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शनिवार, 1 जून 2024

सच्चा प्रेम

एक छोटे से गांव में राधा मोहन नाम के तो बच्चे रहते थे दोनों में आपस में बहुत पेट है दोनों साथ उठते साथ करते साथ खेलते हैं साथ पढ़ने जाते  !!

देखते देखते धीरे-धीरे दोनों बच्चे जवां होंगे .....

और फिर अचानक गांव में एक दिन जोरों की बाढ़ आ गई लोग गांव से बाहर भागने लगे अपनी जान बचाकर सबसे अच्छी दास्तान पर जाने के लिए राधा और मोहन में सुरक्षित स्थान पर गांव से निकाल कर बाहर जाने के लिए सभी रास्ते में अचानक राधा का पैर फिसल जाता है और राधा पानी में गिर जाती है !!

  राधा को पानी में गिरते देखा मोहन अपनी जान की परवाह नहीं ना किया करते हुए राधा को बचाने के लिए पानी में कूद जाता है अनुराधा को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल देता है राधा को अपने कंधे पर उठाकर पानी से बाहर आता है !!

मेरे गांव वाले मोहन का बहादुर बच्चा करने लगते हैं राधा और मोहब्बत है दोनों एक दूसरे के साथ रहने का करते हैं और खुशी-खुशी साथ रहने लगते हैं !!

  शिक्षा पर आधारित छोटी कहानी प्रेम कथा

शुक्रवार, 31 मई 2024

नेकी और ईमानदारी

एक बार की बात है एक गांव में गुड़िया रहा करते थे एक दिन में बुढ़िया अपने साथ घर में रखे हुए अपने जेवरात को एक थैली में रखकर बाजार ले जाती है बचने के लिए और बुढ़िया से एक आधुनि हो जाती है बाजार पहुंचते पहुंचते बुढ़िया उसे थैली को कहीं गिरा देती है  !!!

अब बढ़िया समान कोई बहुत खोजवीर करती है .....

मगर उथैला उसे बुढ़िया को नहीं मिल पाता है और बढ़िया घर वापस आ जाती है उसके कुछ समय बाद गांव में एक लड़का आता है.....

और उसे लड़के को बुढ़िया की सारी बातें किसी और के द्वारा मालूम पड़ती है तो वह लड़का उसे समान की खोज के लिए बाजार की तरफ निकल पड़ता है और बहुत खोजबीन करने के बाद उसे लड़के को बुढ़िया का सामान मिल जाता है और उसे वह कॉल कर देखता है उसमें काफी सारी जेवरात भरे हुए थे तब वह सामान लाकर बुढ़िया को दे देता है बढ़िया उसे लड़के को धन्यवाद देता है बहुत-बहुत दुआएं देती है लड़के ने कहा मैंने तो अपना धर्म निभाया है बुढ़िया और सामान को देखकर बहुत खुश होती है और उसे बच्चों को बहुत दुआएं देती है इस कहानी से मैं यह प्रेरणा मिलती है की लड़की और ईमानदारी आज भी जीवित है !!!

धैर्य का संदेश

एक समय की बात है एक गांव में बुजुर्ग शिक्षक रहा करते थे !

उनके पास एक अद्भुत बगीचा था !!

उसे बगीचे में बुजुर्ग शिक्षक अपने प्राकृतिक सौंदर्य का पूरा आनंद लिया करते थे !

और फिर एक दिन अचानक......

  उसे बाग में गलती से एक छोटा सा बाला के घुस गया और फलों को तोड़ने लगा !!

तभी वहां बुजुर्ग शिक्षा का आ जाते हैं और उसे बालक को पकड़ लेते हैं और उसे सच्चाई का पाठ पढ़ाते हैं !!

वह बालक सच्चाई के पार सुनकर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगता है और दूसरे दिन अपना नाम स्कूल में लिख कर पढ़ने चले जाता है !!

   इस तरह बुजुर्ग शिक्षक ने धर्म का संदेश दिया और गांव में एकता प्रेम की भावनाओं को जगाया !!!

उसे बुजुर्ग शिक्षक ने पूरे गांव में धैर्य का संदेश दिया एक दूसरे को साथ रहने का भाईचारा बना के रखने क का संदेश दिया आज पूरे गांव में धैर्य का संदेश पहुंच चुका है लोग एक दूसरे का साथ देते हैं किसी भी आपत्ती जैसी स्थिति आने पर लोग एक दूसरे के साथ खड़े होकर अध्यक्ष करना मिलकर साथ चलते हैं आज बुजुर्ग शिक्षा के बदौलत पूरा गांव चाय का पाठ पढ़ चुका है और उसे गांव में शिक्षक ने एक अलग ही अलग जगह दी है..... छोटी कहानी बच्चों की कहानी मोटिवेशनल कहानी शिक्षा के ऊपर आधारित कहानी........

गुरुवार, 30 मई 2024

एक्सपर्ट आदमी

 कुछ समय पहले की बात है एक जूता बनाने वाली कंपनी ने अपने एक कर्मचारी को एक गांव में अपने कंपनी का जूता बचने के लिए भेजा  

वह कर्मचारी कंपनी से बाहर निकाल और गाड़ी पकड़ गाड़ी से डायरेक्ट वहां उसे गांव में जाता है और वहां क्या देखा है कि वहां ना तो कोई आदमी ना ही कोई औरत ना ही कोई बच्चा अपने पैरों में नहीं जूता पहन 

यह नजारा देख उसे आदमी का सर चकरा जाता है तो तुरंत अपने बॉस के पास फोन लगता है सर मेरा टिकट वापस कर दीजिए मथुरा तो वापस आना चाहता हूं बस पूछता है क्यों फिर तुम वापस आना चाहते हो तो वह कर्मचारी बोलता है सर यहां तो ना ही कोई आदमी जूता पहना है ना है चप्पल पहनता है ना यहां की औरतें ना यहां के बच्चे इसलिए मैं यहां से वापस आना चाहता हूं बस में उसे कर्मचारी का टिकट वापस कर दिया और वापस कंपनी में लौट गया 

तीसरे दिन उसे कंपनी के पास में फिर अपने कर्मचारियों को वहां भेजता है और उसे बोलना है इस गांव में तुम्हें जूते भेजना है कैसे बचना है यह मैं नहीं जानता पर तुमको भेजना है तो कर्मचारी कंपनी निकलता है और गाड़ी पकड़ कर उसे गांव में पहुंचता है वहां देखा है आदमी औरत बच्चे ना तो जूते पहनते ना एक चप्पल पहनते हैं तो वह कर्मचारी अपने पास के पास फोन लगता है मलिक समझता है कि हो सकता है शायद यह भी कर्मचारी मेरा वापस आना चाहता हूं लेकिन ऐसा नहीं हुआ उसने बॉस को फोन किया सर कंपनी में जितने भी जुटे हैं सारे जूते भेज दीजिए मैं सारे जूते की हासिल कर दूंगा सारे जूते हरवा दूंगा बस का तो सभी चकरा गया वह सोचा अभी यह कैसे हो गया उसे कर्मचारियों ने रियल में बोला नहीं सर मुझ पर विश्वास कीजिए मैं आपकी कंपनी का जितना भी जुटा है इस गांव में लिखवा दूंगा उसे कर्मचारियों ने वैसा ही किया जैसा बोला था उसने उसे कंपनी का सारा जूता उसे गांव में भेज दिया मालिक बहुत खुश हुआ और उसे कर्मचारियों को मैनेजर की पोस्ट पर रख लिया और अच्छी खासी सैलरी देने लगा इसे कहते हैं टैलेंट और स्पॉट आदमी जिंदगी में कभी हार नहीं मानना चाहिए संघर्ष ही जीवन है लड़ जाना चाहिए जब तक संघर्ष नहीं करोगे तब तक आपको सफलता नहीं मिलेगी तो एक्सपर्ट आदमी था इसलिए उसने हार नहीं मानी चैलेंज को स्वीकार किया उसे गांव में हर व्यक्ति हर लोगों से हर माता हर बहनों से मुलाकात की और उसे जूते और चप्पलों को भेज दिया इसे कहते हैं इस बढ़ा दिए

मंगलवार, 28 मई 2024

भैंस की चतुराई

 एक समय की बात है ...

भैंस और शहर में अचानक दोस्ती हो गई !

दोस्ती इतनी गहरी थी कि दोनों एक दूसरे गुना रह नहीं पाते थे !!

1 दिन से को बहुत जोरों से भूख लगी और इधर-उधर अपने भोजन की तलाश में घूमता रहा मगर दिन भर में उसे ना तक कोई शिकार दिखाई पड़ा ना ही उसे किसी प्रकार की कोई भजन मिला शेर के बहुत तेज भूख लगी हुई थी वह परेशान था जब करें तो क्या करें और उसके मन में एक ख्याल आया !!

क्यों ना आज हम इस भैंस को ही अपना निवाला बनाने चलो कुछ आईडिया लगते हैं कुछ दिमाग लगाते हैं इसे कहीं सुनसान का जगह में लेकर जाते हैं बहला फुसला कर वहीं पर इस भैंस को मार कर अपना भोजन बना लेंगे और वही खा लेंगे ऐसे में भैंस को भी मालूम नहीं पड़ेगा कि हम लोग कहां किधर जा रहे हैं लेकिन भैंस भी बहुत चतुर थी !!

भैंस ने अपने साथियों से बोल रखा था हो ना हो शेर किसी न किसी दिन हमारे साथ गलत व्यवहार अवश्य करेगा इसलिए हमें अपने आप से सावधान रहना चाहिए उसने अभी अपने सभी साथियों को बोला कि जैसे मैं जोर से एक आवाज लगाऊंगी वैसे चारों तरफ से इस शहर को घेर लेना और जैसे तैसे जाने मत देना क्योंकि शेर किसी का होता नहीं है दोस्ती तो की है मगर निभाता तो पड़ेगा लेकिन ऐसा बुरा वक्त कभी ना आए इसलिए हम आप लोगों से यह सवाल जवाब कर रहे हैं और फिर एक दिन शेर ने वैसा ही किया जैसा भैंस में सोच रखा था वह भैंस को एक आदमी ले जाता जैसे ही उसे पर हमला किया वैसे ही भैंस जोर-जोर से चिल्लाया और फिर क्या था देखते ही देखते पैसों का झुंड चारों तरफ से उसे शेर को घेर लिया शेर भाग नहीं सकता था चारों तरफ से भैंसों न !!!!!!

उसे शेर पर हमला बोल दिया शेर को बहुत बुरी तरीके से मारा उसे बहुत ढेर सारी छोटे आ गई चलने फिरने में असमर्थ हो गया शेर किसी तरह की कैसे बेसन के झुंड से निकालकर बहुत तेजी के साथ भाग और फिर हो कभी भैंसों के पास वापस नहीं आया क्योंकि उसे सबक मिल चुका था और समझ गया था की गद्दारी हमने की है इसलिए मुझे सजा है मिलने तो थी मुझे सजा भी मिल गई अब ऐसा व्यवहार में किसी के साथ कभी नहीं करूंगा बस खुशी-खुशी अपने दोस्तों के साथ जंगल में रहने लगा और शेर और जंगल को छोड़कर कहीं और चला गया!!

# जंगल की कहानी शेर और भैंस की कहानी छोटी कहानी बड़ी कहानी बच्चों की कहानी शिक्षा पर आधारित कहानी मोटिवेशनल कहानी ज्ञान की कहानी याद रखने वाली कहानी

सोमवार, 27 मई 2024

दुष्ट राजा भैरव सिंह

 बहुत समय पहले की बात है ...

वैशाली पूरा नामक एक नगर हुआ करता था जहां का राजा भैरव सिंह था भैरव सिंह अपने दोस्तों के लिए वैशाली पूरा नामक गांव में बहुत प्रसिद्ध था वह लोगों पर अत्याचार इतना अधिक करता था कि लोग उसे डरे शहर में से ही रहेगा रहते थे कहीं ऐसा ना हो भैरों सिंह नामक राजा हमारे परिवार को नुकसान पहुंचा दे इसलिए लोग उसे यादव से नमस्कार किया करते थे वह इतना अत्याचारी था कि वहां रह रहे गरीब लोगों को अनाज लूट लिया करता था पहनने के लिए वस्त्र बराबर नहीं दिया जाता था उसके राज में प्रजा बहुत प्रताड़ित किया जाता था सजा सुखी नहीं थी स्कूल भी नहीं थे बच्चों के स्कूल भी नहीं पढ़ने दिया जाता था महिलाओं को शिक्षित रखा जाता था महिलाओं को ठंड रखने के लिए बराबर कपड़े नहीं दिए जाते थे वह इतना ज्यादा अत्याचारी था आपने उसे घबराए रहते थे !!!

वैशाली पूरा नामक गांव से चंद किलोमीटर की दूरी पर राजा दयानंद से का किला हुआ करता था जहां पर दयानंद के शासनकाल में प्रजावाणी सुख और संपन्न थी वहां किसी भी गरीब को ना तो सताया जात था ना ही किसी प्रकार का कोई अत्याचार उन पर किया जाता था बल्कि उनकी सहायता की जाती थी लोगों को पढ़ने के लिए स्कूल महिला पढ़ने के लिए वस्त्र खाने के लिए अच्छे-अच्छे पकवान दिए जाते थे राजा की तरफ से नए-नए तरह के कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते थे जिसमें लोगों को सम्मानित भी किया जाता था भूत राजा भैरव सिंह की कहानी दयानंद को भी मालूम पड़ी और फिर एक दिन दयानंद ने ऐसी योजना बनाई...

रात के 12:00 का समय था राजा दयानंद ने दोस्त भैरव सिंह के राज में हमला कर दिया और वह संभाले में राजा भैरव सिंह बुरी तरह प्राप्त हुआ राजा दयानंद ने भैरव सिंह को गिरफ्तार कर कारागार में डाल दिया और राजा भैरव सिंह का पूरा शासन काल राजा दयानंद ने अपने हाथों में ले लिया तब से धीरे-धीरे राजा दयानंद ने जगह-जगह लोगों तक इकट्ठा कर यह आश्वासन दिया कि आज के बाद आप लोगों में किसी तरह का कोई अत्याचार है जुल्म नहीं किया जाएगा यहां के शासन सत्ता हमने अपने हाथ में ले ली की है जिस तरह हमारे शासनकाल में हमारे यहां किसी प्रकार का कोई समस्याएं नहीं उत्तम होती किसी गरीब किसी मजलूम पर कुर्सी प्रकार का कोई अत्याचार नहीं किया जाता ठीक उसी तरीके से यहां पर भी आप लोगों के खिलाफ किसी तरीके का कोई भी अत्याचार या दुर्व्यवहार नहीं किया जाएगा आपकी जो भी समस्याएं हमारे महामंत्री से आकर आप अपनी समस्याओं को कह सकते हैं उसे पर अमल किया जाएगा उसे पर सुनवाई होगी और आपकी पूरी हिफाजत की जिम्मेदारी हमारी है रहना खाना शिक्षा किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होगी और तब पढ़ने के लिए पूरी तरीके से कपड़े भी दिए जाएंगे यह हमारे राज्य में जनता किसी प्रकार की कोई प्रताड़ना नहीं होगा ना ही कोई पता नहीं करेगा अगर ऐसा कोई करता है तो उसे सजा मौत दी जाएगी राजा के प्रमाण सुनकर वहां के जनता बहुत उत्साहित हुई राजा की जय जयकार करने लगी राजा दयानंद की जय हो राजा दयानंद की जय हो राजा दयानंद की जय हो उनकी जय जयकार से पूरा महल गोंड उठा वहां के जनता खुशहाल और संपन्न है किसी प्रकार की कोई परेशानियां वहां किसी भी जनता को नहीं होती है रहने के लिए घर खाने के लिए कपड़े पहनने के लिए कपड़े मिलते हैं खाने के लिए भोजन मिलता है बच्चों को स्कूल पास ही में खोल दिया गया है बच्चे स्कूल भी जाते हैं महिलाओं को पढ़ने की पूजा आजादी दी गई आज वहां के लोग सुखी और संपन्न है दोस्त राजा ऑल रिकॉर्ड कोठरी में बंद है ना तो उसे कोई देखने जाता है ना उससे कोई छुड़ाने जाता है उसकी आखिरी सांसें चल रही है पता नहीं कब तक उसकी आरती चलती रहेगी उधर राजा दयानंद की पूरे समाज में पूरे राज्य में जय जयकार होती है राजा होता है ऐसा राजा दयानंद जैसा...

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मंगल की चतुराई

 गर्मियों का समय था रात के करीब 12 बज रहे थे चारों तरफ सन्नाटा था अंधेरी रात थी लोग बाहर गहरी नींद में सो रहे थे तभी कुछ लुटेरे गांव में घुस जाते हैं और मंगल के घर दवा बोल देते हैं !!

मंगल भी डाकू से कमजोर नहीं था वह हॉस्पिटल था साथ फिर करना जवान था काफी देर अपने शरीर बना रखा था इसलिए जैसे ही डाकू ने मंगल के घर पर हमला किया मंगलसूत्र हो गया और अपनी चतुराई से वह दरवाजे के पीछे छुप गया जैसे दरवाजा तोड़कर मंगल के घर डाकू प्रवेश करते हैं वैसे ही मंगल एक-एक डाकू अपनी बाजू वाली कोठरी में बंद कर देता है जोर से आवाज लगता है फोटो उठो डाकू आया खास पड़ोस के लोग मंगल की आवाज सुनकर आप मिलने डंडे लेकर सारी तरफ से मंगल के घर को भेज देते हैं !!

   उधर डाकू की छुट्टी-वटी गुम हो जाती है वैसे मंगल में एक डाकुओं को पकड़ कर अपने का कोठरी में बंद कर दिया था बाहर से सीट कितनी लगाकर डाबरे को ब्लॉक कर दिया था गांव के लोग सभी इकट्ठे हुए अरुण डाकू खबर पुलिस बुलाकर उनके हवाले कर दिया यह देखकर गांव वाले बहुत खुशी चलो कम से कम हमारे गांव में कोई ऐसा नौजवान है जो अकेले हैं चार से डाकुओं का भारी पड़ा और उन्हें पकड़ कर अपने घरों में बंद कर दिया हमें मंगल के साथ देना चाहिए मंगलसूत्र में इसलिए !!

    इस तरह मंगल को चतुराई कमाई गांव वाले खुश हो गए और पुलिस बुलाकर उनसे डाकू पकड़ा दिया तब से दोबारा आज तक डाकुओं की हिम्मत नहीं पड़ी कि उसे गांव में जाकर लोट कर सके आज भी होगा सुरक्षित मंगल आज भी है जब तक मंगल जैसे नौजवान इस पृथ्वी पर रहेंगे तब तक डाकू कम तक ऐसे ही होता रहेगा !!

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जंगली भेड़िया

 मढ़पुर नमक गांव में रोज और होता था जागो जागो भेड़िया आया जागो जागो भेड़िया आया गांव के लोग बहुत परेशान ना करते थे भेड़िया चुपके से आता किसी की बकरी किसी की मुर्गी किसी के गाय का बछड़ा छोटा उठा ले जाया करता था और उसे मार कर खा लिय !!!

गांव के लोग वीडियो से बहुत परेशान थे रात भर गांव वाले सो नहीं पाते थे भेड़िया इतना आतंक मचा रखा था हर घर में परेशानियां थी हर घर के लोग भेड़िए के आतंक से डरे सामने से रहते थे कि कब किधर से भेड़िया आकर हमारे ऊपर हमला न कर दे फिर एक दिन गांव वालों ने बैठकर विचार विमर्श किया इस वीडियो को किस तरह काबू में किया जाए ताकि भेड़िया भी पड़ जाए और हम लोग सुरक्षित भी रहे फिर उन्होंने एक बड़ा सजल बनाया चारों तरफ जाल हो लगा दिया गया एक साइड में रास्ते को खोल दिया गया बीच में बकरी को छोटे से बांध दिया गया चारों तरफ गांव वालों ने लाठी डंडा और वीडियो भी औजार था लेकर चुपके से बैठ गए तभी उधर से रात के करीब 1201 के बीच में भेड़िया निकाल कर आया और उसे बकरी के बच्चे पर हमला कर दिया जैसे ही वीडियो में बकरी के बच्चे का हमला किया वैसे ही वीडियो तरीके से लपेट सके और भेड़िया निकालने की बहुत कोशिश की पर भेड़िया और जल को तोड़कर निकल नहीं सकता गांव वालों ने उसे भेड़िया को पकड़ कर सरकार के हवाले कर दिया तब से गांव में अपने आप को सुरक्षित महसूस करने के लिए और जंगली भेड़िया पकड़ा गय !!

गांव वालों की सूरज गुर्जर चलती थी जंगली भेड़िया पकड़ा गया अब गांव वाले अपने आप को सुरक्षित महसूस करने लगी और खुशी-खुशी गांव के लोग चैन की नहीं सोने लगे हैं किसी को कहते हैं एकदम करती है गांव वालों का दिन अंक जंगली भेड़िए तो पड़ जाना कितना महत्व है !!

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शनिवार, 25 मई 2024

गुमनाम आदमी एक अनोखी कहानी


 आदि आधी रात का समय था सन्नाटा छाया हुआ था राम भरोसे घर के बाहर अपने पलंग पर पेड़ के नीचे आराम से सो रही थी गर्मियों का मौसम था सन्नाटा छाया हुआ था तभी बाजू से छम छम की आवाज सुनाई पड़ती है राम भरोसे उठकर खड़े हो जाते हैं कहीं पर दिखाई नहीं देता अब तो राम भरोसे के पसीने पसीने छोटा लगे और डर के मरे उनकी हालत खराब हो गई सर से लेकर पैर तक पसीने पसीने होंगे बैठ गया कि हो ना हो तो किसी भूत आत्मा ही है जो हमें डरा रही है रात भर राम भरोसे सो ना सके अलग कर बैठे बैठे पूरी रात बता दी सुबह हुई चारों के बीच में बैठे चर्चा होने लगी आज हमारे साथ ही ऐसी ऐसी घटना एन कुछ लोगों मैं तो राम भरोसे का मजाक उड़ा कुछ नहीं कहा नहीं यह सही है भूत होता है आत्मा होती है हो सकता है तुम्हें डरा रही है अब तो राम भरोसे और भी परेशान दिखाई देना और फिर दूसरे दिन.....

   राम भरोसे फिर उसे पेड़ के नीचे लेटे हुए थे तभी उन्हें जोर की आवाज सुनाई दे अरे भाई राम भरोसे तुम इतनी गहरी नींद में सो रहे हो उठो उठो जल्दी उठो इतने में राम भरोसे की नींद मिलती है और चारों तरफ देखते हैं को दिखाई नहीं देता अब तो भाई इनकी और हालत बेकार होगी

    तीसरा दिन राम भरोसे अपने चारपाई पर लेटे हुए थ अभी वह पेड़ की तरफ देखते उसमें उन्होंने एक डोरी बंधी हुई दिखाई दी राम भरोसा को समझने में देर नहीं लगी हो ना हो किसी गांव की सेक्स नहीं हमें डराने की कोशिश की है आओ चले इसका पता लगे तब राम भरोसे हाथ में छड़ी और लालटेन लेकर इस डोरी के सहारे धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ते हैं जहां डोरी खत्म होने की होती है गांव का एक लड़का जिसका नाम रहा था वह अपनी पलंग पर लेटा हुआ सो रहा उसके हाथ में डोरी बनी हुई थी वही राघव नाम का लड़का है मुझे डरा रहा था गुमनाम आदमी बनकर लेकिन मैं डरा नहीं मैंने हिम्मत से कम लिया और उसके नाम आदमी को अंतत पकड़ने में कामयाब रहे .....

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मित्रता एक मिसाल

 गांव में राजू नाम का एक लड़का था अपने आप को हमेशा अकेला महसूस किया करता था किसी के पड़ोस में देव नाम का भी एक लड़का था वह भी अपने आप को अकेला महसूस किया करता है एक दिन राजू ने अपने दिमाग में बिठाया कि आज मैं देवर से मिलकर पूछता हूं क्या हमारे साथ खेलेंगे या दोस्ती करेगा और देव के पास जाता है और पूछता है अरे भाई मैं कई दिनों से देख रहा हूं तुम बिल्कुल अकेला महसूस कर रहे हो क्या तुम हमारे साथ खेलोगे देव तैयार हुआ हंसी-खुशी दोनों खेलने लगे !!!

   एक दिन गांव में पाठशाला में दोनों ने अपना नाम लिख लिय लिया राजू हरदेव दोनों साथ-साथ पढ़ने लगी दोनों साथ उसके साथ बैठने साथ खेलते हैं दोनों एक दूसरे के साथ कभी नहीं छोड़ते देखते देखते धीरे-धीरे दोनों एक क्लास से दूसरी क्लास दूसरी क्लास में अव्वल आते थे हर प्रत्यय सफल प्रभाव में भी फर्स्ट ईयर आया करते थे !!

गांव में राजू और देव की दोस्ती एक विशाल थी गांव के लोग यह बोलते थे जितने गहरी दोस्ती राजू और डी में अपना गहरा रिश्ता शायद बहन भाई भाई में नहीं यह दोनों गांव की एक विशाल है दोनों एक न एक दिन इस गांव में अपना नाम और इस गांव का नाम और रोशन करेंगे और फिर एक दिन देखते देखते 12 13 क्लास की पढ़ाई पूरी कर ली और गांव में एक दिन टीचर का जवाब आया उन्होंने राज्यों और देव ने दोनों मिलकर की पूजा के लिए अप्लाई किया क्योंकि हमेशा से ऊपर हटाया करते थे पढ़ने में तेज थे इसलिए उन्हें किसी प्रकार की दिक्कतें नहीं हुई एक समय आया परीक्षा हुई परीक्षा में दोनों ट्रेड हुए और उन्हें गांव के पड़ोस में राजू और देव दोनों को मास्टर की जॉब मिल गई अब गांव वालों को अच्छी शिक्षा देते अच्छी पढ़ाई पर ध्यान दिलाते साफ सफाई व्यवस्थाओं पर ध्यान दिलाते गंदगी कहीं ना यह भी उन सारी जानकारियां गांव वालों को दिया करते थे राजू और दो गांव की दोनों एक विशाल बनाकर है आज भी राजू और देव के लोग गुड़गांव जाया करते हैं लड़का होता है ऐसा राजू और देव जैसा श्री राधे गांव को एक नई दिशा दिए एक नया एहसास दिलाया की किस तरह से आगे बढ़ा जाता है मेहनत किस तरह से की जाती है राजू और देव से बेहतर होगा जा सकता है दोनों गांव के अनुसार आज भी लोग राजू के गुड़गांव जाकर गांव के इस तरफ साफ सफाई स्वच्छता के विषय में जानकारियां दी कि आज पूरा का पूरा गांव सच चारों तरफ पेड़ पौधे हरियाली नजर आती है कहीं किसी प्रकार की नजर नहीं आती गांव के बच्चे के पढ़ने देते हैं राजू और देव जैसा

शुक्रवार, 24 मई 2024

कंजूस औरत

बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में राधा नाम की एक बुढ़िया रहती थी उसके आगे पीछे कोई नहीं था उसके ना कोई बेटा था ना ही कोई बेटी थी वह अकेली रहती थी घर में रहकर अकेले खाना पकाती अकेली खाती किसी और से कोई मतलब नहीं रखती थी जो भी पैसा कमाते हैं वह उसे पैसे को बड़े हिफाजत के साथ अपने बिस्तर में जिस बिस्तर पर लेटी थी इस बिस्तर में एक जगह धागे को तोड़कर उसी में सारे पैसे को इकट्ठा करती थी !!!

  ऐसे ही कमाते खाते कुछ समय बीत गया और एक समय ऐसा आया की उसे बुढ़िया के पास ढेर सारा धन इकट्ठा हो गया और सारे धन को अपने बिस्तर में ही जी बिस्तर पर लेटे थ सुरक्षित रख दिया करती थी यह बात किसी को मालूम नहीं थी यहां तक की आस पड़ोस वालों को भी इसकी भनक नहीं लगे दिए कभी भी ना ही इस विषय में कभी किसी से कोई जिक्र किया !!!

  और एक दिन एक समय ऐसा आया बुढ़िया बीमार पड़ गई उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था पड़ोसी ही उसकी देखभाल करते थे जो भी खाना वगैरह होत होता था और बुढ़िया को खिला दिया करते थे ऐसे करते-करते दो से तीन महीने बीत गया !!

   3 महीने बीतने के बाद चौथे महीने में बुढ़िया मर गई पड़ोस के गांव के लोगों ने कुछ बुढ़िया का क्रिया कर्म किया और उसके बिस्तर को ले जाकर की एक गड्ढे में डाल दिया इसकी बना किसी को नहीं थी कि बिस्तर में ढेर सारा रुपया भरा हुआ है फिर एक दिन एक छोटे से लड़के ने दूसरे दिन अपने घर वालों से यह जिक्र किया मम्मी मम्मी हमने दादी को बिस्तर में पैसा रखते हुए एक दिन देखा था उसके मम्मी ने कहा नहीं तुम झूठ बोल रहे हो लड़का बोला नहीं मम्मी मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं मैं सचमुच पर बुढ़िया को पैसा रखते हुए देखा था तब उनके मन में शंका हुई उन्होंने और लड़के के पापा को बुलाया और सारी घटनाओं के जिक्र किया तब उसके पापा गाड़ी लेकर बिस्तर पर ढूंढने निकल पड़े बिस्तर को ढूंढते ढूंढते दोपहर हो गया और बिस्तर उन्हें नहीं मिला जिस जगह पर बिस्तर फेंका गया था उसे बिस्तर को एक गधे वाले ने गधे के पेट पर रखने के लिए परमेश्वर को उठा दिया था कॉलेज जाकर अपने घर में सोच रख दिया था जब भी जरूरत पड़ेगी मैं बिस्तर को गधे के पेट पर लाभ दूंगा ताकि सामान ढोने और लाने नहीं जाने में सुविधा न हो इसलिए गधे वाले ने बिस्तर को वहां से उठा लिया था एक दिन पड़ोस के लड़के ने उसमें से ₹1 का !!

   नोट दिखा उसने दूसरे लड़के को इशारा किया दूसरे लड़के ने तीसरे लड़कों की सारा किया ऐसा करते-करते चार-पांच लड़के इकट्ठा हुए अब उसे बिस्तर को हारना स्टार्ट किया जैसे फाड़ देंगे उसमें से नोटों की बौछार होने लगी देखते देखते कुछ बिस्तर से ढेर सारे नोट बाहर निकाला है पांच लड़कों ने बिस्तर को पूरी तरीके से फाड़ दिया सभी बच्चे नोट लेकर वहां से फूल हो गए किसी ने पूर्ण बच्चों को नोट ले जाते हुए नहीं देखा इसे कहते हैं किस्मत जिसके किस्मत में जो लिखा होता है उसे उतना मिलकर ही रहता है दुनिया लाख कोशिश कर ले और उसके हिस्से का कोई ना तो छीन सकता है नहीं बटवारा कर सकता है जो उसके हिस्से में है उसे मिलेगा आप नहीं तो कल !!!!

मैं तो डर गया

रवि नाम का लड़का है गांव में रहता था वह पढ़ने में बहुत तेज था एक दिन भारत सरकार के द्वारा निकाली गई कुछ वैकेंसी की जानकारी रवि को हुई रवि ने उसे विज्ञापन को दिखा और वह अपने सारे डॉक्यूमेंट लेकर चौराहे पर कंप्यूटर का चुने गया और उसे वैकेंसी के लिए अप्लाई कर दिया !!

कुछ समय बाद जो फार्म रवि ने भरा था उसकी डेट आ गई परीक्षा देने के लिए इधर अभी परीक्षा तक की तैयारी पूरी जोरों से कर रहा है उधर डेट भी आ गई रविंद्र पूरी तैयारी कर एडमिट कार्ड निकाल कर पैसा देने इलाहाबाद के लिए रवाना हो गया !!

वहां स्टेशन पर उतरने के बाद रवि को बहुत परेशानियां हुई स्कूल ढूंढने में रिक्शावाला ने अधिक भाड़ा ले लिया होटल पर नाश्ता किया वहां पैसे जाते देने पड़े क्योंकि तभी वहां है नया गया था पहली बार गया था इसलिए इलाहाबाद के विषय में से कुछ खास जानकारियां नहीं थी इसलिए थोड़ा और प्रताड़ना का शिकार बन गया और उसके अधिक पैसे खर्च होंगे जैसे तैसे वह स्कूल पहुंचा तैयारी तो कर ही रखा था जोरो के साथ परीक्षा का समय जाता है रवि कोई कर इंतजार करने के बाद रवि को क्वेश्चन पेपर मिलता है अब रवि बहुत सावधानी के साथ उसे परीक्षा के पेपर को साल करता है सॉल्व करने के बाद जैसे समय व्यतीत होता है रवि वहां से निकालकर अपने घर के लिए रवाना होता है !!

परीक्षा छूटने के बाद अभी भाग भाग आता है स्टेशन पर जैसे स्टेशन पहुंचता है कोई सही स्टेशन पर ठीक 5 मिनट बाद गाड़ी आ जाती है रवि उसका सवार होकर कुछ घंटे बाद अपने शहर पहुंचता हूं शहर से 5 किलोमीटर दूर उसका मकान का रवि को अपने शहर पहुंचने में देर हो गई थी रात के 11:30 बज रहे थे 11:30 बजे कोई साधन भी नहीं मिल रहा था तभी एक ट्रक वाला रवि के तरफ जा रहा था रवि नगर से रिक्वेस्ट किया भाई कहां जा रहे हो मुझे भी लेते चलो मुझे यहां तक जाना है ट्रक वाला मान गया और रवि को लिस्ट दे दिया रमेश पासवान और रवि 5 मिनट में 10 मिनट में वहां पहुंच गया अपने गांव के सामने !!

वाहन ट्रक से उतरते हैं रवि ने ट्रक वाले से 12 बजाकर 5 मिनट हो रहे हैं इतना कह कर ट्रक वाला वहां चला जाता है क्योंकि गांव से पहले रवि के बहुत बड़ा आम का बैग पड़ता है अंधेरी रात थी सड़के वो खड़ी हुई थी रोड सही तरीके से बनाने की और रवि को थोड़ा डर महसूस यह समय अधिक हो रहा है रात के 12:30 बजे यहां से घर से किलोमीटर दूर है अब मैं घर जाऊं तो कैसे हैं वह रवि ने जैसे तैसे हिम्मत बनकर अपनी बेल्ट निकाल कर हाथ में लिया और रहे भगवान का नाम लेकर रवि आगे बढ़ा वहां से 200 मीटर दूरी पर बाग के अंदर जाने पर कुछ सफेद चीज खड़ी हुई रवि को दिखाई दे रवि को डर तो लगा पर कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था रवि को जाने के लिए मजबूरी थी रवि दर तो था लेकिन मैं किसी तरह हिम्मत बंद कर आगे बढ़कर धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया जैसे वहां पहुंचता है देखा क्या है एक सफेद गाढ़ा बिल्कुल दूध जैसा 20 रोड पर खड़ा हुआ अब रवि इधर को मुर्दा उधर को गधा आगे जाकर खड़ा हो जाता रवि को ऑर्डर लग गया भाई मेरे साथ क्या हो रहा है गधा ऐसा क्यों मेरे साथ बीएफ कर रहा है रवि ने अपनी बिल्डिंग निकाल और दो-चार बेल्ट कुछ गधे को मार दिया गधा जैसे तैसे रोड के नीचे उतर कर थोड़ी दूर जाता है रवि को और डर लग गया लगता है कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है क्या रवि वहां से आगे जैसे 200 मीटर और आगे जाता है उसे चौराहे पर जैसे पहुंचता है अभी वहां एक बड़ा सा भैंस खड़ा हुआ था अब रवि तो पूरी तरीके से डर भी गया रवि ने पैसे को एक छोटा सा पत्थर मारा जैसे पत्थर मारा रवि ने वैसे पैसे नहीं रवि को दौड़ा लिया और अभी वहां से भाग जैसे-तैसे भाग कर खेतों से गुजरते हुए रवि रोड पर पहुंचा अब रवि पूरी तरीके से डर गया था उसके हाथ-पक भूल गए थे उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था और जोर-जोर से चिल्लाने लगा बचाओ बचाओ पेस ने मुझे दौड़ा रखा है क्योंकि रात के 12:30 बज गए थे 600 मीटर की दूरी पर था इसलिए वहां तक रवि की आवाज नहीं जा सकती रवि दर समाज है जैसे तैसे अपने घर गया घर पहुंचते ही उसने आप भी थी अपने घर वालों को बताइए घर वालों ने से डंडा दिलाया डरो नहीं यह सब बहन है तुम परेशान हो जाओगे इसलिए डरो मत रवि हिम्मत नहीं हरा हालांकि रवि कई दिनों तक बीमार पड़ा था किसी धर्म पड़ा हुआ था उसकी सोच वही रहती थी घर वाले ने बहुत समझाया हो जाए तब जाकर रवि का दिमाग थोड़ा संतुष्ट हो लेकिन मैं तो डर ही गया था रवि के अंदर डर बैठ ही गया

बुधवार, 22 मई 2024

स्कूल मास्टर की छोटी कहानी

 शिक्षा पर आधारित स्कूल मास्टर की छोटी कहानी !!!

मदन नाम का लड़का हाल ही में स्कूल में अपना एडमिशन करा स्कूल उसके घर से काफी दूर था इसलिए मदन को स्कूल से थोड़ी दूर पर किराए पर एक कमरा देना अपनी शिक्षा पूरी कर सके !!

क्योंकि मदन बहुत गरीब था इसलिए उसके पास शायरी इसलिए वह स्कूल किराए के मकान में रहकर पैदल यात्रा पैदल आता कुछ दिनों तक यह प्रक्रिया निरंतर चलती रही और किराए के मकान में रहता वहां से पैदल स्कूल पढ़ने के लिए जाता की छुट्टी होने के बाद पैदल वापस उसे किरण के मकान में आकर रहता और अच्छी तरह से पढ़ाई करता !!

इसके साथ मदन पास के बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ा था जिससे अच्छी खासी उसकी इनकम हो जाती है और उसे इनकम को बचत के तौर पर इकट्ठा करता रहता था कुछ दिनों तक उसने ट्यूशन अच्छा खासा पढ़ा और कुछ पैसे उसके बाद इकट्ठे हुए उसे पैसे से मदन ने एक भाई खरीद ली अब मदन का क्या कहना मदन पैदल ना जा करके स्कूल इस बाइक से स्कूल आता है स्कूल जाता पर मदन की एक खासियत थी जवाब नहीं थी वह क्या थी आगे देखिए !!!

मदन जगदीश स्कूल के लिए अपनी बाइक से निकलता रास्ते में पैदल कोई विवेक मिलता तो उसे बैठ कर लिफ्ट दे देता हूं उसे आगे तक छोड़ देता था स्कूल से जब भी छुट्टी होती थी उधर से वापस आते समय रास्ते में अगर कोई व्यक्ति मिल जाता है उसे पैदल दिखाई देता तो उसे व्यक्ति को लिफ्ट देकर बिठा लेता और आगे जाकर छोड़ देता यही प्रक्रिया मदन के निरंतर चलती रही मुझे भी स्कूल के लिए जाता कोई से रास्ते में पैदा मिलता है उसे जगह बाइक पर बिठाकर आगे तकलीफ देकर छोड़ देता था वापस आते समय अगर कोई उसे मिल जाता तब भी वह उसे व्यक्ति को अपनी बाइक को बिठाकर आगे तक लिफ्ट देकर छोड़ देता था !!

पर एक दिन मदन जैसे ही घर से स्कूल के लिए निकला तो रास्ते में से दिखाई दिया और उसे व्यक्ति को बिठा लिया थोड़े दूर जाने के बाद उसे व्यक्ति ने चाकू निकालो और मदन से बोलो गाड़ी साइड में खड़ी करो तो फायदा चला गया मदन डर गया चाकू को देखकर उसने बाइक को वेबसाइट में रख करके बाइक और चाकू वाले व्यक्ति को दिखा मदन पैदल चला गय !!

पैदल जाते-जाते मदन ईश्वर को खोजना मैं तो लोगों की मदद करता था लेकिन आज भगवान ने हमारे साथ ऐसा न्याय क्यों किया मदन यह कहते-कहते घर पहुंच गया मदन उसे दिन खाना भी नहीं खाया रात को सो गया सुबह जैसे भोर हुई उठा देखा तो मदन के दरवाजे पर वह बाइक खड़ी हुई थी उसमें एक चिट्ठी लिखी हुई थी दोस्त मुझे माफ करना!!!

मुझे बड़ी भूल हुई मास्टर साहब जो मैं आपकी बाइक आपसे छीन कर ले गया मैं जिधर भी जाता लोग मुझसे यही पूछते कि यह तो मास्टर साहब की बाइक है तुझे कहां से मिली हर गली हर मोहल्ला हर मक्कड़ और चौराहा हर गांव में किसी गाय की चर्चा हो रहे थे भाई का आपको वापस कर रहा हूं मुझे माफ कर दीजिएगा मदद कोशिश से बोल नहीं समय उसने ईश्वर को धन्यवाद किया और बोला धनेश्वर आज मेरे नीचे और ईमानदारी ने हमें और हमारे भाई दोनों को बचा दिया और मार देता हूं लेकिन!! एक नया एक दिन इंसान उसकी ईमानदारी का फल मेरे जाता है शिक्षा पर आधारित एक छोटी कहानी

मंगलवार, 21 मई 2024

गरीब लकड़हारा

 एक समय की बात है किसी गांव में रोशन नाम का गरीब लकड़हारा रहता था !!

वह अपनी जीभ का चलाने के लिए दिन रात कठिन परिश्रम करता था मेरे पास के जंगलों में जाकर लड़कियां कटता और बाजार में से बचकर पैसे जो मिलते उसे अपनी जेब का चलता था !!

एक दिन और लकड़हारा सुबह उठा और अपने हाथ में कुल्हाड़ी ली लकड़ी काटने के लिए पास के जंगल में गया जंगल से सटी हुई नदी भी थी और नदी के किनारे पेड़ से लड़कियां काट रहा था तभी उसके हाथ से कुल्हाड़ी छोड़ जाती है और वह खिलाड़ी नदी में जाकर गिर जाती है नदी का पानी इतना गहरा था कि वह लकड़हारा उसे नदी में जा नहीं सकता था तो वह लकड़हारा वही नदी के किनारे जाकर बैठ गया और जोर-जोर से रोने लगा!!!

ठीक कुछ समय बाद उसके रोने की आवाज सुनकर जल की देवी वहां प्रगति हुई और उसने उसे लकड़हारा से पूछा अरे बेटा तुम क्यों रो रहे हो तो मैं क्या परेशानी है तब उसे लकड़हारे ने अपनी सारी कहानी और जल की देवी से बोल देता है !!

अफजल की देवी लकड़हारे को आश्वासन देती है ठीक है बेटा तुम परेशान ना हो तुम्हें तुम्हारी कुल्हाड़ी मिल जाएगी इतना कहकर जल की देवी गायब हो जाती है थोड़ी देर बाद जल्द से फिर ना फिर प्रगट होकर हाथ में सोने की कुल्हाड़ी लेकर जल की देवी आती है और लकड़हारे से बोलता है बेटा है क्या है तुम्हारी कुल्हाड़ी है जो सोने की है तो गरीब लकड़हारा बोलता है नहीं है मेरी कुल्हाड़ी नहीं है मैं तो गरीब हूं मेरे पास होने की गाड़ी कहां से आ जाएगी ना कह कर जल की देवी बन गया हो !!

थोड़ी देर बाद पूनम जल की देवी प्रकट होती है और इस बार उसके हाथ में चांदी के खिलाड़ी होते हैं तो फिर वह जल की देवी लकड़हारा से पूछता है बेटा क्या तुम्हारी कुल्हाड़ी है मेरे खिलाड़ी नहीं है यह तो शादी की है मैं तो गरीब आदमी हूं मेरे पास होगा चांदी कहां से आ जाएगा इतना कहकर जल की देवी हो जाती है !!

थोड़ी देर बाद जल की देवी पुनः प्रकट होती है इस बार जल की देवी के हाथ में लोहे की कुल्हाड़ी होती है लोहे की कुल्हाड़ी जल की देवी के हाथ में देखकर बोल कर बोलता है हां हां यही मेरी कुल्हाड़ी है तब जल की देवी उसे लड़का हर की सच्चाई और ईमानदारी पर खुश होकर सोने क सोने क चांदी की लोहे क खुश होकर उसे लकड़हारे को दे देती है वह लकड़हारा खुशी खुशी सोने चांद चांदी के कुल्हाड़ी लेकर अपने घर जाता है.....

चरवाहे का लड़का

 एक एक बार अपने लड़के से कहा हमारा बेटा बड़ा हो गया है भेड़ चराने वालों योग हो गया है अभी भेद के देखभाल अच्छी तरह से कर सकता है समय पर किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आएगी !!

अपडेट चलने वाले लड़के ने भेड़ को खोलकर पहाड़ियों पर ले जाकर चढ़ाया करता था हफ्ते दो हफ्ते बीतने के बाद एक महीने बीत गए और उसे खेलने कूदने का समय नहीं मिल पा रहा था फिर उसके दिमाग में एक फिट और क्यों ना कुछ किया ऐसा किया जाए जिससे मुझे खेलने का समय मिल जाए !!

