एक गांव में जय नाम का
गरीब परिवार का बालक
रहता था। वह कक्षा आठ
तक प ढा हुआ था। एक
दिन उसनेे किसी कंपनी
मे आवेदन किया। और
इंटरव्यू देने गया।वहाँ पर
उससे पूछाा गया कि बेटा
तुम्ह्हारे पास मेल आईडी प्रूफ
है , उसने कहा नही। तव
उसने कहा कि तुम नौकरी के
योग नही हो।
उस समय उसके जेब मे
केवल 100₹ था। वह वहाँ
से चला आया।और घर पर
बैठ कर यह सोचने लगा कि
अब हम करे।
फिर उसने बजार
जा कर 100₹ का सेब
खरीदा,और उसे घर घर
ले जाकर बेचा। उसे 60₹
का फायदा हुआ।
फिर वह बजार
गया फिर उसने सेब
खरीदा और उसे बेचा।
खरीदा बेचा, खरीदा बेचा।
ऐसा करते। करते एक
दिन वह बहुत बडा आदमी
बन गया।
इसी लिए कहा गया है।
मेहनत करने वालो की
कभी। हार नही होती।...
अब वह बालक बहुत ज्यादा
बडा आदमी बन चुका था।
गरीब परिवार का बालक
रहता था। वह कक्षा आठ
तक प ढा हुआ था। एक
दिन उसनेे किसी कंपनी
मे आवेदन किया। और
इंटरव्यू देने गया।वहाँ पर
उससे पूछाा गया कि बेटा
तुम्ह्हारे पास मेल आईडी प्रूफ
है , उसने कहा नही। तव
उसने कहा कि तुम नौकरी के
योग नही हो।
उस समय उसके जेब मे
केवल 100₹ था। वह वहाँ
से चला आया।और घर पर
बैठ कर यह सोचने लगा कि
अब हम करे।
फिर उसने बजार
जा कर 100₹ का सेब
खरीदा,और उसे घर घर
ले जाकर बेचा। उसे 60₹
का फायदा हुआ।
फिर वह बजार
गया फिर उसने सेब
खरीदा और उसे बेचा।
खरीदा बेचा, खरीदा बेचा।
ऐसा करते। करते एक
दिन वह बहुत बडा आदमी
बन गया।
इसी लिए कहा गया है।
मेहनत करने वालो की
कभी। हार नही होती।...
अब वह बालक बहुत ज्यादा
बडा आदमी बन चुका था।
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