क ई बार करता हैं कि
अपने जिंदगी से हार मान
लू मगर एक बार फिर मन
मे सोचता हूूँ कि अभी तो
बहुत कुछ बाकी हैं।
मन कितना चंंंच ल
होता है।कभी कुछ
सोचता है ,सोचा हुआ
कुछ काम पूरा होता है
तो कुुु छ वैसे ही अधूरा
सा पडा रहता हैं।कहते
हैं जिन्दगी से कभी हार नही मान ना चाहिए।
सघर्ष करना चाहिए,
लडना चाहिए,
मन की उदासी
छोड़ कर,उस बिन्द्दू
पर फोकस करना चाहिए।
वैसे तो जिंदगी में
उतार चढ़ाव लगा
रहता हैं।कभी शुख
का पलडा भारी होता
है, तो कभी दुःख का।
हार मानना बुजदिली ही
नही कायरता भी है...
इसीलिए तो कहते हैंं....
सघर्ष करो और आगे बढो....
कयोंकि... डर के आगे जीत हैं।
अपने जिंदगी से हार मान
लू मगर एक बार फिर मन
मे सोचता हूूँ कि अभी तो
बहुत कुछ बाकी हैं।
मन कितना चंंंच ल
होता है।कभी कुछ
सोचता है ,सोचा हुआ
कुछ काम पूरा होता है
तो कुुु छ वैसे ही अधूरा
सा पडा रहता हैं।कहते
हैं जिन्दगी से कभी हार नही मान ना चाहिए।
सघर्ष करना चाहिए,
लडना चाहिए,
मन की उदासी
छोड़ कर,उस बिन्द्दू
पर फोकस करना चाहिए।
वैसे तो जिंदगी में
उतार चढ़ाव लगा
रहता हैं।कभी शुख
का पलडा भारी होता
है, तो कभी दुःख का।
हार मानना बुजदिली ही
नही कायरता भी है...
इसीलिए तो कहते हैंं....
सघर्ष करो और आगे बढो....
कयोंकि... डर के आगे जीत हैं।

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