एक कौवा था।
वह बहुत प्यासा था।
उसने पानी की तलाश की।
लेकिन कहीं पानी दिखाई नहीं पडा।
वह बडा दुुुखी था।
थोड़ी देर में एक घडा देखा।
जिसमे थोडा पानी था।
उसने घडे मे चोच डाली।
लेकिन पानी नही पाया।
उसकी चोच पानी तक नही
पहुंची।
उसने एक उपाय सोचा।
उसने कंकड के टुकड़े को,
उसमे घडे मे एक एक करके डाला।
तब धीरे धीरे कर पानी ऊपर आ गया।
तब कौवे ने पानी पी लिया...
और अपनी प्यास बुझा ली....
कहानी से हमे यह सीख मिली...
कभी हार नही मानना चाहिए....
............
वह बहुत प्यासा था।
उसने पानी की तलाश की।
लेकिन कहीं पानी दिखाई नहीं पडा।
वह बडा दुुुखी था।
थोड़ी देर में एक घडा देखा।
जिसमे थोडा पानी था।
उसने घडे मे चोच डाली।
लेकिन पानी नही पाया।
उसकी चोच पानी तक नही
पहुंची।
उसने एक उपाय सोचा।
उसने कंकड के टुकड़े को,
उसमे घडे मे एक एक करके डाला।
तब धीरे धीरे कर पानी ऊपर आ गया।
तब कौवे ने पानी पी लिया...
और अपनी प्यास बुझा ली....
कहानी से हमे यह सीख मिली...
कभी हार नही मानना चाहिए....
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