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रविवार, 21 अप्रैल 2019

दो दोस्त

  • बात उन दिनो की थी।

परीक्षा का समय था।
गरमी का मौसम था।
बाहर दूर देहात गांव मे सेन्टर
गया हुआ था।खूूूब चिलचिलाती गर्मी
पड रही थी।कही छाया
नही था।दूर एक पेेे ड था ।
उसी पेड केे नीचे दोनो
दोस्त जाकर बैैै ठ गये।
दोनो की सोच अलग थी।
चूंकि पेेे ड छोटा था ,
इसलिए पेेे ड मे छाया
थोड़ी सी कम थी।एक
दोस्त ने कहा......
    यह पेड हमे कुछ नहीं
दे सकता हैै।
दूसरे दोस्त ने कहा
हमे यह पेड बहुत कुछ
दिया......
पहला इस उमस भरी गर्मी
मे बैठने के लिए इसने
हमे छाया दी...चूूंकि
पेड अभी छोटा है,
इसलिए यह हमको
अभी कुछ नहीं दे
सकता हैं.......
अपनी सोच हमेशा बुलंद
होनी चाहिए.....
सोच कभी छोटी नही
रखनी चाहिए..........
.............................।...

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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