फिरोज शर्मा के लड़के ने कुछ ऐसा किया कि गांव वालों के होसी उड़ गए

उसे लड़के ने अपने पेड़ को खोलकर जैसे पहाड़ियों पर पहुंचा जोर-जोर से चिल्लाने लगा भेड़िया आया भेड़िया है भेड़िया आया भेड़िया आया गांव वाले ईंट पत्थर और लाठी डंडे लेकर दौड़े दौड़े वहां गए वहां जाकर देखा देखा वहां कुछ भी नहीं था गांव वालों ने उसे लड़के को खूब डाटा फटकार उसने तो बहुत गुस्सा भी किया और वापस चले आए !!

दूसरे दिन जो चल रहा है एक लड़का अपने भेद को चराने के लिए खोल कर ले जाता है जैसे पहाड़ी पर पहुंचता है फिर रोज-रोज चिल्लाने लगता है भेड़िया आया भेड़िया आया फिर दूसरी बार गांव वाले लाठी डंडे और पत्थर लेकर दौड़ कर जाते वहां देखते हैं वहां कुछ भी नहीं था गांव वालों को बहुत ही अधिक गुस्सा आ रहा था कुछ नहीं तुमने करने की भी लड़के करने की भी कोशिश की मगर उसे हमारा बेटा नहीं इतना कहकर गांव वाले वापस आ गई !!

तीसरे दिन जब वह लड़का भेद को खोल कर ले गया जैसे पहाड़ी पर पहुंच अचानक से वाक्य में एक भेड़िया वहां पर आ गया और उसे लड़के के भेद पर हमला कर तीन भेद को उठा ले गया बड़ी-बड़ी कर और लड़का जोर-जोर से चिल्लाता रहा मगर गांव वाले वहां नहीं गए उसे लड़के की मदद के लिए गांव से कोई भी व्यक्ति फिर लड़के के पास नहीं गया लड़का लोग जोर-जोर से चिल्लाता रह गया और भेड़िए ने तीन भेद को उठा लेंगे !!

अंत में उसे लड़के को अपनी गलती का एहसास हुआ और काफी पछता है तब से वह गलतियां करना बंद कर दिया !!


दो दोस्तों की कहानी

यह कहानी कुछ अजीब घटनाओं से प्रेरित है !!!

   दो दोस्ती एक अमीर था दूसरा गरीब था दोनों साथ-साथ रहते थे साथ में पढ़ाई किया करते थे एक समय ऐसा आया जब अमीर दोस्त के जन्मदिन था उसके जन्मदिन पर महंगे महंगे तोहफे दिए गए उसे अमीर दोस्त के बड़े भाई ने अपने छोटे भाई को गिफ्ट में एक बढ़िया से चमचमाती लाल रंग की हुंडई कर गिफ्ट में दी !!!

  दूसरे दिन अमीर दोस्त कुछ हम चमती कर लेकर स्कूल जाता है और अपने गरीब दोस्त के पास खड़ा होकर बोलता है दोस्त देखो हमारी गाड़ी कैसे लगी अच्छी है ना तभी गरीब दोस्त बोलता है यार यह तो कर बहुत ही अच्छी है इसकी जितनी ही तारीफ की जाए उतना ही काम है !!!

1 पर मेरे दोस्त कैसा लग रह था की गरीब दोस्त हमसे कहीं रिश्ता तो नहीं कर रहा है और गरीब दोस्त के मन मे !!!

  एशिया जलन की भावना ही नहीं थी अब गरीब दोस्त ने कहा काश मैं तुम्हारा बड़ा भाई बन सकता और मैं भी ऐसे ही महंगे तोहफे दे सकता तब उसे अमीर दोस्त को एहसास हुआ की हां यह सही है हमारा गरीब दोस्त सही बातें कर रहा है यह हमारा सच्चा दोस्त बनने लायक है हम इस दोस्ती बरकरार रखेंगे अपने दोस्ती टूटने नहीं देंगे कभी से दुखी नहीं करेंगे कभी इस इरशाद नहीं करेंगे कभी इस जलन नहीं रखेंगे हम जो भी करेंगे साथ मिलकर करेंगे आगे पढ़ेंगे लिखेंगे आगे बढ़ेंगे दोनों साथ मिलकर ही करेंगे दोनों साथ-साथ खुशी रहने लगी दोनों का मन की ऐसा जो खत्म हो गई सारे देश दूर होगी सारे गलत टाइम याद हो रही किसी प्रकार का कोई जलन है ऐसा ना रही !!@ दो दोस्तों की खूबसूरत कहानी

अधूरा ज्ञान

आश्रम में रहने वाले दो विद्यार्थी जिनका नाम राम और श्याम था दोनों में बहुत गणेश दोस्ती थी दोनों ही दूर से एक बिना रह नहीं पाते थे दोनों साथ पढ़ते साथ उठते साथ खेलते साथ बैठने साथ खाना खाते सारी प्रक्रिया एक साथ करते हैं इतनी गहरी दोस्ती थी वही असर में रहकर पढ़ाई करते और गुरु जी से शिक्षा प्राप्त !!

दोनों के शिक्षा पूरी हो गई थी लेकिन एक परीक्षा अभी भी पास करना बाकी था गुरुजी ने कहा मैं आज आपको एक-एक तोता देता हूं इस तोते को ले जाकर तो वैसे जगह मारना जहां तुम्हें कोई ना देख पा रहा हूं जो इस तोते को पहले मार कर ले आएगा मेरे पास मैं उसे घर जाने दूंगा राम और श्याम तोते को लेकर आश्रम से निकल पड़े !!

   कुछ दूर जाने के बाद राम ने तोते को मार कर जल्दी वापस आकर गुरुजी से बोल गुरुजी मैं तोता को ऐसी जगह मारा है जहां मुझे किसी ने नहीं देखा है यह लीजिए मरा हुआ तोता !!

   लेकिन उधर श्याम दिन भर इधर-उधर भटकता रहता है पर उसे शाम तक कोई ऐसी जगह नहीं मिला जहां उसे कोई देख ना रहा हो और थक हार कर निराश होकर शाम को अंधेरा होने से पहले आश्रम वापस आता है और गुरु जी से बोलता है गुरुजी हमें कोई ऐसा स्थान मिला ही नहीं जहां मुझे कोई देख ना रहा हो इसलिए मैं तोता को नहीं मार सका इसके लिए मैं बहुत दुखी हूं !!!

  तब गुरु जी ने कहा राम तुम्हारी शिक्षा भी अधूरी है तुम अभी घर नहीं जा सकते हो पर शाम को नहीं रोका श्याम खुशी-खुशी घर वापस आ गया क्योंकि उसे उतना ज्ञान हो चुका था और उसकी शिक्षा पूरी हो चुकी थी पर राम को उठाने ज्ञान नहीं था इसलिए उसकी शिक्षा अधूरी थी इसलिए गुरु जी ने राम को आश्रम में रोक लिया और शाम को खुशी-खुशी घर जाने दिया!!!@ ज्ञान की कहानी

भूखा शेर

1 दिन की बात है गर्मियों का समय था शेर को बहुत भूख लगी हुई थी वह अपने शिकार के लिए जंगलों में इधर-उधर भटकने लगा इस शहर काफी भूखा था कुछ दूर जाने के बाद उसे एक हिरण का छोटा सा बच्चा दिखाई दिया लेकिन शेर ने उसे हिरण के बच्चे को ना मार कर उसी दिन के बच्चे पर दया आ गई और वह शेर हिरण के बच्चे को छोड़कर वह जंगल में आगे की ओर चला गया थोड़ी दूर जाने के बाद उसे बारासिंघा दिखाई दिया क्योंकि बारहसिंगा बहुत मोटा तगड़ा था इसलिए शेर ने उसे बड़ा सिंह के ऊपर प्रहार किया लेकिन बारहसिंगा काफी चतुर और चालक था वह इतनी तेज भाग की शहर उसका पीछा ना कर सका शेर पीछा ना कर सके इसलिए क्योंकि वह बहुत भूखा था बहू के कारण शहर से चला नहीं जा सका दौड़ा नहीं जा सका इसलिए उसने बारहसिंगा को अपना शिकार नहीं बनाया फिर उसके मन में लालसा उत्पन्न हुई चलो उसे चलो इस जगह चलते हैं जहां हिरण का छोटा बच्चा था उसी का शिकार करते हैं शेर वहां से वापस आया और वहां देखा तो हिरण का छोटा बच्चा वहां ना मिला शेर बहुत निराश हो दुखी हुआ वह वापस जंगल की ओर चला गया!!!...Short story of greedy lion...

सोमवार, 20 मई 2024

जादुई पेड़

 बहुत पुराने समय की बात है,,

रामधनी नाम के दो भाई रहते थे !!

राम बड़ा भाई था धनी छोटा भाई था !!

बड़े भाई को देखकर छोटे भाई के मन में हमेशा गलत भावनाएं रहती थी

एक दिन बाद भाई राम जंगल में ,,,,

लकड़िया बटोरने के लिए जंगल में निकल पड़ा !!

और एक पेड़ से सुखी लड़कियों को ,,

तोड़ने लगा

फिर वह दूसरे पेड़ के पास पहुंचा फिर वह दूसरे पेड़ के पास पहुंचा वहां भी उसने उसे पेड़ से सुखी लड़कियों को तोड़ा फिर आगे बढ़ा जैसे हो तीसरे पेड़ के पास पहुंचा वह पेड़ सब का था से खूब भरे हुए थे वह पेड़ और कोई नहीं था वह जादुई पेड़ था जैसे उसने उसे लड़कियों को तोड़ना चाहा उसे पेड़ ने राम से बोल हे दयालु मनुष्य तो हमारी टहनियों को मत तोड़ो क्योंकि हम फलों से लगे हुए हैं हमें बहुत ही नुकसान हो जाएगा बदले में जो तुम मरोगे मैं तुम्हें दूंगा राम के मन में ललचा उत्पन्न हो गई अब लालच के मन मे ,,,,

उसने कहा तुम मुझे ढेर सारे शॉप दो नहीं तो मैं तुम्हारी टहनियों को तोड़ दूंगा तभी पेड़ ने अपनी कहानियों से राम के ऊपर वार कर दिया उसने राम को अपनी कहानियों से खूब अच्छी तरह से धुलाई की राम वहीं गिर गया और गिर गया कर माफी मांगने लगा मुझे वक्त दो अब मैं दोबारा ऐसी गलती कभी नहीं करूंगा फिर दयाल था वह मान लिया लेकिन इतना करने के बाद वहीं पर पड़ा रहा सूरज ढलने को आए इधर उसके छोटे भाई को चिंताएं होने लगी कि हमारा बड़ा भाई राम किधर है अपने भाई की खोज में घर से निकल पड़ा खोजते खोजत !!

वह अपने भाई के पास जा पहुंचा तब राम ने अपने ऊपर बीती सारी घटनाओं को अपने छोटे भाई से बयान किया उन्होंने भाइयों ने मिलकर उसे पेड़ से माफी मांगी और वहां से घर चले आए उसे दिन से उनके मन में जो भी लालच की भावनाएं थे वह पूरी तरह से निकल गई अब दोनों भाई साथ मिलकर रहने लगी !!!!!!!

लालची लकड़हारा

मदनपुर नामक गांव में हरिया नाम का एक लकड़हारा रहता था !!

और सुबह उठकर पास के छोटे-छोटे से जंगल में जाकर लड़कियां बटोरता  और उसे बाजार में ले जाकर अच्छे दाम में दे देता जिससे उसकी घर का खर्चा खर्चा चल रही थी !!

हरिया का काम है लकड़ी कोई इकट्ठा करना और उसे बाजार में बेचकर पैसे लाना और अपने घर की देखभाल करना !!

कुछ समय बाद हरिया नमक लकड़हारे का एक सुंदर सी कन्या के साथ विवाह हो गया और उसे कन्या को अपने घर लेकर आया !!

अब तो हारिया नमक लकड़ी का खर्चा और भी बढ़ गया क्योंकि उसकी बीवी बहुत खर्चीली थी वह कुछ ना कुछ रोज हरिया के सामने अपनी मांग को रखती हमारे पास आज यह नहीं आज हो नहीं आज हमारे पास साड़ी नहीं है आज हमें लिपस्टिक लाना है अजमेर सिंदूर खरीदना है तमाम प्रकार की यातना हरिया को देते रहते थे !

अब हरिया का गुजारा इतनी लड़कियों में नहीं हो पता था धीरे-धीरे हरिया बड़े से जंगल की ओर जाने लगा वहां से और अधिक लड़कियां लाकर बाजार में ले जाकर भेजता तो उसे अधिक पैसे मिल जाते हैं जिससे वह अपनी बीवी का शौक पूरा करता था !!

अब हरिया को अधिक पैसे मिलने लगे इसलिए उसके मन में लालच से आ गई धीरे-धीरे एक दिन जंगल में छोटे-छोटे पेड़ों को काटने लगा उन पेड़ों को काटकर छोटा-छोटा कट्ठा बनाकर बाजार में ले जाकर भेजता जिससे उसे और अधिक पैसे मिलते हैं उन पैसों से वह अपनी बीवी का शौक पूरा करता था  !!

हरिया नमक लकड़हारे के मन में और बड़े लाल साहब मिलेगी और बड़े पेड़ों को काटने लगा उन पेड़ों को काटकर ले जाकर बाजार में मिलता इससे उसे और अधिक पैसे मिलते हैं हरिया बहुत खुश रहने लगा उसका परिवार भी खुशहाल रहने लगा हरिया को किसी तरह की दिक्कतें नहीं आ रही थी बड़े पेट कट करो जब बाजार में भेजता तो उसे ढेर सारे पैसे मिलते हैं जिससे वह अपनी बीवी के साथ और अच्छी तरह से देखभाल कर लेता था !!

एक दिन हरिया जब बड़े पेड़ को काटने वाला था जैसे ही उसने एक दो कुल्हाड़ी पेड़ पर मेरी वैसे पेड़ की कहानियां ने हरिया के ऊपर वार कर दिया फिर जैसा दोबारा उसने एक खिलाड़ी में आ रही है फिर दूसरी पेड़ के टहनी ने हरिया पर दोबारा वार कर दिया हरिया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था तभी पेड़ बोला अरे मूर्ख तो यह क्या कर रहा है तुम मुझे काट रहा है अरे मैं भी जीवित इंसान की तरह हूं फिर तो मुझे क्यों काटता है मैं तुझे ताजी हवा देता हूं वातावरण को स्वच्छ रखता हूं तेरी देखभाल करता हूं इस पृथ्वी के पर्यावरण को सुंदर बनाए रखता हूं फिर भी तुझे समझ में नहीं आता जानता है एक पेड़ तैयार करने में कितने समय लग जाते हैं कितने वर्ष बीत जाते हैं तब जाकर एक पौधा तैयार होता है बड़ी आसानी से मुझे काट रहा है तभी हरिया पेड़ के सामने अपना सर झुकाकर की गिड़गिड़ा कर माफी मांगने लगता है सत्ता में बिल्कुल अकेला हो जाऊंगा आज से मुझे सुधारने का एक मौका दे दो आज के बाद में प्रॉब्लम लेता हूं मेरे को कभी नहीं कटुंगा यह हमारा वादा है लड़की देखभाल करूंगा अपने पैसों से और पौधे लाकर यहां लगा दूंगा लेकिन मैं पेड़ को नहीं कटुंगा !!!

उसी दिन से हरिया में प्रण लिया और लकड़िया जाकर चिंता था लेकिन पेड़ को कभी नुकसान नहीं पहुंचते तो मैं एक पेड़ को कभी काटा हरियाणा में जो पकड़ लिया था उसे पूरा किया अपने पैसों से कुछ और कर दे ले जाकर वहां लगाया सूखी लकड़ियों फोटो बोलकर बाजार में ले जाकर भेजता उसी से अपना गुजारा चलाने लगा !!!

शनिवार, 18 मई 2024

चमक उठी किस्मत

 एक गांव में गरीब परिवार रहता था और बहुत ही ज्यादा गरीब था पैसों के घर के लिए उसके घर में बहुत तंगी रहती थी दिन भर मेहनत मजदूरी करके किसी तरह वह लोग अपना पेट और अपने पूरे परिवार का देखभाल कर पाते थे एक दिन गांव से थोड़ी दूर पर कुछ प्रसिद्ध लोग आए और तरह-तरह के छोटे-छोटे घर में उद्योग लगाने के लिए प्रशिक्षण दे रहे थे इस परिवार को भी उसे प्रशिक्षण के विषय में जानकारी मिली फिर इस परिवार की एक महिला जिसका नाम था गायत्री वह उसका शिक्षण केंद्र पर गई और झाड़ू बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया !!

  प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब झाड़ू बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें इसके लिए घर में पैसे भी नहीं थे गायत्री नाम की महिला ने अपने आसपास दोस्तों से नात बात और रिश्तेदारों से थोड़ा-थोड़ा पैसा उधार लेकर ₹25000 की व्यवस्था की उसे ₹25000 से गायत्री नाम की महिला ने झाड़ू बनाने का एक छोटा सा उद्योग अपने घर पर ही लगा डाला और अपने हाथ से झाड़ू बनाना शुरू कर दिया जैसे तैसे झाड़ू बनाते और अपने आसपास की दुकानों पर जाकर दुकानदारों से संपर्क करके झाड़ू को बहुत कम दाम में भेजती और अपने घर का धीरे-धीरे गुजर करने लगी !!

धीरे-धीरे गायत्री नाम के महिला ने इस बिजनेस में अच्छा खासा मुनाफा अर्जित करने लगी दो दराज तक के गांव में दुकानदारों से प्रसिद्ध हो गया अब इसका बिजनेस धीरे-धीरे चल निकल झाड़ू के डिमांड धीरे-धीरे बढ़ने लगी जैसे तैसे झाड़ू डिमांड बढ़ती वैसे गायत्री राम की महिला ने अपने पड़ोस में रहने वाले महिलाओं से संपर्क कर उन्हें अपने पास अपने उद्योग से लगा लिया और उन्हें झाड़ू बनाने का प्रशिक्षण देकर एक तरह का रोजगार भी दिया !!

  25000 से शुरू किया बिजनेस आज सेलिना 20 से 25 लख रुपए का बिजनेस हो चुका है इन सब के बीच में गायत्री राम की महिला ने बहुत ही हार्ड वर्क करके बहुत ही ज्यादा मेहनत करके अपने बिजनेस को साल दो साल के भीतर इस मकान पर लाकर खड़ा कर दिया कि आज उसकी आमदनी हर महीने 60 से 70000 रुपए बचत बचत गायत्री नाम की महिला को प्राप्त हो जाता है आज इस महिला की मेहनत रंग लाई आज इस महिला के घर में खुशियां छाई हुई है किसी चीज की कमी नहीं होती है मेहनत में वह ताकत है जो कहीं किस जो कहीं किसी चीज .....

   आज इस महिला ने अपनी किस्मत अपने हाथ से खुद बनाई आज इस महिला की किस्मत चमक उठी है मेहनत रंग लाई आवाज घरों में एक-एक ट्रक माल मांगती है फिर भी माल पूरा नहीं कर पाती लोगों के डिमांड पूरा नहीं कर पाती झाड़ू बनाने का बिजनेस काम हो जाता है फिर भी इस महिला ने हार ना मानकर अपना प्रयास निरंतर रखा और आगे बढ़ती रही !!!.....#motivation #storyline 

शुक्रवार, 17 मई 2024

गिरकर संभालना

 यादों मैं बड़ी ताकत होती है !

वह कल को आज मैं जिंदा रखती है !!

निगाहों मे मजे भी गिरे और गिर का संभालते रहे !!

हवाओं ने खूब कोशिश की मगर आंधियों में चिराग जलते रहे !!!

अगर अपने सफर शुरू कर ही दिया है तो बीच रास्ते में लौटने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि वापस आने में जितनी दूरी तय होगी क्या पता मंजिल उसे भी पास हो !!!

   इसलिए निरंतर प्रयास करते रहे एक न एक दिन समय ऐसा आएगा जिस दिन आप उसे मंजिल के करीब पहुंच जाएंगे और सफलता आपको मिल जाएगी इसलिए अगर आप किसी भी चीज की शुरुआत की है प्लीज रास्ते से वापस बताइए उसको चलते रहने दीजिए क्या पता हो सकता है मंजिल आपके करीबी हो सफलता आपको मिल ही जाएगा!!!


कीमत कैसे बढ़ती

 पानी फ्री !!!! 

प्लास्टिक पाउच में पानी ₹2

पानी की बोतल ₹20 !!!!

पानी का केट ₹50 !!!!!

पानी का टैंकर ₹2000 !!!!!

अब जरा सोचिए और दिमाग लगाइए यहां पानी आपको फ्री दिया जा रहा है पर इसकी कीमतें कितनी बड़ी हुई है इसे आप देख सकते हो इसका अंदाजा लगा सकते हैं हमारे सिस्टम को लाइक अवश्य करें !!

मेहनती किसान

 दूर गांव में राघव नाम का एक मेहनती किसान रहता था !!

वह मेहनत से कभी नहीं घबराता था अपने खेतों में जी तोड़ मेहनत कर खूब ढेर सारे अंगता था और उसे बाजार में ले जाकर बेचकर खूब ढ़ेर सारा पैसा कमाता है अपने घर पर लता अच्छे-अच्छे पकवान बनाकर खाता और रहता !!

पर यह क्या एक दिन राघव अपनी बैलगाड़ी पर ढेर सारा अनाथ लात कर बाजार ले जा रहा था रास्ते में चलते-चलते कुछ दूर जाने के बाद रास्ते में एक देर बाद सा पत्थर दिखाई दिया जो बीच रास्ते में पड़ा हुआ था उसे पत्थर के कारण राघव की बैलगाड़ी आगे नहीं जा सकती थी अब राघव चिंतित होने लगा इतना बड़ा सा पत्थर मैं इसे कैसे रास्ते से हटाओ दूसरी तरफ बाजार जाने के लिए हमें देरी भी हो रही है कोई यहां दिखाई भी नहीं पड़ रहा है आसपास जिससे मैं उसकी मदद लेकर इस पत्थर को हटा सकूं तभी इधर-उधर तक देखने के बाद एक आदमी वहां बैठा हुआ राघव को दिखाई दिया

तब राघव अपनी बैलगाड़ी से उतर कर उसे आदमी के पास मदद के लिए गया बोल भाई आप यहां अकेले बैठे हो मेरी थोड़ी मदद करोगी उसे पत्थर को रास्ते से हटा दो हम दोनों मिलकर हटा देते हैं ताकि हमारी बैलगाड़ी बाजार तक जा सके और मैं अपने अनाज को भेज उन तब वह वाला आदमी राघव के साथ आता है और दोनों मिलकर उसे पत्थर को हटाते हैं !!

अब राघव उसे आदमी को मन ही मन गालियां देने लगता है जिसने इस पत्थर को रास्ते में लड़का दिया तब वह भला आदमी दूसरा राघव को पकड़ता है आप जिस आदमी को गालियां दे रहे हैं और दूसरा आदमी कोई और नहीं मैं ही हूं मैं रास्ते से थकाहारा जा रहा था तब इस पत्थर को दिखा और मैं इसे सिद्ध करने की कोशिश की तबीयत लौड़ा कर रास्ते में जा पहुंचा तभी से मैं बैठकर यहां इंतजार कर रहा हूं कि कोई दूसरा आदमी है जिसके सहारे में इस पत्थर को रास्ते से हटाकर अपने घर जा सकूं तभी आप यहां दिखाई दिए और हमें बुला लिया अब हम दोनों ने मिलकर इस पत्थर को हटा दिया तब राघव को अपने कहे पर बातों पर पछतावा आता है और वह भले आदमी से माफी मांग कर अपनी बैलगाड़ी को लेकर बाजार चला जाता है!!

    इंसान कोई भी हो गलतियां किसी से भी हो सकती है

इंतजार का फल

 एक समय की बात है किसी गांव में एक गरीब किसान रहता था !!

वह किस मेहनती बहुत था मेहनत से कभी नहीं घबराता था जीत और मेहनत करता था अपने खेत में !!

इतना मेहनत करने के बावजूद फिर भी उसके हाथ में पैसे नहीं रुकते थे 

वह पैसों को लेकर बहुत चिंतित रहता था बहुत परेशान भी रहता था यह आखिर हमारे अंदर क्या कमी है कितनी मेहनत करने के बावजूद हमारे पास पैसे नहीं रखते हैं !!

इसका कारण और हल ढूंढने लगा पर उसे कुछ समझ में नहीं आया अमिताभ चुप मार कर बैठ गया और एक दिन !!

अपने खेत में टहल रहा था तभी उसे एक बी दिखाई दिया वह उसे बीच को हाथ में उठाकर घर ले आया और उसे अपने घर के गमले में सुरक्षित रखकर के उसमें रोज पानी और खाद देने लगा !!

वह किस खाना तो भूल जाता था मगर गमले में पानी और खाद देना कभी नहीं भूलता था रोज सुबह उसके अच्छे से देखभाल करता ऐसे करते-करते कई महीने बीत गई और गमले से हमको निकाल और धीरे-धीरे पौधा बढ़ने लगा पौधा बढ़ते बढ़ते इतना बड़ा होगा वह एक पेड़ का रूप धारण कर लिया और फिर एक समय ऐसा आया !!

उसे पेड़ ने ढेर सारे फूल लगे और उसमें कुछ दिनों के बाद फल भी लग गए वह उसे पेड़ की अच्छी खासी निगरानी करता देखते देखते फल भी पक गया फिर वह किस उसे फल को तोड़कर बाजार ले गया और उसे फल को अच्छे दामों में बाजार में बेचकर खूब सारे पैसे घर लेकर आया अब वह किसान बहुत खुश था अब वह किस दूसरा पेड़ लगाने को सोच रहा है ऐसे ही मैं कुछ और पेड़ अपने घरों पर लगाऊं जिससे ढेर सारा पैसा हमारे पास है और सुरक्षित रखा भी रहे !!

  इस तरह किस का इंतजार खत्म हुआ अब उसे किस के हाथों में पैसे ही पैसे नजर आने लगे!!.....

पैसा और व्यापार

 एक बूढ़ा आदमी सब्जी बेच रहा था !!

वह बूढ़ा आदमी अपने खेत से ताजा कद्दू तोड़कर बाजार में बेच रहा था !

उसे बूढ़े आदमी ने एक कद्दू की कीमत ₹30 रखी दो कोई दूसरा कद्दू ₹30 तीसरा कद्दू

 ₹30 ₹90 में 3 कद्दू दे रहा था !!

तभी वहां एक आदमी आया और उसने कद्दू का दाम पूछा तब बूढ़े आदमी ने एक कद्दू का आराम ₹30 बोला ₹90 में तीन कर दो उसे आदमी ने उसे बूढ़े आदमी को ₹90 देकर तीन कर दो खरीद लिया और उसे भले आदमी ने उसे बूढ़े आदमी से बोल तो मैं व्यापार करना नहीं आता इतना कहकर वह तीन कद्दू लेकर वहां से चला गया !!

तब उसे बूढ़े आदमी ने कहा यह है तो बिजनेस है जहां पैसा लगाकर हम व्यापार करते हैं यही हमें व्यापार करना सीखना है यह हम एक कद्दू की वजह तीन कद्दू भेज सके और लोग बड़े प्रेम से उसे खरीद भी ले !!

गुरुवार, 16 मई 2024

सफलता कैसे मिले

 एक समय की बात है एक आदमी ने महान फिलोस पर सुकरात से पूछा सफलता का रहस्य क्या है !!

तब सुकरात ने कहा कल सुबह तुम हमें नदी के किनारे आकर मिलो वही तुम्हें सफलता का रहस्य मालूम पड़ जाएगा !!

वह आदमी सफलता कर जाने के लिए काफी उत्सव उसके दिमाग में यही चल रहा था कब सुबह हो कब मैं नदी किनारे जाऊं कब सुखराज से मिलो कब सफलता के विषय में पूरी जानकारी मुझे प्राप्त हो !!

जैसे ही सुबह हुई वह इंसान भाग भाग नदी के किनारे जा पहुंचा और सुकरात की सजा कर मिला तब सुकरात ने उसे इंसान से कहा तुमने नदी की गहराई को नापो को इंसान धीरे-धीरे नदी की गहराई को जैसे ही जा रहा था पीछे से सुकरात भी उसे इंसान के साथ नदी के अंदर जा रहे थे 

जैसे वह इंसान पानी को और आगे बढ़ता गया उसे अपनी उसके ऊपर ना के पास पहुंच गया जैसे ना के पास पानी पहुंचता है सुग्रीव पीछे से उसका सब पानी के अंदर डुबो देते हैं वह पानी में चटपटाने लगता है सोचता है कितनी जल्दी में बाहर निकलूं क्योंकि सुकरात उससे ज्यादा आते करते थे इसलिए वह बाहर नहीं निकलने दिए और इंसान थोड़ी देर तक परेशान हूं तब सुकरात थोड़ी देर बाद उसे इंसान को छोड़ दिया जैसे उसे इंसान को छोड़ा और चटपटा कर भी हर बात के साथ जोर-जोर से सांस लेने लगा !!

तब सुकरात ने उसे इंसान से पूछा तुम पानी के अंदर क्या चाहते थे तब वह इंसान जोर से बोल मैं घबराहट के साथ सांस लेना चाहता था तब सुकरात ने कहा यही सफलता का रहस्य है जितनी तीव्रता के साथ तुम सांस लेना चाहते थे उतनी ही देवता के साथ तुम्हें आगे बढ़ना चाहिए आगे बढ़ना पड़ेगा तभी जाकर तुम्हें सफलता मिल पाएगी अन्यथा तुम जहां खड़े हो वहीं खड़े रह जाओगे तुम्हें कुछ भी प्राप्त नहीं हो पाएगा इसलिए ही मनुष्य तुम जाओ जितनी तीव्रता के साथ में घबराहट पानी के अंदर हुई थी उतनी देवता के साथ तुम आगे बढ़ाने की कोशिश करो फिर एक न एक दिन देखिए तुम्हें सफलता का रहस्य और सफलता दोनों ही स्पष्ट दिखाई देगा और एक दिन तुम सफल आवश्यक हो जाओगे !!


शनिवार, 11 मई 2024

परेशान रघु

एक गांव में रघु नाम का कुम्हार रहता था !

वह अपने गरीबी से बहुत परेशान रहता था !

दूसरों के यहां मजदूरी करके किसी तरह अपना और अपने परिवार का पेट पालता था !

मजदूरी के द्वारा कमाए गए पैसे से घर पर चलता ही था मगर उसमें वह बचत भी करता था धीरे-धीरे बचत करते-करते कई महीने बीत गए फिर रघु के पास थोड़ा पैसा इकट्ठा हुआ फिर रघु ने कुछ दिमाग लगाया अपना अलग वह बाजार गया बाजार से बर्तन बनाने वाला चैक लेकर गया जिससे वह मिट्टी के बर्तन बनते थे !

अब रघु के चेहरे पर थोड़ा सा मुस्कान आने लगी वह उसे चैक के द्वारा अपने घर पर अनेक डिजाइनर में तरह-तरह के मिट्टी के बर्तन बनाने लगा और उसे बर्तन को बाजार में ले जाकर अच्छे दामों में भेजा था जिसे रघु को अच्छे खासे पैसे मिल जाते अब रघु की खुशी का ठिकाना ना रहा मानो उसे गड़ा हुआ खजाना मिल गया वह इतना खुश रहने लगा उसकी उदासी चेहरे से मानो हमेशा के लिए छठ गई वही परेशान लघु कुशल लिखने लगा उसने दिन-रात मेहनत की उसकी मेहनत में किसी भी प्रकार की कमी ना रहे और रात दिन खूब मेहनत करके अच्छे-अच्छे डिजाइनर में बर्तनों को बनाता और गाड़ी पर लात कर बाजार ले जाता बाजार में जैसे ही वह अपने बर्तनों को सजा कर रखना वैसे ही ढेर सारे लोग आकर और डिजाइन दार बर्तनों को मिट्टी के बर्तन को खरीद लेते हैं और रघु को अच्छे खासे पैसे मिलने लगे धीरे-धीरे वह उन पैसों कोई इकट्ठा करता गया और एक दिन उसके पास ढेर सारी जमा पूंजी हो गई वह उन पूंजी से अपने लिए छोटा सा घर तो बनवाली ही लिया थोड़ी जमीन भी अलग खरीद ली जिस पर खेती किसानी भी करने लगा अब तो रघु का परिवार खुशाल लिखने लगा कुशल लघु रहने लगा उसके दो छोटे बच्चे थे वह अपने बच्चों को अपने मेहनत के बल पर अच्छी तालीम दी अच्छी पढ़ाई कराई और एक समय ऐसा आया उनके दोनों बच्चे इस बनकर उसे गांव में आए गांव में आए आप तो रघु पहले से ज्यादा और खुशहाल और अमीर हो गया वह रघु जो कभी परेशान रहता था अब वही रघु अपने कमाए हुए पैसों से गांव के गरीब परिवार की मदद भी करता था एक दूसरे का हाथ भी बताता था किसी परी परेशान आदमी को और सही राह सही मार्ग बताता और उसकी समस्याओं को दूर भी करता धीरे-धीरे और सामाजिक कार्य भी करने लगा उसके इस कार्य को देखकर आसपास के गांव में चर्चाएं भी होने लगी धीरे-धीरे चर्चाएं सरकार को भी प्राप्त हुई तब एक दिन ब्लॉक से कुछ अधिकारी है और उसे रघु को सामाजिक कार्य के लिए सम्मानित भी किया इस कहानी समय क्या सीख मिलती है कमेंट कर अवश्य लिखें @!kidsstory #motivation story

गुरुवार, 9 मई 2024

चला की पड़ी भारी

 गीदड़ और ऊंट में गहरी दोस्ती थी !

