शाम का समय था।रीता सुबह
ही स्कूल के लिए निकली और
शाम छः बजे तक घर वापस
नहीं आई।इससे पहले कभी ऐसा नहीं
हुआ था।उधर मां को रीता को
लेकर बहुत चिंता हो रहा था।तभी
सोहन घर पर आता है, मां
सोहन से कहती हैं,बेटा सोहन
बाहर देख जरा अंधेरा छा गया
है ,पर रीता बिटिया का अभी
तक कुछ पता नहीं चला, आखिर
कुछ बता कर गयी है कि वह कब
तक घर वापस आयेगी।
अरे मां चिंता मत करो रीता
ने हमें बताया है,कि आज उसे
उसके कालेज में,,,म हिला सुरक्षा
के उपाय को लेकर उसके कालेज
में कुछ जानकारियां दी जायेगी।
अरे मां मैं आप को यह सब
कुछ बताना भूल गया था।
तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई,,
खट, खट ,खट, रीता आ गयी
थी। मां का उदास चेहरा देख
रीता ने कहा,,अरे मां चिंता मत करो,,
अब डरने से काम नहीं चलेगा,,
हमें मजबूत बनना होगा।और
हमारे हौसले की उडान ही
उन राक्षसों का सबक बनेगा ,
जो बेटियों को महज एक
खिलौना समझते हैं।
ही स्कूल के लिए निकली और
शाम छः बजे तक घर वापस
नहीं आई।इससे पहले कभी ऐसा नहीं
हुआ था।उधर मां को रीता को
लेकर बहुत चिंता हो रहा था।तभी
सोहन घर पर आता है, मां
सोहन से कहती हैं,बेटा सोहन
बाहर देख जरा अंधेरा छा गया
है ,पर रीता बिटिया का अभी
तक कुछ पता नहीं चला, आखिर
कुछ बता कर गयी है कि वह कब
तक घर वापस आयेगी।
अरे मां चिंता मत करो रीता
ने हमें बताया है,कि आज उसे
उसके कालेज में,,,म हिला सुरक्षा
के उपाय को लेकर उसके कालेज
में कुछ जानकारियां दी जायेगी।
अरे मां मैं आप को यह सब
कुछ बताना भूल गया था।
तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई,,
खट, खट ,खट, रीता आ गयी
थी। मां का उदास चेहरा देख
रीता ने कहा,,अरे मां चिंता मत करो,,
अब डरने से काम नहीं चलेगा,,
हमें मजबूत बनना होगा।और
हमारे हौसले की उडान ही
उन राक्षसों का सबक बनेगा ,
जो बेटियों को महज एक
खिलौना समझते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें