एक लडका ,जो स्टेशन पर पानी
की बोतल बेेेचता था। पानी की
बोतल बेच कर अपना और अपने
परिवार का पालन करता था।
वह रोज शुबह उठ कर नहा कर
रोटी खाकर ,और हाथ मे पानी
की बोतल लेेे कर शुबह शुुुबह ही
स्टेशन पहुुंच जाता था।
एक दिन.....
जब वह पानी की बोतले
बेच रहा था तब एक सेठ ने उसे बुलाया और बोला.....
एक बोतल कितने की है....
लडका कुछ न बोला।
मुस्कुरा कर आगे निकल गया।
सेठ जी के बगल बैठा दूूूसरा
आदमी लडके को देख रहा था।
उस आदमी ने सोचा लडका
मुस्कुरा कर आगे निकल
गया... आखिर क्यों....
इसका मतलब कुुुछ तो है...
उस आदमी से रहा नही गया,
और वह वहाँँ से उठ कर
उस लडके के पास गया
और पूछा......
बेटा तुम वहां से मुस्कुरा कर
आगे निकल गयेे ......
इसका मतलव....
अरे भाई ...
इसका मतलब यह है कि ...
सेठ जी को प्यास लगी
ही नही थी...वह तो केवल
पानी के बोतल का दाम
पूछ रहे थे........
जिसको प्यास लगी
होती है वह पानी
पहले पीताा है दाम
बाद मे पूछता हैं।
इसी लिए हम आगे
निकल आऐ........
.।।.................।....................।।
.
की बोतल बेेेचता था। पानी की
बोतल बेच कर अपना और अपने
परिवार का पालन करता था।
वह रोज शुबह उठ कर नहा कर
रोटी खाकर ,और हाथ मे पानी
की बोतल लेेे कर शुबह शुुुबह ही
स्टेशन पहुुंच जाता था।
एक दिन.....
जब वह पानी की बोतले
बेच रहा था तब एक सेठ ने उसे बुलाया और बोला.....
एक बोतल कितने की है....
लडका कुछ न बोला।
मुस्कुरा कर आगे निकल गया।
सेठ जी के बगल बैठा दूूूसरा
आदमी लडके को देख रहा था।
उस आदमी ने सोचा लडका
मुस्कुरा कर आगे निकल
गया... आखिर क्यों....
इसका मतलब कुुुछ तो है...
उस आदमी से रहा नही गया,
और वह वहाँँ से उठ कर
उस लडके के पास गया
और पूछा......
बेटा तुम वहां से मुस्कुरा कर
आगे निकल गयेे ......
इसका मतलव....
अरे भाई ...
इसका मतलब यह है कि ...
सेठ जी को प्यास लगी
ही नही थी...वह तो केवल
पानी के बोतल का दाम
पूछ रहे थे........
जिसको प्यास लगी
होती है वह पानी
पहले पीताा है दाम
बाद मे पूछता हैं।
इसी लिए हम आगे
निकल आऐ........
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