वैसे तो कला का कोई
मोल नहीं होता,ऐसे ही
एक कहानी एक पढ़ें लिखे
जवां राजा की ही, कुछ समय
पहले की बात है,किसी
नगर में ,एक राजा था।
वह अपनी प्रजा का बहुत
ध्यान रखता था।उसके
राज में वहां की जनता
बहुत खुश रहती थी।
एक दिन की बात है,
राजा अपने दरबार में
बैठा कुछ सोच रहा था।
तभी उसके मन में एक
बिचार आया,उसने अपनी
सभा में अपने मंत्री से कहा
कि हमें अपना चित्र बनवाना
है,तुम जाओ और जाकर
पूरे नगर में ऐलान कर दो,
कि जो राजा का खूबसूरत
चित्र वना कर या चित्र कारी
करके देखा ,उसे दस हजार
सोने की मोहरें दी जाएगी।
यह ऐलान सुन कर दूर
दूर से नगर के एक से एक
चित्र कार आऐ, और सभा
में उपस्थित हुए।
फिर राजा ने सभी चित्र
कारों से कहा कि हमें अपनी
सूबसूरत चित्र चाहिए। जो खूबसूरत
चित्र नहीं वना कर देगा,
उसे हम मौत के घाट
उतार देंगे।यह बात सुन
कर सभी चित्र कारों ने
अपने हाथ खड़े कर लिए।
इस लिए कि राजा में एक
कभी थी। राजा जो था वह
,,,एक पैर का लंगड़ा,,,और
,,,एक आंख का खाना था,,,
इस लिए सभी चित्र कारों ने
अपने हाथ खड़े कर लिए।
लेकिन उन सभी चित्र कारों
में एक युवा चित्र कार था।
उसने राजा से कहां हम आप का
चित्र वनाऐगे,उस युवा चित्र
कार ने राजा को अपने
सामने राजा को खड़ा किया
और राजा का चित्र बनाना
शुरू किया,उस युवा चित्र कार
को राजा का चित्र बनाते बनाते
दो तीन घंटे बीत गए।राजा
बोला कितना समय लगाओगे,
अगर हमारा चित्र गलत हुआ
तो हम तुमको मौत के घाट उतार देंगे
यह सुनकर चित्र कार हसा और
बोला,महराज हम कोशिश
कर रहे हैं,कि मैं आप का
चित्र सूबसूरत बना सके।
उसके थोड़ी देर बाद
राजा का चित्र बना कर
वह चित्र कार राजा को
देता है,उस चित्र को राजा
देखता है और जोर से हंसता है,
यह देखकर दूसरे चित्र कार
अचंभित रह जाते हैं,और
आपस में बिचार करते हैं
ऐसा का बना दिया है उस
चित्र में,जिसे देख कर राजा
जोर से हंसा,,,,
उस चित्र में उस युवा चित्र कार
ने राजा को शिकार खेलते हुए
बनाया था,राजा के साथ में
धनुष,बाड लिए हुए,और एक
आंख बंद किए हुए ,घुटनों के
बल बैठा हुआ दिखाया था।
जिससे राजा की आंख,
और राजा का पैर दोनों
चीजें छिपाती हैं।
अपना चित्र देख कर
राजा ने उस युवा को
दस हजार सोने की
मोहरें दी,और वह
युवा चित्र कार
खुखी खुखी अपने
घर को गया।
इस कहानी से हमें का
सीख मिली नीचे कमेंट
कर लिखे,,,,,,,
मोल नहीं होता,ऐसे ही
एक कहानी एक पढ़ें लिखे
जवां राजा की ही, कुछ समय
पहले की बात है,किसी
नगर में ,एक राजा था।
वह अपनी प्रजा का बहुत
ध्यान रखता था।उसके
राज में वहां की जनता
बहुत खुश रहती थी।
एक दिन की बात है,
राजा अपने दरबार में
बैठा कुछ सोच रहा था।
तभी उसके मन में एक
बिचार आया,उसने अपनी
सभा में अपने मंत्री से कहा
कि हमें अपना चित्र बनवाना
है,तुम जाओ और जाकर
पूरे नगर में ऐलान कर दो,
कि जो राजा का खूबसूरत
चित्र वना कर या चित्र कारी
करके देखा ,उसे दस हजार
सोने की मोहरें दी जाएगी।
यह ऐलान सुन कर दूर
दूर से नगर के एक से एक
चित्र कार आऐ, और सभा
में उपस्थित हुए।
फिर राजा ने सभी चित्र
कारों से कहा कि हमें अपनी
सूबसूरत चित्र चाहिए। जो खूबसूरत
चित्र नहीं वना कर देगा,
उसे हम मौत के घाट
उतार देंगे।यह बात सुन
कर सभी चित्र कारों ने
अपने हाथ खड़े कर लिए।
इस लिए कि राजा में एक
कभी थी। राजा जो था वह
,,,एक पैर का लंगड़ा,,,और
,,,एक आंख का खाना था,,,
इस लिए सभी चित्र कारों ने
अपने हाथ खड़े कर लिए।
लेकिन उन सभी चित्र कारों
में एक युवा चित्र कार था।
उसने राजा से कहां हम आप का
चित्र वनाऐगे,उस युवा चित्र
कार ने राजा को अपने
सामने राजा को खड़ा किया
और राजा का चित्र बनाना
शुरू किया,उस युवा चित्र कार
को राजा का चित्र बनाते बनाते
दो तीन घंटे बीत गए।राजा
बोला कितना समय लगाओगे,
अगर हमारा चित्र गलत हुआ
तो हम तुमको मौत के घाट उतार देंगे
यह सुनकर चित्र कार हसा और
बोला,महराज हम कोशिश
कर रहे हैं,कि मैं आप का
चित्र सूबसूरत बना सके।
उसके थोड़ी देर बाद
राजा का चित्र बना कर
वह चित्र कार राजा को
देता है,उस चित्र को राजा
देखता है और जोर से हंसता है,
यह देखकर दूसरे चित्र कार
अचंभित रह जाते हैं,और
आपस में बिचार करते हैं
ऐसा का बना दिया है उस
चित्र में,जिसे देख कर राजा
जोर से हंसा,,,,
उस चित्र में उस युवा चित्र कार
ने राजा को शिकार खेलते हुए
बनाया था,राजा के साथ में
धनुष,बाड लिए हुए,और एक
आंख बंद किए हुए ,घुटनों के
बल बैठा हुआ दिखाया था।
जिससे राजा की आंख,
और राजा का पैर दोनों
चीजें छिपाती हैं।
अपना चित्र देख कर
राजा ने उस युवा को
दस हजार सोने की
मोहरें दी,और वह
युवा चित्र कार
खुखी खुखी अपने
घर को गया।
इस कहानी से हमें का
सीख मिली नीचे कमेंट
कर लिखे,,,,,,,

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