया का सबसे बड़ा लाकडाउन

२२ मार्च दिन रविवार ,आज का दिन
शायद ही कोई ऐसा हो ,जो आज का
दिन भूले।कोरोना वाइरस,पूरे देश को
संक्रमण करने वाला।यह एक ऐसा खतरनाक
वाइरस है,जो अगर एक आदमी को
हुआ तो वह हजारों को संक्रमित
कर सकता है।
 २४ अप्रैल रात १२बजे के बाद,,,,
    पूरे देश को हमारे देश के प्रधानमंत्री
ने रात १२ बजे के बाद ,,पूरे देश को
२१ दिनों के लिए, अर्थात १४ अप्रैल
तक,पूरे देश को लाक डाउन कर दिया
गया।
 एक संक्रमित व्यक्ति सैकड़ों लोगों को
बीमार कर सकता है।
  एहतियात बरतिए।
अपने घरों में रहिए।
एक तरह से आप के घरों के,
बाहर लक्ष्मण रेखा खींच दी गरी है।
जिसे आप लोग पार न करें।
लोग अपने घरों में रहे,
सुरक्षित रहें।
  इस लाक डाउन में हमें अपना,,,
संकल्प निभाना है।
आग की तरह फैलने वाला संक्रामक
आज दिनांक २४/०३/२०२०को
रात बारह बजे से देश का सबसे
बड़ा लाक डाउन जो २१ दिनों
१४ अप्रैल तक पूरा देश बन्द,,
  को....... कोई
  रो.........रोड पर
 ना........न निकले
   कोरोना
देश इस संकट का सामना करेगा।
   और बाहर निकलेगा।।
चाहें कुछ भी हो जाये,
हमें घरों से बाहर नहीं
निकलना है।
संकट के इस घड़ी में,,,,
गरीबों के लिए, मुश्किल,,
की घड़ी लेकर आया है,,,
  इस कोरोना ने पूरी दुनिया
में कोहराम मचा दिया है।।
किलर कोरोना के खतरे से
पूरे देश को लाक डाउन कर
दिया है।
   इस खतरे से निपटने के लिए,
लोग घरों से न निकले,२१दिनो तक
  अफवाहों से बचें।।
इसे फैलने से रोके।
ऐसे परिस्थितियों में बिना,,
डा,की सलाह से किसी
तरह की दवा न लें।।
  यह जान लेवा बिमारी है।।
आज भारत में लगभग ,,,
१८७००० लोग इस किलर
कोरोना वाइरस की चपेट
से संक्रमित पाये गये हैं।
  अगर कोई इस लाकडाउन
को तोड़ता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई
की जाएगी।
 इस वाइरस का शिकार न बने।
अपने घरों में रहे।
चाहें कुछ भी हो जाये,
अपने घरों में रहे।
 बचाव ही ,सबसे बड़ा साधन है।।
घरों से बाहर निकले,मास्क लगा कर निकले।
शैनेटाईजर का प्रयोग करें।
लोगों से दूरी बना कर रखें।
भीड़ भाड़ वाले जगह पर न जाये।
इस वाइरस से बचें।
इसका एक मात्र उपाय,,,
 बाचाव ही है।




सोमवार, 23 मार्च 2020

राजा की सोच

वैसे तो कला का कोई
मोल नहीं होता,ऐसे ही
एक कहानी एक पढ़ें लिखे
जवां राजा की ही, कुछ समय
पहले की बात है,किसी
नगर में ,एक राजा था।
वह अपनी प्रजा का बहुत
ध्यान रखता था।उसके
राज में वहां की जनता
बहुत खुश रहती थी।
 एक दिन की बात है,
राजा अपने दरबार में
बैठा कुछ सोच रहा था।
तभी उसके मन में एक
बिचार आया,उसने अपनी
सभा में अपने मंत्री से कहा
कि हमें अपना चित्र बनवाना
है,तुम जाओ और जाकर
पूरे नगर में ऐलान कर दो,
कि जो राजा का खूबसूरत
चित्र वना कर या चित्र कारी
करके देखा ,उसे दस हजार
सोने  की मोहरें दी जाएगी।
  यह ऐलान सुन कर दूर
दूर से नगर के एक से एक
चित्र कार आऐ, और सभा
में उपस्थित हुए।
 फिर राजा ने सभी चित्र
कारों से कहा कि हमें अपनी
सूबसूरत चित्र चाहिए। जो खूबसूरत
चित्र नहीं वना कर देगा,
उसे हम मौत के घाट
उतार देंगे।यह बात सुन
कर सभी चित्र कारों ने
अपने हाथ खड़े कर लिए।
इस लिए कि राजा में एक
कभी थी। राजा जो था वह
,,,एक पैर का लंगड़ा,,,और
,,,एक आंख का खाना था,,,
इस लिए सभी चित्र कारों ने
अपने हाथ खड़े कर लिए।
लेकिन उन सभी चित्र कारों
में एक युवा चित्र कार था।
उसने राजा से कहां हम आप का
चित्र वनाऐगे,उस युवा चित्र
कार ने राजा को अपने
सामने राजा को खड़ा किया
और राजा का चित्र बनाना
शुरू किया,उस युवा चित्र कार
को राजा का चित्र बनाते बनाते
दो तीन घंटे बीत गए।राजा
बोला कितना समय लगाओगे,
अगर हमारा चित्र गलत हुआ
तो हम तुमको मौत के घाट उतार देंगे
यह सुनकर चित्र कार हसा और
बोला,महराज हम कोशिश
कर रहे हैं,कि मैं आप का
चित्र सूबसूरत बना सके।
उसके थोड़ी देर बाद
राजा का चित्र बना कर
वह चित्र कार राजा को
देता है,उस चित्र को राजा
देखता है और जोर से हंसता है,
यह देखकर दूसरे चित्र कार
अचंभित रह जाते हैं,और
आपस में बिचार करते हैं
ऐसा का बना दिया है उस
चित्र में,जिसे देख कर राजा
जोर से हंसा,,,,
 उस चित्र में उस युवा चित्र कार
ने राजा को शिकार खेलते हुए
बनाया था,राजा के साथ में
धनुष,बाड लिए हुए,और एक
आंख बंद किए हुए ,घुटनों के
बल बैठा हुआ दिखाया था।
जिससे राजा की आंख,
और राजा का पैर दोनों
चीजें छिपाती हैं।
 अपना चित्र देख कर
राजा ने उस युवा को
दस हजार सोने की
मोहरें दी,और वह
युवा चित्र कार
खुखी खुखी अपने
घर को गया।
 इस कहानी से हमें का
सीख मिली नीचे कमेंट
कर लिखे,,,,,,,



शुक्रवार, 20 मार्च 2020

अन्ध भक्ति

एक समय की बात है,
बरसात का समय था,
धीरे बारिश हो रही थी,
देखते ही देखते , बारिश
इतनी तेज हो गयी कि,
गांव में धीरे धीरे पानी
घुसने लगा,उधर बरसात
होते होते शाम हो गयी,
गांव में बाढ़ आ गई,
लोग त्राही त्राही करने
लगे ,और उस गांव के
लोग एक एक करके
गांव छोड़कर भागने
लगे,उसी गांव में रामू
नाम का एक आदमी
रहता था।
  वह जब बरसात हो
रही थी ,तब वह भगवान
की भक्ति में लीन था , गांव
के लोग जब अपना घर बाढ़
के डर के कारण छोड़कर
भाग रहे थे, तब रामू का पड़सी
रामू को जोर जोर से आवाज
दिया,
   अरे रामू काका, कहां हो तुम
अरे चलो गांव में जोर से बाढ़
आई हुई है,यह भगवान की
भक्ति छोड़ो और चलो हमारे साथ।
  परन्तु रामू काका तो रामू काका
ही थे वह माने ही नहीं।
   जब गांव के लोग नाव पर
बैठकर घर छोड़ कर जा रहे
थे ,तब भी लोगों ने जोर जोर
से आवाज लगाई,अरे रामू काका
कहां ईश्वर की भक्ति में लीन हो
आओ हमारे साथ चलो,देख
रहे हो पूरा गांव डूबरहा है,चारों
तरफ हां हां कार मचा हुआ है।
लोग नाव के सहारे गांव को
छोड़कर भाग रहे हैं, तुम भी
आओ और हमारे साथ चलो।
 लेकिन रामू काका फिर भी
नहीं माने,उधर गांव में पानी
इतना भर गया कि एक मंजिल मकान
डूब गया।
  उधर रामू काका दूसरे मंजिलें
पर जाकर भगवान की भक्ति करने
लगे।
   फिर उधर सेना का हेलीकाप्टर
आया ,सेना के जवानों ने रामू काका
को बहुत कहां, लेकिन रामू काका
फिर भी नहीं माने,रामू काका जाने
से मना कर दिया,और फिर भगवान्
की भक्ति में लीन हो गए।
   उधर गांव में इतना पानी भर
गया कि रामू काका उस बाढ़ में
भगवान् की भक्ति करते करते
डूब गये ,और रामू काका के प्राण
निकल गये।
  रामू काका के प्राण निकलने के
बाद वह भगवान् के पास गयेऔर
भगवान् से प्रार्थना की,
 कि हे ईश्वर हम आप की इतनी
भक्ति कर रहे थे,और हमारे गांव
में बाढ़ आ गयी और हम उस बाढ़
में डूबकर मर गया,और आप को
तनिक भी दया नहीं आई ,कि आप
हमें बचाने तक नहीं आए,
 भगवान् हंसे और बोले,
 हमने तो तुम को तीन वार
बचाने की कोशिश की लेकिन
तुम अपने जिद पर अंडे रहे
तो इसमें मेरी का गलती है।
 तब रामू को अपने किए पर
पछतावा आया।
काश रामू उन लोगों की बात
मानलेता तो आज वह भी
ज़िन्दा रहते।
 यह सच है कि ईश्वर है,
वह लोगों की मददत,
किसी न किसी रूप में
अवश्य करते हैं,यह जरूरी नहीं
है कि ईश्वर खुद प्रगट हो और
हम सब की मददत करें।
  हमें इन बातों को
  खुद समझना चाहिए।।





गुरुवार, 19 मार्च 2020

जंगल की गुफा

गांव से करीब १० किमी, दूर एक
बड़ा जंगल था। जहां पर अनेक प्रकार
के जानवर रहते थे।उन जानवरों में
एक जानवर सियार था। जो अपने
आप को बहुत चालाक और चतुर
समझता था।उसने जंगल के बीच में
एक गुफा बना रखी थी,और वह
चालाक सियार उसी गुफा में रहता था।
    उसी जंगल में एक बूढ़ा शेर
रहता था,वह दो दिनों से बहुत
भूखा था।वह बूढ़ा शेर शिकार
की तलाश में उस शिकार की गुफा
तक जा पहुंचा।
    शेर ने सोचा इस गुफा में हो न हो
कोई न कोई जानवर अवश्य रहता
होगा।वह शेर चुपके से जाकर उस
गुफा में जाकर बैठ गया।
     थोड़ी देर बाद सियार वहां आया
और उसने शेर के पंजों के निशान
जमीन पर देखें।
    वह सियार समझ गया कि शेर
हमारी गुफा में जाकर छुप कर बैठा
है,ताकि जैसे मैं अंदर जाऊं वह मुझे
पकड़ कर खा जाय।
 शिकार ने अपना दिमाग लगाया,
वह गुफा के पास गया और बोला
अंदर कौन हैं,
अंदर से आवाज आई,
कौन बोल रहा है,
वाह्रर से शिकार बोला,
मैं इस गुफा का मालिक
बोल रहा हूं।
   इतना कह कर शिकार वहां
से एक ,दो, तीन हो गया।
और वह वहां से भाग निकला।
इस तरह शियार की चतुराई से
उसकी जान बच गई।

बुधवार, 4 मार्च 2020

उड़ान ,,हौसलों की,,

शाम का समय था।रीता सुबह
ही स्कूल के लिए निकली और
शाम  छः बजे तक घर वापस
नहीं आई।इससे पहले कभी ऐसा नहीं
हुआ था।उधर मां को रीता को
लेकर बहुत चिंता हो रहा था।तभी
सोहन घर पर आता है, मां
सोहन से कहती हैं,बेटा सोहन
बाहर देख जरा अंधेरा छा गया
है ,पर रीता बिटिया का अभी
तक कुछ पता नहीं चला, आखिर
कुछ बता कर गयी है कि वह कब
तक घर वापस आयेगी।
  अरे मां चिंता मत करो रीता
ने हमें बताया है,कि आज उसे
उसके कालेज में,,,म हिला सुरक्षा
के उपाय को लेकर उसके कालेज
में कुछ जानकारियां दी जायेगी।
   अरे मां मैं आप को यह सब
कुछ बताना भूल गया था।
 तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई,,
 खट, खट ,खट, रीता आ गयी
थी। मां का उदास चेहरा देख
रीता ने कहा,,अरे मां चिंता मत करो,,
अब डरने से काम नहीं चलेगा,,
हमें मजबूत बनना होगा।और
हमारे हौसले की उडान ही
उन राक्षसों का सबक बनेगा ,
जो बेटियों को महज एक
खिलौना समझते हैं।

शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

अहंकारी व्यक्ति

किसी नगर में कर्मदीन का एक
छोटा सा परिवार रहता था ।उनका
एक लड़का था,जिसका नाम हर्ष
था।वह राजा के साथ रत्नों में शामिल
होना चाहता था। इसलिए वह हमेशा
गांव के हर भाग का नक्शा बनाकर
राजा को दिखाना चाहता था।उसे
अपने ऊपर ,और अपने भाग्य पर
पूर विश्वास था। लेकिन फिर भी
वह हर वार इतनी कोशिश करने
के वाद विफल ही हो जाता था।
  उसके पिता उसे वार वार कहते
कि बेटा तुम अपनी शादी कर लो
का पता तुम्हरी पत्नी के भाग्य से
तुम्हरा भी  भाग्य बदल जाय,और
तुम राजा के उन सात रत्नों में शामिल
हो जाओ।
   लड़का हर बार यही ज़बाब देता
पिताजी हमें अपने भाग्य पर पूरा
विश्वास है, पत्नी के भाग्य से कुछ
नहीं होता,धन कमाने के लिए मेहनत
करना पडता है।
   और फिर आखिर एक दिन बहुत
समझाने के बाद हर्ष मान गया और
उसने साथी कर ही ली, शादी कर के
जैसे ही वह अपनी पत्नी को अपने घर
लाता है और उसकी पत्नी जैसे ही घर
में प्रवेश करती हैं वैसे ही राजा के
दरबार से बुलावा आ जाता है,और
वह राजा के दरबार में जाकर अपने
बनाते हुए नक्शा को राजा को दिखाता
है,राजा बहुत खुश होता है और फिर
राजा हर्ष को अपने उन सात रत्नों में
शामिल कर लेता है। 
   और उसे खूब ढेर सा धन मिलता है।
कहते हैं कि पत्नी के भाग्य से,
पती का भाग्य जुडा होता हैं।।
   पर यह बात हर्ष मानने को तैयार नहीं।
उसे तो अपने भाग्य पर विश्वास था।
धन पाते ही वह अहंकार में चूर हो गया।
वह अपनी पत्नी की कद्र नहीं करता।
वह  जो भी धन राजा के दरबार से
कमाई कर लाता उसे कोठे पर
लेजाकर उड़ा आता।
पत्नी उसकी लाख मना करती पर
वह मानने को तैयार नहीं था।
धीरे धीरे उसका अत्याचार इतना
बढ गया था कि एक दिन उसने
अपनी पत्नी को अपने घर से ही
धक्का देकर बाहर निकल दिया।
    पत्नी के घर से निकलते ही उसके
भाग्य ने उसका साथ छोड़ दिया।
लेकिन फिर भी हर्ष यह बात मानने
को तैयार नहीं था।
   और अब वह जो भी काम करता
वह उसका उल्टा ही हो जाता था।
धीरे धीरे उसके घर का सारा धन
खत्म हो गया।
और राजा ने भी उ,से अपने दरबार
से निकाल दिया।वह दर दर इधर
उधर ठोकरें खाने लगा।और एक दिन
वह चोरी के इल्ज़ाम में भी पकड़ा गया।
 इतना कुछ होने कै बाद हर्ष को
अपनी पिछली गलतियों का एहसास हुआ।
   फिर आखिर में वह भागकर अपनी पत्नी के
पास गया ।और उससे अपनी गलतियों
की क्षमा मांगी। फिर अपनी पत्नी को अपने घर
लेकर आया।और फिर जैसे ही
उसके कदम घर पर पड़े फिर
हर्ष के भाग्य बदल गये।




शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

पुरुषों की कमजोरी का राज

जब पुरुष को लगे कि हमको
शरीर की कमज़ोरी का आभास
हो रहा है तो उस पुरुष को यह
सभी चीजों का सेवन अवश्य करना चाहिए
जैसे,,,दूध,,, सोयाबीन,,,खजूर,,,
यह सभी चीजें ,शरीर के लिए
अति आवश्यक हैं,,
 जो शरीर को ताकत के साथ दूध
शरीर के हड्डियों को मजबूत बनाता
हैं, सोयाबीन, शरीर के सभी अंगों
का विकास करता है।
ताकत वर चीजें
शरीर को स्वस्थ रखता है
खजूर शरीर के अंगों 
का विकास करता

बुधवार, 22 जनवरी 2020

दबंग कप्तान

एक कामयाब कदम,
विराट कोहली,एक
जाना माना नाम,
जो पहले यह चुके
भारत के कप्तान नही
कर पाये वह कर दिखाया
विराट कोहली ने।आज
जब यह युवा खिलाड़ी
मैदान पर उतरता है तो
भारतीय प्रशंसक उसका
पूरा आनन्द लेते हैं।
भारत ने आस्ट्रेलिया में
शुरुआत 2019मे पहली
बार 2-1से टेस्ट सीरीज
जीतकर की। हालांकि
2019मे उन्होंने बेस्ट इंडीज़
को उनके मैदान पर ही
दो टेस्ट मैच
तीन वनडे मैच
तीन टी-20मैचो
की सीरीज भराई।
वन डे मैच की 222
पारियों में सबसे तेज
11000 रन बनाने वाले
खिलाड़ी बने।वे International
Circket 417 पारी में
सबसे तेज 20,000 रन
बनाने वाले खिलाड़ी भी बने।
  वे टेस्ट में सात दोहरे
शतक लगाने वाले पहले
भारतीय खिलाड़ी और
भारतीय कप्तान बने।
कमाई के मामले में भी
भारत की 100 हस्तियों
की सूची में पहले नंबर पर
आ गये।
  252.72 करोड़ की
कमाई के साथ बिराट
को सबसे ऊपर जगह दी।




रविवार, 19 जनवरी 2020

हाजी अली दरगाह

यह मुम्बई में समुद्र तट पर स्थित है।
यह एक ऐसी दरगाह है, जहां सभी
धर्म के लोग दर्शन करने आते हैं।
यह दुनिया की सबसे अमीर दरगाह
मानी जाती है।इसे सैप्यदपीर हाजी
अली शाह बुखारी की स्मृति में
सन् 1431 में बनवाया गया था।
  मोईनुद्दीन चिश्ती,,,,,,का जन्म
      ,,,536 हिजरी संवत अर्थात
,,,1141,ई, पू, एशिया के सिस्तान
क्षेत्र में हुआ था।यह भी दुनिया की
सबसे मशहूर दरगाह हैं, यहां पर भी
सभी धर्मों के लोग दर्शन के लिए आते
है।

शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

नौकरी के इतने काम

नौकरी के इतने काम
कि ,,,,पहले एक कमाते थे,
        ,और नौ लोग बैठ खाते थे,
      , इसलिए उसे,, नौकरी,,कहते थे,
   ,बाद में एक कमाता था,
 ,और चार का लेते थे,
, इसलिए उसे,,चाकरी,,कहते थे,
, इसके बाद जितना मिलता था,
,वह खुद के तन के लिए पूरा पड़ता था,
, इसलिए उसे,,तनख़ा ,,कहते थे,
,अब तन को भी नहीं पूरा पड़ता,
, इसलिए उसे ,,बेतन,,कहते थे,
अब आज कल लड़के,
, फोन लेने के लिए ,जांब, करते हैं,
इसलिए उसे ,, सेलरी,,कहते हैं,,,,,
     अगर आप को पैसा कमाने का
शौक है तो यहां जाये,और खूब पैसा
कमाते यहां पर जाकर,,,,,

गुरुवार, 16 जनवरी 2020

एक किसान की अधूरी कहानी

एक गांव में एक गरीब किसान
रहता था। वह दिन भर मेहनत
मजदूरी कर के किसी तरह
अपना और अपने परिवार
का भरण पोषण करता था।
वह इतना गरीब था कि उस
के तन का कपडा भी फटा
पुराना र हता था।वह अपने
लाइफ के विषय मे हमेशा
सोचता कि अब आगे हमारे
का होगा।हर तरफ उसको
अंधेरा नजर आने लगा।
उस किसान को कही पर भी
कोई मार्ग नजर नही आ
रहा था।उधर खेत मे जुताई
बुआई का समय आ गया।
पर उस किसान के पास
जुताई करने के लिए खुद
का बैल तो था,मगर उसके
पास बीज बोने के लिए पैसे
नही था।उसने अपने पडोसी
मनिक राम से कुछ पैसे कर्ज
के तौर पर लिया,और किसान
बोला जैसे ही हमारी फसल
पक कर तैयार हो जायेगी
वैसे ही हम आप का लिया
हुआ उधार पैसा हम अपनी
फसल बेच कर आप को
चुका दूगा।
और फिर दूसरे दिन उस
किसान ने सुबह उठकर
उसने अपने दोनो बैलो को
चारा खिलाया फिर थोडी
देर बाद उसने खेत मे जुताई
करने के लिए उसने अपने
बैलो को अपने साथ ले गया।
   फिर वह किसान अपने खेत
मे बैलो से जुताई करने लगा।
थोडी देर जुताई करते करते
उस किसान के हल मे कुछ
फस गया।और बैल रूक
गये,उस किसान ने हल को
उठाया और देखा,वह एक
छोटा सा घडा था,जोसोने
के सिक्कों से भरा हुआ था।
वह किसान उसे थोडी देर
देखता रह गया,मनो उसे
यकीन ही न रहा,
 फिर उसने अपने बैलो को
खोल और उस घडे को
लेकर घर वापस लौट आया।
दूसरे दिन वह किसान उसमे
से पाँच सिक्के लेकर वह
अपने नजदीकी बजार मे
एक सोनार के पास गया।
और उसने उस सिक्के को
सही दाम मे बेचा।फिर वह
घर वापस आया,उसने सबसे
पहले उधार के लिए कुछ
पैसे उन लोगो को दिया,
और बचे हुए रूपया को
उसने पहले अपनी जरुरत
की घर की चीजो को खरीदा।
और अपनी परिस्थितियों में
सु

बुधवार, 8 जनवरी 2020

नौकरी की तलाश

किसी नगर में एक युवक अपने
नौकरी की तलाश में थककर एक
पेड़ के नीचे लेट गया। कुछ समय
बाद एक महिला वहां पर आई।
  सहानुभूति प्रकट करते हुए उसने
पूजा,,, बेटे तुम बिमार हो।
   लड़के ने कहा नहीं मैं तक गया हूं।
यह सुनकर वह महिला जोर से
चिल्ला ई ,,, तुम बड़े मूर्ख हो,,,
तुम नहीं जानते यह मेरा बगीचा है।
यहां बिना अनुमति के कोई प्रवेश
नहीं कर सकता,,,,,,,,,,,

मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

बहुत समय पहले की बात

बात उस समय की है जब,
लोगों के पास मोबाइल फोन
नहीं हुआ करता था। तब
घर परिवार के सभी लोग
एक साथ रहते थे।
    उस समय उन लोगों के हाथों
मे कुछ न कुछ कला होती थी।
उस समय वह लोग खाली नहीं
बैठते थे , कुछ न कुछ कला
करते ही रहते थे।साथ बैठकर
खाना खाते थे,एक साथ बैठने
का मजा ही कुछ अलग होता है।
  पर अब देखो जब से लोगों के
हाथों में मोबाइल आ गयी है
तब से लोगों को एक साथ
बैठने का मौका ही नहीं
मिलता है।आज का समय
कितना बदल गया है,अब
पहले जैसे लोग नहीं रहे।
अब वह कला लोगों के हाथों,
में नहीं ,जो क ई वर्षों तक मठ
मन्दिरों का निर्माण किया जा ता
था।और पहृले के लोग अपनी
कलाओं का प्रर्दशन करने ,य अपना
हुनर दिखाने का मौका मिलता था।






शनिवार, 28 दिसंबर 2019

परिश्रम

हर इंसान को परिश्रम करना चाहिए।
यहाँ सभी सफल होने की इच्छा
रखते हैं।यहाँ सफल होने वाले

इंसान की संख्या बहुत ज्यादा
नही है।अधिकांस आदमी सफल
नही होते।असफल होने पर
दुख होना स्वभाविक हैं।लेकिन
फिर भी हमे निराश नहीं होना
चाहिए।हमे सफलता के लिए
लगातार प्रयास करते रहना
चाहिए। परिणाम की चिंता
किये बिना अपना कार्य करते
रहना ,,,,,,,,, सफलता का,,,
      मूल   मंत्र  हैं  ।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

चाँद ग्रहण की सराहना

देख आया चंद्र गहना...।
देखता हूँ दृशय अब मै,
मेड़ पर इस खेत की बैठा अकेला ...।।
एक बीते के बराबर...।
यह हरा ठिगना चना
बाँधे मुरैठा शीश पर....।
छोटे गुलाबी फूल का,,,,,
सज कर खडा हैं ....।।

मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

सीखने का सिलसिला

अगर आप कुछ सीख रहें है,
य सीखना चाहते हैं तो आप, सीखने
का सिलसिला लगातार जारी रखे।बीते हुए कल
से आज हमारा कुछ बेहतर हो।
यह बेहतरी की सोच बिचार किसी भी
मामले मे हो सकता हैं।
   कुशलकरमी  बने रहने के लिए
अपने कौशल को बढातेऔर निखारते
रहना चाहिए।हम सब जानते हैं।
दुनिया परिवर्तन शील हैं।

नौकरी का बाजार भी कई प्रकार के
परिवर्तन का गवाह रहा।
 आज मै यानी वर्तमान मे जीना श्रेष्ठ माना जाता है।
यह विज्ञान नही एक कला हैं।

सोमवार, 23 दिसंबर 2019

सुबह उठकर न करे ऐसा

अगर आप सुबह उठकर
ऐसा करते हैं, तो आज से
आप यह जान ले,कि आगे से
आप ऐसा न करे...सुबह उठतेही
आप नहाये नही ,आप के शरीर
का तापमान विगड सकता हैं।


शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

यह प्यास कब बुझेगी

चुप खडा बगुला,
डुबाए टाँग जल मे,,
देखते ही मीन चंचल,
ध्यान निद्रा त्यागता हैं,,
चट दबाकर चोच मे,
नीचे गले के डालता हैं,,
एक काले माथ वाली, चतुर चिडिया,
सफेद पंखो के झपटे मार फौरन,,
टूट पडती हैं भले जल के ऊपर,
एक उजली चटुल मछली,,
चोच पीली मे दबाकर,
दूर उडती हैं गगन मे,,,,,,,,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

सही निर्णय

कुछ समय पहले की बात है,
  एक बार राजकुमार गौतम,
अपने बगीचे में सैर कर रहे थे।
    उसी समय अचानक एक,
घायल हंस उनके सामने आ गिरा।
  उसका शरीर
तीर लगने से घायल,
हो गया था।
  राजकुमार को उस  हंस पर दया
आ गयी।
और फिर उसने उस हनस को गोद
   मे उठा लिया।
वे प्यार से उनके पंखो को सहलाने लगे।
  फिर उसने धीरे से उसके शरीर से
तीर निकाला, और उसके घाव को साफ
  किया, फिर उस हंस को पानी पिलाया
धीरे धीरे हंस की पीडा कम होने लगी।
  कुछ समय बाद राजकुमार का चचेरा
भाई गौतम दौडता हुआ वहां आया।
  वह बोला यह।इस मजे दे दो यह मेरा
शिकार हैं।
  गौतम ने सवाल किया‌‌,,,तुमने इस पक्षी
     को घायल किया।इसने तुम्हरा किया
वीगाडा था।
    मैंने इसे बचाया हैं यह मेरा है,मैं इसे
तुमको नहीं दे सकता।यह कहकर वह
राजमहल की ओर चल दिया ,देवदत्त
भी पीछे पीछे चल दिया।
  दोनों निर्णय के लिए राजा के पास पहुंचे।
देवदत्त ने अपनी बात कही ।गौतम मेरा हंस
नहीं दे रहा है।यह हंस मेरा है इसे मैनै मारा है।
   गौतम बोला मैंने इसे बचाया हैं,यह मेरा है।
राजा ने दोनों की बातो को सुना।
  राजा ने कहा,,,, मारने वाले से बचाने
वाला अधिक बड़ा होता है,,,,
  अतः इस हंस पर गौतम का अधिकार है।
राजकुमार गौतम आगे चलकर,,,

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

चालाक लोमडी और सारस

कुछ समय पहले की बात है।
  किसी जंगल में एक लोमडी,
और एक सारस रहते थे।
   दोनो मे खूब मित्रता थी।
दोनो सारे काम साथ साथ ,
   करते थे।
एक दिन की बात है, लोमडी ने,
    सारस को अपने यहाँ दावत
पर बुलाया।
  लोमडी ने अपने मित्र के सम्मान में,
     मीठी खीर बनाई।
उसने इस खीर को एक चौडी,
   थाली मे परोस दिया।
लोमडी बोली भाई सारस,
  आओ खाना शुरू करें।
दोनो साथ साथ खाने बैठ गये।
   लोमडी तो तेजी से सारी,
खीर खा गयी।
   लेकिन सारस की बडी चोच,
मे खीर न पहुंच सकी।
    उसे भूखा रहना पडा।
वह लोमडी से वोला.....
   आप का भोथन वहुत,
स्वादिष्ट था।
   आज शाम का खाना आप को,
मेरे यहाँ करना हैं।
   सारस लोमडी से बदला लेना,
चाहता था।
उसने बढिया शोरवा पकाया।
  शाम को लोमडी मित्र के घर,
आ पहुंची।
    शोरवे की मीठी सुंगध से,
लोमडी की भूख तेज हो गयी।
  सारस ने सुराही मे शोरवा परोसा।
जिसका मुँँह बहुत छोटा,और ,
   पतला था।
सारस ने बहुत आराम से,वर्तन
  मे चोच डाली और बडे मजे से
सारा सोरवा पी लिया।
   लोमडी भूख के मारे चुपचाप,
बैठी यह सब देखती रही।
  लोमडी अब समझ चुकी थी,
कि उसने अपने मित्र के साथ ,
 चालाकी दिखा कर बहुत बडी,
 गलती की हैं।
ऐसा करके अब वह अपने,
व्यावहार पर पछता रही थी।

रविवार, 8 दिसंबर 2019

मेरा कल्पना शील मन

मेरा कल्पनाशील मन अनेक
बार अनेक चीजो को देखता हैं।
कभी कभी मै कल्पना करता हूँ
कि यदि मेरा खुद का स्कूल
होता तो....
  मुझकों लगता कि मानो
हमारे ऊपर बहुत सी जिम्मेदारी
आ जाती।और मै उसे बाखूबी
निभाता।
 सबसे पहले मै स्कूल की सारी
व्यवस्था को नियमित रूप से
करता।
 स्कूल सही समय पर खुले,
सही समय पर उपस्थित,
  सही समय पर प्रार्थना हो,
समयनुसार सभी कलास
 पीरियड लगे,इस काम को
मै प्राथमिकता देता।
 हमारी देख मे ,परीक्षा की
योजना पढाई के लिए अत्यंत
 हितकर हैं।
और हम प्रयास करेंगे कि,
 छात्रो की समय समय पर
छोटी छोटी परीक्षाएं हो।
  साल भर मे कम से कम
दो बार बडी परीक्षा कराते।
 जिससे छात्र छोटी परीक्षा
के माध्यम से, विषय को
सारपूर्ण समझ सके।
 और बडी परीक्षा के द्धारा
पूरा पाठ्यक्रम तैयार कर सके।
  नकल और धोखाधड़ी को
समाप्त कर देता।
  मै स्कूल में उन गुदडी के
लालो को पहचानने और
विकसित करने का पूरा प्रयास
करता,...जो गरीबी के कारण..
अपनी प्रतिभा का विकास
नही कर पाते।ऐसे छात्रो
को प्रोत्साहन और सहायता
दिलाने का प्रयास करता।
  खेल कूद का बढावा देता।
बच्चों को समय समय पर
खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित
कराते,और उसमे उनको
पुरस्कार विजेता घोषित करते।
   बाद विवाद ,नाटक,अभियान,
भाषण,आदि कार्य मे बच्चों
को गहरी रूचि दिलाते।

 इसकेलिए मै कला संपन
अध्यापक का एक उत्साही
मंडल तैयार करता,जो
बच्चों में यह सब कला
विकसित करतेऔर
उनका चहुंमुखी विकास
करने मे उनकी सहायता प्रदान
करते।
  हमारा प्रयास होता कि
  हमारे स्कूल के छात्र केवल
ग्रहक न हो,अध्यापक ज्ञान
विक्रेता न हो।
  उनमे ज्ञान,श्रद्धा और प्रेम
का गहरा सम्बध हो।
   इसके लिए मै हर संभव
प्रयास करता।
   मै अपने अध्यापक और
छात्रो के बीच निरभयता का
वातावरण वनाता,जिससे
सब एक दूसरे को अपनी
भावनाऐ कहसुन सके।
     मै समझता हूँ कि...
इन उपायों मे मेरा स्कूल...
   एक श्रेष्ठ स्कूल बन जाता।

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

एक सज्जन इलाहाबाद पहुंचे

गांव से चलकर एक सज्जन इलाहाबाद
पहुंचे। जेसे ही ्् वह टेंशन से
उतर कर बाहर निकले , वैसे ही
एक लड़का आकर उनके पैरों
पर गिर जाता है,और कहता है,
अरे चाचा जी ,आप कहां थे,,,
    आप ने यहां तक आने में
इतनी देरी लगा दी।और हम
कब से आप की राह देख
रहे हैं।तभी सज्जन महोदय
ने कहा आप कौन हो भाई
हमने आप को पहचाना नहीं।
   अरे आप ने हमें नहीं पहचाना,,
हम आप के दूर के चाचा के
मामा का लड़का मोहन हूं।
  मोहन ,,कौन मोहन,,
खैर छोड़ो,अब मैं बूढ़ा हो गया,
इसीलिए,निगाहें कमज़ोर हो
गरीब हैं,हो तुम पहचान में
नहीं आ रहे हो।
   खैर छोड़ो,अब एक से भला
दो लोग हो गये
  अब इलाहाबाद घूमने मे काफी
मजा आएगा।
  अब वह सजजन अब मोहन
के साथ इलाहाबाद घूमने लगे।
   चलो कोई साथ तो मिला।
कभी इस मंदिर से उस मंदिर,
अब पहुंच गये गंगा घाट।
मोहन,,न हां ले।
 हां हां नहा लीजिए।इलाहाबाद
घूमने आऐ हैं, नहाये नहीं,
यह कैसे हो सकता हैं।
अब महासय  गंगा मे डुबकी लगाई
हर हर गंगे।बाहर निकले तो
महासय का सारा सामान गायब।
  कपड़े गायब,,मोहन भी गायब।
मोहन ऐ मोहन।
लेकिन मोहन वहां पर हो
तो बोले।अब महासय
तौलिया लपेटे खड़े हैं।अरे
भाई साहब आप ने मोहन
को  देखा है ।
कौ



गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

एक बेटी का खत

एक पिता कहता है कि, बेटी हमें
अफसोस है कि तुम इस देश में
पैदा हु ई है। जहां लोग एक जुर्म
छुपाने के लिए,दूसरे जुर्म का सहारा
लेते हैं। जहां पीड़ित पीड़िता के
बजाय अपराधी और उसका धर्म
महत्व पूर्ण हो जाता है।
     औरत के शरीर के भूगोल
को देखने वाला हमारा समाज
पता नहीं उनकी आत्मा को क्यों
नहीं देख पाता।
  आप को पता है ,औरते चुप क्यों
रहती हैं, क्यों कि बोलना उन्हें
बचपन से ही सिखाया ही नहीं जाता।
      अगर वे आवाज ऊंची करके
बोलती हैं तो उनको धीमा बोलना
सिखाया जाता है।
    जहां तुम परी बनकर उतरी
थी वहां नारी को देवी मानकर
पूजा करना एक ढोंग है।
     तुम जैसे करोड़ों बेटियों
ने यहां पर जन्म लेकर गलती की है ‌।
       यहां राजनैतिक यह आर्थिक
बदला लेने के लिए बेटियों को ही
चुना जाता है।
   आपबीती सुनाने में
बेझिझक शब्द फूटते नहीं
गले से ।
   अपनी सखी सहेलियों से से ही
कह पाती है।


बुधवार, 4 दिसंबर 2019

अनुशासन की प्रथम पाठशाला

अनुशासन काअर्थ है,
       शासन .....ब्यवस्था के
अनुसार जीवन यापन करना।
यदि कोई ब्यवस्था निश्चित हैं,
तो उसके अनुसार जीना।
    जीवन मे कोई नियम ब्यवस्था,
या क्रम बनाना।
  अनुशासन जीवन को चुस्त दुरुस्त
बना देता है।
इससे कार्य कुशलता बढती हैं।
 समय का पूरा पूरा सदुपयोग होता हैं।
      अनुशासन का पहले पहल
परिवार से सीखा जाता हैं।
यदि परिवार में सब कार्य ब्यवस्था से
किये जाते हैं तो बच्चा भी अनुशासन
सीख जाता हैं।
इसलिए मनुष्य को सबसे पहले
अपना घर अनुशासित होनी चाहिए।
    सामाजिक जीवन में अनुशासन होना
अनिवार्य है। जैसे ‌‌‌‌,,,
     गाड़ी, बसे, स्कूल, कार्यालय,
सभी समय से खुले,,,
समय से बन्द हो।
    कर्मचारी ठीक समय पर अपने अपने
स्थान पर कार्य के लिए तैयार हो।
   यहां पर टालमटोल न हो।
  इसी के साथ छात्र भी समाजिक
कार्यो में यथासमय पर पहुंचे।
वेवहां की सारी नियम ब्यवस्था
 का पालन करें।
वास्तव में अनुशासन एक स्वभाव है।
     एक ज्ञान है।
जीवन को समधुर सुविधा पूरा करना।
वह न केवल स्वच्छता पर ध्यान
देता है, अपनी बोलचाल और ब्बयवहार
पर भी ध्यान देता है।
     इस प्रकार,,,,
  अनुशासन जीवन मूल्य है।
मनुष्य का आर्दश है।

मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

लक्ष्य मानव का

हर मानव का कोई न कोई
लक्ष्य होना चाहिए।
लक्ष्य बनाने से जीवन में रस
आ जाता है।
मैने तय किया कि हम पत्रकार
बनूंगा।नव भारत टाइम में संबाददाता
बिरोधी बिभाग के प्रमुख पत्रकार।
  जो पिछले वर्ष गैस सिंलेडर
मे हुए बडे पैमाने पर धाधली
को अपने लेखो के माध्यम से
बन्द करवा दिया था।
उन्हीं के लेखो के कारण...
   आज हमारे शहर मे बहुत
से गरीब परिवार के लोगो
और दीन दुखियों को न्याय मिला।
    बस यही सब कारण है कि
आज हम उनका आदर करते हैं।
  और मेरा भी मन करता हैं कि
हम उनकी तरह पत्रकार बनकर
रोज बढती समस्या का डट कर
मुकाबला करें।
   जबकि हमको पूरी तरह से
पता हैं कि एक पत्रकार बनने
मे खतरा बहुत ज्यादा है, और
तो और पैसा भी बहुत कम मिलता


बुधवार, 27 नवंबर 2019

ऐसे बनेगा अयोध्या राम मंदिर

अयोध्या में जन्मे त्रीराम
प्राचीन इतिहास के महानायक
हैं। सारी दुनिया में राम
लीला होती हैं।इन्ही त्री
राम की जन्मभूमि का
प्राचीन मंदिर घ्वस्त हुआ।
मंदिर के लिए तमाम
संघर्ष हुऐ।समूचा भारत
आंदोलित था। न्याय
पीठ के फैसले की सहज
लोकस्वीर्कत से अदभूत
वातावरण वना।फैसले को
लेकर विश्व जिक्षासा थी।
तमाम आशाऐ भी थी।
दुनिया में भारत की संबैधानिक
संस्थाओं की प्रतिष्ठा बढी।
   अयोध्या में प्रस्तावित राम
मंदिर दुनिया का सबसे
दिब्य व सबसे अलग होगा।
मंदिर निर्माण की मरमपरिक
नगर शैली में बनने वाल
यह मंदिर आठभुजा मे
बनेगा।108 फिट का
गुम्मबद भी आठ भुजा
मे बनेगा।
यह दो मंजिला होगा।
 मंदिर परिसर ढाई एकड का होगा।
दो से तीन साल में यह बन
कर तैयार हो जायेगा।
  जिसके लिए 250 से
300 कारीगर काम करेंगे।
  राजस्थान भरत पुर के
बंसी पहाडपुर गांव के
गुलाबी पत्थरो से यह
तैयार किया जाऐगा।
   सबसे पहले मंदिर की
चौकी होगी।
   251 खम्भों पर टिका
होगा मंदिर।
  500 सौ लोग एक बार
मे दर्शन व आरती कर सकेंगे।
 यह दुनिया का एक
अदभुत व अनोखा होगा।
जिसे देखने व दर्शन
करने के लिए पूरी दुनिया भर
के लोग आयेगे।


शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

महिला की ईमानदारी

किसी गांव में एक गरीब परिवार
रहता था।उस परिवार में एक छोटा
सा लडका और उसकी माँ रहती.थी।
और उस परिवार में कोई नही था।
वह गरीब महिला अपने छोटे से पुत्र
के साथ अपने झोपड़ी में रहती थी।
  और थोडी दूर पर सेठ धनी राम
का मकान था।वह गरीब महिला
सेठ धनी राम के घर पर झाडू पोछा
कर अपना और अपने लडके का
पेट पाल रही थी।
     एक दिन की बात हैं, सेठ धनी
राम कुछ धन और कुछ पैसा लेकर
घर से लेकर निकले,और थोडी दूर
जाने के बाद रास्तें मे उनका धन
गिर गया।और सेठ धनीराम को
यह.समझ नही आया कि हमारा
धन कहांं पर गिर गया।
   सेठ धनी राम अपने धन को
लेकर बहुत परेशान थे।
   उधर महिला अपने घर से निकली
सेठ के घर काम करने के लिए।
थोडी दूर आने पर देखती हैं कि
रास्ते में एक पोटली पडी हुई हैं।
वह महिला उस पोटली के पास
जाती हैं और उसको उठा ती हैं
और उस पोटली को खोलकर
देखती हैं, तो उस पोटली मे
सोने की मोहरे और पैसे भरे
हुऐ थे।
    उस महिला को कुछ समझ मे
नही आ रहा था,कि वह उस पोटली
को किसे दे,
   वह उस पोटली को सेठ धनी राम
के पास लेकर गयी,चूंकि महिला
ईमानदार थी ।
    सेठ धनी राम उस पोटली को
अपने हाथ मे लिया,उसे खोला
और देखा,बहुत खुश हुआ।
   फिर सेठ ने उस महिला को
खूब ढेर सारी सोने की मोहरें
दिया और उसके लडके का नाम
बढिया स्कूल मे लिखा दिया, और
उस महिला के लडके की पूरी
जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लिया।


  महिला की ईमानदारी को देख
   सेठ बहुत प्रंसन था।

मंगलवार, 19 नवंबर 2019

मन कहतख है...

मन कहता हैं, तारे बन कर,,
आसमान को ,देखकर आऊ,,
 मन कहता हैं, पंक्षी बनकर,,
आसमान की,सैर कर आऊ,,

मन कहता हैं, भंवरा बनकर,,
फूलों का मै,रख चख आऊ,,
मन कहता हैं, कोयल बन कर,,
मीठे   मीठे,        बोल सुनाऊ,,

मन करता हैं, मै चरखी लेकर,,
लाल    पीली,  पंतग  उडाऊ,,
मन करता हैं, मै तितली बनकर,,
दूर   दूर  तक,  उड़  कर सैर कर आऊ,,
                            ---आर.कुमार...

शनिवार, 16 नवंबर 2019

खुशी के पल

कठिन परिश्रम सफलता की कुंजी होती हैं।
   लेकिन अति के लालसा के परिणाम
भयानक होते हैं।इसलिए मनुष्य कितना भी
    अर्जित कर ले लेकिन वह और अधिक की
लालसा मे,अपना सुख चैन खो बैठता हैं।
     उसे खुशियां तो तमाम मिलती हैं,
      लेकिन न तो उनको वह देख पाता
      हैं, और न ही उनका आनंद उठा पाता हैं।
कस्तूरी मृग की भांति, हम खुशियों को
     यहाँ वहाँ खोजे जा रहे हैं।
स्थिति सकारात्मक हो या
नकारात्मक जीवन को सदैव
आनंद के साथ जीना सीखना चाहिए।जीवन मे कर्म प्रधान ही
सफलता का मूल आधार है।
"कर्म किए जा फल की इच्छा,
मत कर यह इंसान,,
जैसा कर्म करेगा,
वैसा फल देगा 
 भगवान.....

रविवार, 3 नवंबर 2019

सनकी सेवक

राजा के दरबार में एक सनकी सेवक
रहता था।राजा ने उसे अपने काफी
नजदीक रहता था।वह राजा का वफादार
सेवक था।वह राजा की खूब सेवा
करता था। राजा भी उस सेवक की
वफादारी से खूब खुश रहता था।
   एक दिन की बात है,
   राजा अपने कमरे मे
  आराम कर रहे थे।और
  वह वफादार सेवक
 राजा को पंखे हाक रहा
था।तभी राजा के ऊपर
एक मंखी उड कर आकर
बैठ गयी।सेवक उसे उडाता
वह मंखी फिर आकर राजा
के कपडो पर आकर बैठ जाती।
तभी सेवक ने बगल रखा हुआ
एक डंडा अपने हाथ मे उठाया,
और जैसे ही मंखी दूबारा राजा
के ऊपर बैठी तभी सेवक ने
उस डंडे से राजा के ऊपर
जोरदार उस डंडे से वार किया
और फिर मंखी तो उड गयी,
लेकिन राजा को कफी गंभीर
चोटे आई,राजा बेहोश....
...इससे हमे यह सीख,
..मिलती है कि एक मूर्ख,
.से ठीक एक बुद्धिमान,
ठीक होता हैं।....

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2019

संत की बात

गांव की एक गरीब महिला, जो
बहुत परेशान रहती थी वह एक
दिन पडोस मे रह रहे एक कुटी
पर संत के पास गयी।उस गरीब
महिला ने उस संत से कहा....
   बाबा मै बहुत परेशान रहती हूँ।
    मै मेहनत करती हूँ, पर घर मे,
      हमारे बरकत नही होती हैं।
मेरा परिवार बहुत दुखी  हैं।
बाबा.. मुझे कोई उपाय बताए।
उस गरीब महिला की बात को
सुनकर बाबा ने महिला को एक
पर्ची दी और कहा इसे सहेज कर
रख देना,और इसे तब खोलकर
देखना जब तुमको बहुत जरूरत हो।
   उस महिला ने वैसे ही किया।
  उस पर्ची को सहेज कर रख दिया।
और खाना पका खा कर सो गयी।
     सुबह जब वह महिला उठती हैं,
तो देखती हैं उसके आगन मे एक
नोटो से भरा हुआ बैग पडा हुआ हैं।
उस महिला ने उस बैग को उठाया
और उसे खोला ,उसमे एक बडी सी
पर्ची भी थी,जिसमे लिखा था कि इस
पैसे से कोई करोबार कर लेना....
  उस महिला ने दूसरे दिन किराये पर
दुकान लेकर कारोबार शुरू किया।
उस महिला को उस कारोबार से
इतना फायदा हुआ मानो पैसों की
बारिश उस महिला के घर मे होने
लगी..उस महिला का कारोबार ठीक चलने लगा।
     कुछ दिन बाद अचानक एक दिन
     उस महिला को बाबा की दी हुई
    पर्ची की याद आई...
फिर उस महिला ने छट से जाकर
उस पर्ची को देखा और उसे खोला...
    फिर पढा...
   "जिस पर्चा मे लिखा था"
"यदि किसी के घर मे रात को,
बच्चों की रोने की अवाज आए,
तो कुछ पैसे उनके घरो मे भी डाल देना"/

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

राम राम दो बार

सदियों से चला आ रहा हैं।
जब लोग एक दूसरे से मिलते,
हैं तो आपस मे एक दूसरे को
दो बार "राम राम"बोलते हैं।
   आखिर क्क्यो हम हम राम
राम एक य तीन बार नही बोलते।
   दो बार राम राम बोलने के पीछे
बहुत बडा राज छुपा हुआ हैं।
जो आदि काल से चला आ,
रहा हैं। जो कि ...
"हिंदी की शब्दावली मे
   र  सत्ताइसवा शब्द हैं...27
               और
आ की मात्रा दूसरा शब्द हैं...2
              और
म पच्चीस वा शब्द हैं...25
      और
अब तीनो का योग करे तो...
  27+2+25=54
        अब
एक राम का योग 54 आता हैं
          इसी तरह
दूसरे राम का योग
   27+2+25 =54
       अब दोनो राम क योग...
      54+54=108 होता हैं।
और हम जब कोई जाप करते
हैं तो "मन के की माला"
गिन कर करते हैं..
    इस तरह से
राम राम
दो बार
कह देने
से ही
पूरी
मन के
की माला
का जाप
हो जता हैं।
एक पौध

रविवार, 13 अक्टूबर 2019

यह वक्त गुजर जायेगा

एक समय की बात हैं,
     अकबर ने बीरबल को अपने दरबार
    मे बुलाया, और कहा,
बीरबल...मै जहाँ बैठा हू इसके ठीक
            सामने वाली दीवार पर कुछ
           ऐसा लिखो कि,मै...
"गम मे उसे पढूं  तो खुशी हो" !
"खुशी मे मै उसे पढूं, तो गम हो" !
     यह सुनकर बीरबल थोड़ी देर
     खडे होकर सोचने लगे ,और फिर
वह जाकर सामने वाली दीवार पर लिखा...
       "'यह वक्त गुजर जायेगा"
अकबर को बीरबल की लिखी हुई यह
बात बहुत पसंद आई,फिर अकबर ने
बीरबल को ढेरों, सोने चादी के उपहार दिया।
  किसी ने सच ही कहा हैं...
    यह वक्त कब गुजर जाता है,
किसी को पता ही नही चलपाता,
इसलिए समय के साथ चलना सीखो,
जो समय के साथ चला हैं,
वही आगे वढा है।।
   चलते रहने का नाम जिंदगी है।
चलते रहेगे तो एक दिन, मंजिल तक
अवश्य पहुंच जायेंगे।.....C.t.m.founder

गुरुवार, 10 अक्टूबर 2019

एक गरीब आदमी

किसी गांव में एक बहुत ही
गरीब परिवार रहता था।उस
परिवार के मुखिया का नाम
दीनानाथ था।उस परिवार में
दीनानाथ और उनकी पत्नी
रीना ,और एक बेटा राहुल था।
दीनानाथ का परिवार बहुत ही
गरीब था। वह दिन भर मेहनत
मजदूरी कर किसी तरह अपना
और अपने परिवार के लिए
कमा कर लाता था,और बडे
ही मुश्किल से रोटी का जुगाड़
कर पाता था।वह गाँव मे जब
निकलता था,गांव के लोग
उसके गरीबी का मजाक उडाते
थे। दीनानाथ को यह सब ठीक
नही लगता था।उसे गांव के लोगों
की बाते सुनकर बहुत दुख होता
था।उनको समझ मे नही आता था
कि आखिर वह का करे कि उनका
परिवार भी खुशहाल जीवन जिये।
   एक दिन दीना नाथ मजदूरी करने
गांव से कुछ दूर पर गया।वहा पर बहुत
पुरानी जमीन जो कई सालो से
बंजर पडी हुई थी ,उसी जमीन पर
उसे खुदाई करना था।वह अपने
हाथ मे एक फावडा और टोकरी
साथ लेकर गया था।उसने वहाँ
पर खुदाई करने लगा।धीरे धीरे
उसने दो घंटे तक खुदाई किया।
    चूंकि जमीन कफी पुरानी,
     और बंजर थी इस लिए
 खुदाई करने मे परेशानी होती
  थी,लेकिन फिर भी ,दीनानाथ
  ने खुदाई बन्द नही कीऔर
धीरे धीरे पाँच फिट गहरा गडढा
खोद डाला,पांच फिट के बाद
दीनानाथ ने जैसे ही और गहरा
गडढा खोदना चाहा, उनको
कुछ दिखाई दिया।उसने फावडे
से मिटटी हटा कर देखा तो वह
दंग रह गया।वहां एक संदूक मे ढेर
सी अर्सफी भरी हुई थी।
   अब तो दीनानाथ की तकदीर
ही बदल गई।वह उसे उठा कर
घर ले आया।
  और फिर दूसरे दिन वह नहां
धोकर तैयार हुआ, और उसने
कुछ अर्सफी लेजाकर बाजार
मे बेच दी।और उस पैसे को
घर ले आया। चूंकि घर की
माली हालात ठीक नही थी
इसलिए पहले उसने उस पैसे
से बाजार से अनाज ,और खाने
पहनने का सामान खरीदा,फिर
उसे घर ले आया।उसके बाद
फिर उसने अपना रहने के लिए
घर का प्रबंध किया।
और ठीक ठाक रहने लगा।
अब गांव के जो लोग
उस पर हसते थे वही
लोग राह चलते य इधर
उधर कही पर मिलते
दीनानाथ को नमस्कार
अवश्य करते थे।
कहते हैं.. मालिक जब देता हैं..
  तो छप्पर फाड कर देता हैं।।
यह कहावत दीनानाथ पर
बहुत सही साबित हु ई।
  कभी किसी गरीब का
  मजाक नही उडाना चाहिए।
कब किसकी किस्मत कहाँ
बदल जाय यह कोई नही जानता।।
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शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2019

स्वच्छता ही जीवन

स्वच्छता के कमी के कारण
बच्चों में डायरिया, और कुपोषण
बढ जाता हैं जिससे बच्चों की
मृत्यु हो जाती हैं।
 विश्व बैंक की रिपोर्ट....
         दूनिया भर मेएक वर्ष मे
गंदगी के कारण लगभग 17 लाख
मौते होती हैं, जिसमे 30%बच्चे
होते हैं।
  लोगों मे स्वास्थ्य मे सुधार के
  लिए व्यक्तिगत और समुदायिक
दोनो स्तर पर स्वच्छता अनिवार्य है।

   स्वच्छता ग्राही रिपोर्ट......
           यह दरशाता हैं कि हम अपने 
आस पास फैली सक्रामण विमारियों
पर काबू पा सकते हैं, यह वदलाव
केवल स्वच्छ भारत मिशन की
वजह से देखने को मिल सकता
हैं। आज हम स्वचछ भारत मिशन
से संतुष्ट हैं, लोगों मे जागरूकता
देखने को मिल रही हैं।
  स्वच्छ भारत मिशन का मिशन
का यह आन्दोलन देश के समस्त
विकास का आधार भी बनेगा।

             ,स्वच्छ भारत मिशन, से
                     आर .कुमार,


गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019

एक कदम स्वच्छता की ओर

गांधी जी के स्वच्छ भारत के
सपनो को पूरा करने के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2अक्टूबर
2014 को स्वच्छ भारत अभियान की
शुरुआत की।इस अभियान में प्रशासन के साथ
आम लोगों को भी जोडा गया।
  और उनको जागरूक किया,
यही कारण हैं कि आज देश
के हर गाँव में,शौचालय का
निमार्ण हुआ।स्वच्छता को
लेकर आम लोगों मे अधिक
जागरूकता देखने को मिली।
  इसे आनदोलन का रूप देकर
स्वच्छ भारत मिशन मे स्वच्छता ग्राही
की नियुक्ति की गई और इनकी
तैनाती गांव मे की गई।
इन्होंने गांव में जाकर वहां के
प्रधान, आशा बहू, आगनबाड़ी
कार्य कत्री,सेक्रेट्री के साथ
मिलकर  गांव के लोगों को
इकट्ठा कर लोगों को इसके
विषय में जानकारी दी।
 और घर घर जाकर सव्रेक्षण
कर लोगों को इसकी पूरी
जानकारी दी,।और शौचालय
का निर्माण कार्य करा गाँव को
"खुले मे शौच मुक्त"
 करा एक मुकाम हासिल किया।
कहते हैं... जिसने ठान ली
          ... जीत उसी की हैं,,
और यह सब कर दिखाया
गाँव में तैनात "स्वच्छता ग्राही"ने।।
इनहोने इस काम में अपना
पूरा योगदान दिया है।...S b.m...R.ku.

रविवार, 29 सितंबर 2019

एक बन्दर

किसी जंगल मे बन्दरो का
झुंड रहता था।वह सव बहुत उछल कूद
करते रहते थे।उसी जंगल मे
शेर भी रहता था।
एक दिन शेर सो  रहा था।
तभी एक वन्दर ने
उस शेर के पास जाकर
उसका एक कान खीच
लिया,शेर उठा और बोला
किसी ने देखा तो नही
हमारा कान खीचते हुए,
वन्दर वोला नही,
शेर फिर वोला ,दुवारा
खीचो खीचते रहो,
मझे अच्छा लगता है।
इस जंगल में अकेला
रहते रहते मै बोर हो
गया हूँ, कम से कम एक
मुझे दोस्त तो मिल गया।
जिसके साथ मै कुछ पल
विता तो सकता हूँ।

गुरुवार, 26 सितंबर 2019

"अपनो की याद"

"जहाँ अपनो की याद न आऐ।
"वह तन्हाई किस काम की।।
"बिगडे रिश्ते न मिले।
"वह खुदाई किस काम की।।
"बेशक अपनी मंजिल तक ।
          "जाना है मुझे।।
"पर जहाँ से अपने न दिखे"
"वह ऊँचाई किस काम की"

"रिश्ता वह नही होता हैं"
"जो दुनिया को दिखाया जाता हैं।।
"रिश्ता वह होता हैं।
"जिसे दिल से निभाया जाता हैं।।
"अपना कहने से कोई अपना नही होता।
" अपना वह होता हैं ,।
"जिसे दिल से अपनाया जाता हैं।।
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बुधवार, 25 सितंबर 2019

कहानी एक घर की

सेठ हीरा चंद ,बडी ही,
खुशी से कही आने जाने,
के लिए बडे ही प्यार से,
अपने और पूरे परिवार की,
खुशी के लिए ,एक महगी,
फोर ब्बीहीलर कार घर ,
लेकर आया।और उसी कार ,
से वह और उसका परिवार,
जहां कही भी आना जाना,
होता था वह लोग आया जाया,
करते थे।एक दिन सेठ हीरा चंद,
अपनी गाडी की धुलाई,
कर रहे थे,तभी वहां पर,
उनकी पोती पहुचती हैं,
और उसके हाथ मे एक ,
नुकीला पत्थर था ,वह
उसी से गाडी के सीसे पर,
लिख देती हैं, पापा "आई...
लव यू"....इससे पहले की
वह कुछ लिखा हुआ देखता,
सेठ ने अपनी पोती को यह,
करते देख इतनी जोर से छिटका,
कि उसके हाथ मे जोर की,
चोट आ गयी...फिर उसने डा.कटर,
को बुलाया और उसका इलाज,
कराया...बाद मे सेठ को बहुत,
पछतावा हुआ।फिर सेठ जाकर,
गाडी पर अपना गुस्सा निकालने,
लगा ,तभी उसकी नजर उस ,
लिखे हुए स्क्रेच पर पडती हैं,
जिस पर लिखा हुआ था..
"पापा आई लव यू"
  यह लिखा हुआ देख सेठ की ,
आँखे भर आती हैं और वह,
जोर से फफक कर रोने लगता,हैं,
उसे अपनी गलतियों पर ,
पछतावा होता हैं।..?
...गुस्से और प्यार की सीमा,
             नही होती हैं।
...याद रखे चीजे प्रयोग,
         करने के लिए होती हैं।
...और इंसान प्यार करने,
           के लिए होते हैं।
.... 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
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सोमवार, 23 सितंबर 2019

यह जिन्दगी

जिन्दगी एक अभिलाषा हैं।
गजब इसकी परिभाषा हैं।।
जिन्दगी कैसे हैं, मत पूछो।
सवर गयी तो तकदीर,
         और
बिगड गयी ,तो
तमाशा हैं।।
  यह जिन्दगी अजीब है।
सपने तो सब देखते हैं,
ऊची उडान सब कोई ,
उडना चाहता हैं, पर
दौडते तो सब हैं, लेकिन
इस दौड मे ,पहला स्थान
केवल एक ही को मिलता
हैं।ठीक उसी तरह सब लोग आगे
निकलना चाहते हैं।पर कोई हाथ
उठाकर आसमान को छू लेता हैं
तो कोई पीछे रह जाता हैं।
 ऐसे लोगों को केवल इतना
समझाने की आवश्यकता है
कि उनका जीवन सही वने
या बुरा इसका निणर्य पूरी
तरह उसे खुद ही करना हैं।
  उसे य उस जैसे मानवो
को य तो स्यम की विचार
मेधा के सहारे अथवा किसी
को विवेक वान आदमी के
शिक्षण द्धारा निरंतर मनन
करना होगा,कि जीवन काल
मे किसी भी मनुष्य की विफलताऐ
भूल जाने वाले दु:ख दर्द और
       सुख शांति
पाने मे किसी भी प्रकार
की मदद नही कर सकते।

रविवार, 22 सितंबर 2019

"अचानक एक मोड पर"

एक समय की बात है।
किसी रास्ते से ,इधर से,
दु:ख जी जा रहे थे,और ,
उसी रास्ते से उधर से सु:ख,
जी चले आ रहे थे। कि उसी,
रास्ते पर एक तिराहा था,उसी,
तिराहे पर दु:ख और सु:ख दोनो,
की मुलाकात हती है। दु:ख ने सु:ख,
से कहा,तुम कितने भाग्य शाली हो,
जो लोग तुमको पाने की कोशिश,
मे लगे रहते हैं।तब सु:ख ने,
हसते हुऐ कहा...भाग्य शाली मै,
नही तुम हो....तब दु:ख ने हैरानी,
से पूछा, भाई वह कैसे.... तब सु:ख,
ने बडी ईमानदारी से जबाब दिया......,
यह ऐसे कि , .......
"तुमको पाकर लोग "
"अपनो को याद करते हैं"
"लेकिन मुझको पाकर"
"सब अपनो को भूल जाते हैं"

शनिवार, 21 सितंबर 2019

काम चोर आदमी

एक गांव में बच्चों के पढने के।
लिए स्कूल नही था।उस गांव में।
बच्चे बहुत दूर नाव के सहारे ,नदी।
पार कर ,अपनी जान जोखिम में।
डाल कर बच्चे स्कूल पढने जाया।
करते थे।....
  और फिर एक दिन गांव के लोग
इकट्ठा हुए और आपस मे बिचार,
किया कि हम लोग थोडा ,थोडा
पैसा ,चन्दा लगा कर गांव के पास ,
जो थोडी सी जमीन पडी हुई हैं ,उसी
पर छोटा सा स्कूल बना लिया जाय।
गांव के सभी लोग राजी हो गये।
गांव के सरपंच, और लेखपाल, सेक्रेट्री,
को बुलाया गया।यह सभी लोग आये
जमीन देखी गयी,और उस जमीन की
पैमाइस की गयी।....
    और फिर गांव के सभी लोगों ने,
अपने अपने पास से ,थोडा थोडा पैसा,
₹पया ,देकर ढेर सा पैसा इकट्ठा किया।
      फिर उस इकट्ठा किया हुआ पैसा से
समान मगाया गया।और फिर निमार्ण का
काम चलू कर दिया गया।
     उस गांव के महिला, पुरुषों ने मिलकर
अपना श्रम दान भी दिया।और काम तेजी
से होने लगा।
  दूसरे दिन सभी लोग काम कर रहे थे,
पर रामू मुह लटकाकर खडा हुआ था।
तब वहां पर खडा हुआ देखकर सेक्रेट्री
ने पूछा,अरे रामू का हुआ तुम ऐसे,काहे
को खडे हुऐ हो,जाओ काम करो....
   तब रामू बोला,...मुझे जोर से भूख
लगी हुई हैं।तब सेक्रेट्री ने अपने पास से
पैसे निकाल कर दिया और  बोले जाओ
खाना खा आओ। तब रामू भागकर
जाता हैं और खाना खाकर वापस आता हैं।
     तब रामू से सेक्रेटरी कहते हैं.....
    अरे रामू अब तो तुम खाना भी..
   खा लिए, अब काम पर लग जाओ..
  रामू बोला...अभी नही, हमने खाना,
इतना अधिक खा लिया है कि हमारा
पेट भर गया हैं, अब थोडा आराम कर ले
तब हम काम करेंगे।।।
 इसीलिए तो....
   काम करने वाले काम करते हैं।
 और काम न करने वालो के बहुत,
       बहाने होते हैं।
उधर निर्माण कार्य कुछ दिन में पूरा
हो गया,और गांव के छोटे बच्चे उसी
स्कूल मे हसी खुशी पढने लगे....
इसी लिए तो कहते हैं.....
 अनेकता से ऐकता ठीक होती हैं।
 ऐकता मे बहुत बल होता हैं।।

🌲🌲🌲🌲🌲एक पौधा लगाओ......
🌲🌲🌲🌲🌲प्रयावरण वचाओ......।।

शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

जिस घर के लोग

"जिस घर के लोग,
"ऐसे होते हैं।
"उ स घर मे,
"ऐसा ही होता हैं।
 अपने घर में। सुख शांति ,
बना कर रखे, कभी लडे नही,
कभी झगडे नही,कोई भी बात ,
हो घर मे खुलकर करे, और,
आपस मे बैठ कर उस पर बिचार,
करे,इसी मे सब की भलाई.......
🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
🌲🌲🌲 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
🌲🌲 🌲एक पौधा लगाओ 🌲 tree
🌲🌲🌲स्वच्छ भारत मिशन
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अच्छे इंसान ही ठगे जाते हैं...

 ठगे जाने पर भी, अफ़सोस नहीं होना चाहिये।     क्यों कि  ठगे जाने के लिए, इंसान के भीतर क ई      खूबियां होती हैं। अच्छे दिल, साफ सोच,,   और ...

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