एक मां ने अपने बच्चे को,समसान घाट पर
जन्म देकर थोडी देर तक
जीवित रही ,ओर फिर वह
मर गई।
शमसान घाट पर रह रहे,
शिव दास बाबा ने उस बच्चे
की परिवरिश की,और
उसे अपने पास समशान
घाट पर मुर्दा को जलाने
के लिए अपने साथ रखा।
धीरे धीरे वह बालक
बडा हुआ, जब वह
लडका वीस शाल का
हुआ तो शिव दास बाबा
का निधन हो गया।
...अ्व वह बालक विलकुल
अकेला हो गया।
...एक दिन उसे बहुत जोरो
से भूख लगी, फिर वह
बालक खाने की तलाश में
वह समशान घाट से
निकला, और धीरे धीरे
घूमते हुए वह बालक
एक गांव के किनारे
खाने के ढाबे पर पहुंचा।
वहाँ जब वह पहुंचा तो
ढावे वाँलो ने उसे अपने
होटल पर बैठनेऔर
खाना देने से मना कर दिया।
उसकी वेश भूषा, उसका पहनावे
को देखकर ढावे वालो
ने उसे भगाना चाहा,और
उससे हाथापाई कि।
थोडीदेर तक होटल के
लोगों से और उस बखलक मे
खूब हाथापाई हुई।
...इतने मे होटल की
मालकिन वहां आ जाती
हैं और इस झगडे को
देख दोनो को अलग
करती हैं, और उस
बालक को भरपेट
खाना खिलाया।
चूंकि उसे समाज कार
कोई क्षान न ही था।
समशान। समशान
घाट पर पैदा हुआ, और
उसे न ही ठीक से हसना
आता था।
।
जन्म देकर थोडी देर तक
जीवित रही ,ओर फिर वह
मर गई।
शमसान घाट पर रह रहे,
शिव दास बाबा ने उस बच्चे
की परिवरिश की,और
उसे अपने पास समशान
घाट पर मुर्दा को जलाने
के लिए अपने साथ रखा।
धीरे धीरे वह बालक
बडा हुआ, जब वह
लडका वीस शाल का
हुआ तो शिव दास बाबा
का निधन हो गया।
...अ्व वह बालक विलकुल
अकेला हो गया।
...एक दिन उसे बहुत जोरो
से भूख लगी, फिर वह
बालक खाने की तलाश में
वह समशान घाट से
निकला, और धीरे धीरे
घूमते हुए वह बालक
एक गांव के किनारे
खाने के ढाबे पर पहुंचा।
वहाँ जब वह पहुंचा तो
ढावे वाँलो ने उसे अपने
होटल पर बैठनेऔर
खाना देने से मना कर दिया।
उसकी वेश भूषा, उसका पहनावे
को देखकर ढावे वालो
ने उसे भगाना चाहा,और
उससे हाथापाई कि।
थोडीदेर तक होटल के
लोगों से और उस बखलक मे
खूब हाथापाई हुई।
...इतने मे होटल की
मालकिन वहां आ जाती
हैं और इस झगडे को
देख दोनो को अलग
करती हैं, और उस
बालक को भरपेट
खाना खिलाया।
चूंकि उसे समाज कार
कोई क्षान न ही था।
समशान। समशान
घाट पर पैदा हुआ, और
उसे न ही ठीक से हसना
आता था।
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