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गुरुवार, 16 जनवरी 2020

एक किसान की अधूरी कहानी

एक गांव में एक गरीब किसान
रहता था। वह दिन भर मेहनत
मजदूरी कर के किसी तरह
अपना और अपने परिवार
का भरण पोषण करता था।
वह इतना गरीब था कि उस
के तन का कपडा भी फटा
पुराना र हता था।वह अपने
लाइफ के विषय मे हमेशा
सोचता कि अब आगे हमारे
का होगा।हर तरफ उसको
अंधेरा नजर आने लगा।
उस किसान को कही पर भी
कोई मार्ग नजर नही आ
रहा था।उधर खेत मे जुताई
बुआई का समय आ गया।
पर उस किसान के पास
जुताई करने के लिए खुद
का बैल तो था,मगर उसके
पास बीज बोने के लिए पैसे
नही था।उसने अपने पडोसी
मनिक राम से कुछ पैसे कर्ज
के तौर पर लिया,और किसान
बोला जैसे ही हमारी फसल
पक कर तैयार हो जायेगी
वैसे ही हम आप का लिया
हुआ उधार पैसा हम अपनी
फसल बेच कर आप को
चुका दूगा।
और फिर दूसरे दिन उस
किसान ने सुबह उठकर
उसने अपने दोनो बैलो को
चारा खिलाया फिर थोडी
देर बाद उसने खेत मे जुताई
करने के लिए उसने अपने
बैलो को अपने साथ ले गया।
   फिर वह किसान अपने खेत
मे बैलो से जुताई करने लगा।
थोडी देर जुताई करते करते
उस किसान के हल मे कुछ
फस गया।और बैल रूक
गये,उस किसान ने हल को
उठाया और देखा,वह एक
छोटा सा घडा था,जोसोने
के सिक्कों से भरा हुआ था।
वह किसान उसे थोडी देर
देखता रह गया,मनो उसे
यकीन ही न रहा,
 फिर उसने अपने बैलो को
खोल और उस घडे को
लेकर घर वापस लौट आया।
दूसरे दिन वह किसान उसमे
से पाँच सिक्के लेकर वह
अपने नजदीकी बजार मे
एक सोनार के पास गया।
और उसने उस सिक्के को
सही दाम मे बेचा।फिर वह
घर वापस आया,उसने सबसे
पहले उधार के लिए कुछ
पैसे उन लोगो को दिया,
और बचे हुए रूपया को
उसने पहले अपनी जरुरत
की घर की चीजो को खरीदा।
और अपनी परिस्थितियों में
सु

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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