राजू और राम दोनो दोस्त थे।
दोनो मे बहुत ज्यादा प्रेेम था।
कुछ भी करते तो दोनो मिल
बाट कर करते।लेकिन दो नो
मे थोड़ा सा अन्तत था।
राजू कुुुछ मनगढंत बात को
नही मानता था,पर राम उसको
मान लेता था।
एक दिन की बात है, विद्माालय
मे फुटबॉल मैच का आयो जन
किया गया था।
इस मैच में राजू और राम दोनों ने
हिस्सा लिया था।
मैच का दिन तय हुआ, दोनों
मैच में हिस्सा लेने के लिए घर
से एक साथ निकलते हैं।
घर से थोड़ी दूर निकल कर जब
दोनो रोड पर पैदल चलते है तो,
आगे चलकर एक बिल ली रास्ते
काट जाती है। यह देेेख राम
बोलता है यह तो शुभ नही है।
मै अब मैच खेलने नही जाऊँगा,
अब मै घर वापस जा रहा हूँँ।
यह कहकर राम घर वापस
चला जाता है।
पर राजू इन सब बातो को न मानकर वह मैच खेलने जाता है
और मैच जीत कर वापस आता हैं।
यह सबकुछ सुन कर राम को
बहुत पछतावा होता है।
इस लिए कहा गया है
इन सब बातो से दूर
रहो....
दोनो मे बहुत ज्यादा प्रेेम था।
कुछ भी करते तो दोनो मिल
बाट कर करते।लेकिन दो नो
मे थोड़ा सा अन्तत था।
राजू कुुुछ मनगढंत बात को
नही मानता था,पर राम उसको
मान लेता था।
एक दिन की बात है, विद्माालय
मे फुटबॉल मैच का आयो जन
किया गया था।
इस मैच में राजू और राम दोनों ने
हिस्सा लिया था।
मैच का दिन तय हुआ, दोनों
मैच में हिस्सा लेने के लिए घर
से एक साथ निकलते हैं।
घर से थोड़ी दूर निकल कर जब
दोनो रोड पर पैदल चलते है तो,
आगे चलकर एक बिल ली रास्ते
काट जाती है। यह देेेख राम
बोलता है यह तो शुभ नही है।
मै अब मैच खेलने नही जाऊँगा,
अब मै घर वापस जा रहा हूँँ।
यह कहकर राम घर वापस
चला जाता है।
पर राजू इन सब बातो को न मानकर वह मैच खेलने जाता है
और मैच जीत कर वापस आता हैं।
यह सबकुछ सुन कर राम को
बहुत पछतावा होता है।
इस लिए कहा गया है
इन सब बातो से दूर
रहो....


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