एक दूर नगर मे मखन लाल
नाम का सेठ रहता था।
उसके पास किसी भी
चीज की कमी नही
थी।उसके पास धन
भैभव ,सोहरत सब
कुछ था।
लेकिन उसे मन की
शान्ति नही थी।
पडोस मे एक शन्त
जी रहते थे।सेठ उस
शन्त के पास गया,
और बोला...
हमारे पास सब कुछ
है पर मन की शान्ती
नही है...।
शन्त वहाँ से उठा
सेठ भी शन्त के पीछे
चला.....
शन्त कुटी मे जाकर
बैठ गया...और फिर
कुछ लकडिय़ों को
अपने पास रख कर
उसमे आग लगाई...
फिर उस आग मे
एक एक लकडी
बारी बारी डालने
लगा...एक के बाद
एक लकडिय़ों को
आग मे डालता..
जैसे जैसे आग मे
एक एक लकड़ी को
डालता वैसे वैसे आग
की लौ और तेज होती....
और फिर थोडी देर बाद
शन्त वहां से उठा और
फिर अपने स्थान पर
आकर बैठ गया....और
बहुत देर तक मौन बैठा
रहा कुछ बोला नही.....
यह देख कर सेेेठ
बोला ..
आप कुछ बोल नही
रहे हैं कुछ उपाय नहीं
बताया....
शन्त बोला ...
इतने देर से हम
आप को बताने की
कोशिश ही कर रहा
हूँ।....जिस
आग मे काम...क्रोध.. मोह..
माया...लोभ..यह सब
जल जायेगा ,तभी मन
को शुकून और शान्ती
मिलेेेगी.....सेठ
सब कुछ समझ गया
वह वहाँ से उठा और
अपने घर चला गया...
.........।............।।।।।
नाम का सेठ रहता था।
उसके पास किसी भी
चीज की कमी नही
थी।उसके पास धन
भैभव ,सोहरत सब
कुछ था।
लेकिन उसे मन की
शान्ति नही थी।
पडोस मे एक शन्त
जी रहते थे।सेठ उस
शन्त के पास गया,
और बोला...
हमारे पास सब कुछ
है पर मन की शान्ती
नही है...।
शन्त वहाँ से उठा
सेठ भी शन्त के पीछे
चला.....
शन्त कुटी मे जाकर
बैठ गया...और फिर
कुछ लकडिय़ों को
अपने पास रख कर
उसमे आग लगाई...
फिर उस आग मे
एक एक लकडी
बारी बारी डालने
लगा...एक के बाद
एक लकडिय़ों को
आग मे डालता..
जैसे जैसे आग मे
एक एक लकड़ी को
डालता वैसे वैसे आग
की लौ और तेज होती....
और फिर थोडी देर बाद
शन्त वहां से उठा और
फिर अपने स्थान पर
आकर बैठ गया....और
बहुत देर तक मौन बैठा
रहा कुछ बोला नही.....
यह देख कर सेेेठ
बोला ..
आप कुछ बोल नही
रहे हैं कुछ उपाय नहीं
बताया....
शन्त बोला ...
इतने देर से हम
आप को बताने की
कोशिश ही कर रहा
हूँ।....जिस
आग मे काम...क्रोध.. मोह..
माया...लोभ..यह सब
जल जायेगा ,तभी मन
को शुकून और शान्ती
मिलेेेगी.....सेठ
सब कुछ समझ गया
वह वहाँ से उठा और
अपने घर चला गया...
.........।............।।।।।



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