राजा हमेशा अपनी प्रजा की भलाई ही सोचता है।वह अपनी प्रजा को कभी भी लदुखी नही देखना चाहता है।
ऐसा ही एक राजा था।वह दिन भर अपने घोड़े से गांव में जाकर अपनी प्रजा की हाल पूूूछता।उसके राज में प्रजा बहुत खुश थी।वह राजा अपनी प्ररजा की भलाई के लिए अपने
खजने को प्रजा मे बटवा दियाा।
इससे प्रजा राजा से और खुश
हो गयी।
ऐसा ही एक राजा था।वह दिन भर अपने घोड़े से गांव में जाकर अपनी प्रजा की हाल पूूूछता।उसके राज में प्रजा बहुत खुश थी।वह राजा अपनी प्ररजा की भलाई के लिए अपने
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इससे प्रजा राजा से और खुश
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