दोनों नदी के किनारे बैठकर घनत्व अपनी सुख दुख की कहानी बयां करते रहते थे !!

एक दिन दोनों नदी के किनारे बैठे हुए थे तभी वहां पास से कुछ किशन गुर्जर कर जा रहे थे और आपस में बातें करते हुए जा रहे थे की नदी के उसे पर अपने खेत में इस समय ढेर सारी तरबूज तैयार हो गया उसे तोड़कर मंडी भेजना है इतनी बात है गीदड़ को किसान की सारी बातें सुनाई पड़ जाती है और वह मन नहीं मन सोचने लगता है की ढेर समय हो गया है तरबूज खाने को नहीं मिला है चलो कुछ उपाय लगते हैं नदी को उसे पर चलते हैं तरबूज खाने के लिए तभी वह अपने दोस्त ऊंट भाई से बोलता है अरे दोस्त नदी के उसे पर कुछ किसान आपस में बातें करते हुए जा रहे थे बड़े-बड़े तरबूज तैयार हो चुके हैं उन्हें तोड़कर मंडी भेजना है क्यों ना चलो चुपके छुपा कर नदी को पार कर तरबूज खाया जाए मुड़ के मन में भी लालसा उत्पन्न हुई वह भी काफी समय से तरबूज नहीं खाया था मूड भी तैयार हो गया दोनों तरबूज खाने के लिए नदी का स्वभाव चल दिए नदी के पास पहुंचते ही गीदड़ मोड़ के पीठ पर सवार हो गया और ऊंट नदी में घुसकर धीरे-धीरे नदी के पार खेत पर पहुंच गया !!

     ऊंट और गीता दोनों खेत में घुस जाते हैं और पेट भर खूब तरबूज खाते हैं जब दोनों का पेट भर जाता है तभी गीदड़ जोर-जोर से अपनी आवाज में बोलने लगता है ऊंट से डरता है पर गीता नहीं मानता बहुत तेज आवाज में बोले लगता है तभी उधर सो रहे हैं किस की नींद खुल जात और भाग भाग अपने खेत की ओर जाता है देखता है वहां को दिखाई देता है गीता तो किसी तरह पेड़ के पास छुप जाता है मगर ऊंट पर के पेट बड़ी होने के कारण मूड नहीं छुपाता तभी किस डंडा लेकर पहुंचता रोड को बहुत मारता है और गुस्से में हो जाता है जैसे तैसे ऊंट वहां से भागने में कामयाब होता है कैसे बाहर निकलता है दवा किधर के पास पहुंचता है हर एक क**** तो कहां भाग गया था मुझे अकेला छोड़कर देख मुझे मार मार के मेरी पीठ को लाल कर दिया है किसानों ने वोट मन ही मन गीदड़ को खोजने लगता है और वहां से नदी को पार करके बाहर आने की सोचने लगता है !!

     तभी ऊंट जिधर का बैठ कर पानी में नदी के पास घुसता है जैसे 20 धारा में पहुंचता है ऊंट नदी में डुबकियां लगाने लगता है गीदड़ डर जाता है और समझ जाता है यह हमसे बदला ले रहा है कहेंगे गिरधर बहुत डरा हुआ रहता है ऊंट उसे पानी में डुबकियां लगा लेता है अब गीता उसी में डूबने लगता है जैसे तैसे किसी तरीके से गीदड़ नदी को पार करता है नदी के बाहर आता है मन में अपने विचार बना देता है कि अब मैं मूड को कभी परेशान नहीं करूंगा !!

    उसी दिन से गीदड़ में ऊंट का साथ छोड़ दिया दोनों अलग-अलग रहने लगे इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है कमेंट करो उसे बताएं !!

 #kidsstory#smallstory#shortstory#motivationalstory#story2024#stoRyan....

मंगलवार, 7 मई 2024

रानी और छोटा जादूगर


 एक किसान की बेटी थी वह किस दवा करता था कि हमारी लड़की भूसा से सोना बना देती है धीरे-धीरे यह बात पूरे राज में फैल गई यह बात एक दिन वहां के रह रहे राजा को पता चली है तब राजा ने उसे लड़की को अपने दरबार में बुलाया और उसके सामने कुछ भूसे की टोकरी रख दी है राजा बोला बेटा आप तो मुझे मुंह से सोना बना जो की लड़की को कुछ आता नहीं तो इसलिए वह फूड कर जोर-जोर से रोने लगी!!

    तभी वहां दरबार में थोड़ी दूर पर खड़ा एक जादूगर था वह जादूगर उसे लड़की की सहायता के लिए वहां जाता है और उसे भूसे से सोना बना देता है लेकिन बदले में लड़की के गले का हर और जादूगर ले लेता है इतना देखकर राजा आशा चिकित्स हो जाता है उसके मन में लालसा पैदा हो जाती है तब वह अपने से कोई सलाम से यह कहता है कुछ भूसे की टोकरी और ले लिए तभी उसके से पैसा लो कुछ भोसड़ी की टोकरी लाकर उसे लड़की के सामने रख देते हैं तब जादूगर और लड़की से कहता है हमें तुम्हारा लड़का चाहिए बदले में सोना बना दूंगा लड़की हमें भर लेती है बोलती है ठीक है ऑफिस से सोना बनाया जादूगर भूसे से सोना बना देता है यह देखकर राजा बहुत खुश होता है और उसे लड़की से शादी कर लेता है कुछ समय बाद उसे लड़की को एक बेटा पैदा होता है तब जादूगर उसे लड़की के पास पहुंचता है और उसे लड़के को मांगता है लेकिन वह लड़की और लड़के को देने के लिए इंकार कर देती है तब जादूगर कहता है चलो ठीक है मैं तुम्हारा लड़का नहीं लूंगा लेकिन तो मेरा नाम बता दो इतना कह कर जादूगर वहां से चला जाता है लड़की भी धीरे-धीरे उसके पीछे-पीछे जाते हैं जब जादूगर अपने घर पहुंचता है तो एक गाना गाने लगता है गाना गाते गाते हो अपना नाम भी बता देता है लड़कियों के गाने को ध्यान से सुंदरी होती है तब जादूगर मुड़ता है उसे लड़की से कहता है तो मेरा नाम बताओ लड़की को पता ही लग गय गया था उसका नाम उसने जड़ से जादूगर का नाम बता दिया जादूगर वहां से चला गया यह दोबारा लौटकर कभी नहीं आया लड़की अपने घर में खुशी-खुशी रहने लगी है !!#smallstory#shortstory#kidsstory....


सोमवार, 8 अप्रैल 2024

एकता में ताकत


 एक गांव में बहुत बूढ़ा आदमी रहता था !

वह बूढ़ा आदमी बहुत बीमार रहता था !

उसे बूढ़े आदमी के चार बेटे थे !

चारों बेटे आपस में  लड़ाई झगड़ा किया करते थे !

एक दिन  ! बूढ़े आदमी ने अपने सारे बेटों को अपने पास बुलाया !

और बोला उन चारों बेटों के हाथों में एक लड़कियां दी और कहा इस लकड़ी को तोड़ो !


तब चारों बेटों ने लड़कियों को तोड़ दिया !

तब उसे बूढ़े आदमी ने टूटी हुई लड़कियों का एक छोटा सा गटर बनाए और उन्हें उसे गट्ठर को अपने एक-एक बेटे को दिया तोड़ने के लिए तब उसे लकड़ी को चारों बेटों ने नहीं तोड़ पाया तब उसे बूढ़े आदमी ने कहा देखा एकता में कितना बल है !!

शुक्रवार, 22 मार्च 2024

एक सेठ की अजब कहानी


एक समय की बात है किसी गांव में मिस्टर चांदनी नाम का एक सेट रहता था वह पैसों का हिसाब किताब बहुत ही बारिक तरीके से अपने पास रखता था वह पैसों के सिवा अपने यार दोस्त हित मित्र रिश्तेदार नातेदार किसी से भी ज्यादा लगाव नहीं रखता था उसके दिमाग में हर वक्त हर पल हर घड़ी केवल पैसा केवल पैसा केवल पैसा ही उसके दिमाग में रहता था पैसा कब किधर से आए कैसे आए किस तरीके से आए हो इसी में व्यस्त रहता था अपने नाथ बार दोस्त रिसीवड मित्र रिश्तेदारों से किसी प्रकार का कोई ज्यादा नजदीकी संबंध नहीं रखता था एक दिन मिस्टर चांदनी अचानक से बीमार पड़ गए दिन किसी तरह बीत गया रात का समय था अचानक से मिस्टर चांदनी के पास यमराज आए और मिस्टर चांदनी से बोले सुनो मिस्टर चांदनी तुम्हारा वक्त खत्म हो चुका है अब तुम हमारे साथ चलो मिस्टर चांदनी की आंखों में आंसू भर आया उन्होंने यमराज से कहा है यमराज तुम 20 करोड रुपए ले लो लेकिन एक दिन का समय मुझे दे दो सिर्फ एक दिन मुझे चाहिए यमराज बोले नहीं तुम्हारा समय बीत चुका है तो मेरे साथ चलो फिर मिस्टर चंदनिया हमराज से बोले तुम हमारी सारी धन दौलत संपत्ति जो एक-एक पैसे मैंने जमा किया वह सब कुछ ले लो लेकिन 1 घंटे का समय दे दो फिर हेमराज बोले नहीं मिस्टर चांदनी तुम्हारा वक्त खत्म हो चुका है तुम्हारी घड़ी खत्म हो चुकी है तुम सिर्फ और सिर्फ हमारे साथ चलो मिस्टर चांदनी बहुत रोए बहुत गिर गिरी यमराज के साथ लेकिन हेमराज नहीं माने फिर मिस्टर चंदन यमराज से बोले मुझे कुछ पल दे दो एक खत लिखना है सिर्फ एक खत लिख दो फिर मैं आपके साथ चलता हूं यमराज इस बात पर मानेंगे बोले ठीक है मैं तुम्हें कुछ ही पल देता हूं तुम यह कर लिख सकते हो फिर जो मिस्टर चांदनी ने उसे खत में लिखा उसे पढ़ कर लोगों की आंखों में आंसू भर आए उन्होंने लिखा हे मेरे दोस्त दुनिया में हर चीज पैसा ही नहीं होता है प्रेम भी होता है लोगों से नजदीकी रिश्ता भी बनाना पड़ता है आपसी संबंध भी रखना पड़ता है प्रेम से दो वक्त किसी के साथ बिताया जाए वह काफी होता है पैसा पैसा हर समय पैसा किसी के काम नहीं आता है हाथ देखा हमने यमराज से कितना रिक्वेस्ट किया कितना मनाया महाराज को लेकिन सब कुछ देने को मैं तैयार था अपने इधर दौलत है 100 ग्राम सूरत लेकिन जीने का एक क्षण में नहीं खरीद पाया अपने लिए अब आप ही बताइए पैसा किस काम का जो हमारे काम ही ना आ सका इस कहानी से आपको क्या परिणाम मिलती है कमेंट कर जरूर लिखिए जरूर बताइए धन्यवादm

रविवार, 10 मार्च 2024

एक बूढ़ा आदमी


 पनिहारी गांव में एक बूढ़ा आदमी रहता था

इसका एक लड़का था जिसका नाम जनक था !

जनक पढ़ने में बहुत तेज तर्रार था और क्लास में हमेशा पास रहता था!

जनक की एक आदत बहुत प्यारी थी !

रोज सुबह उठकर हाथ में कुछ दाने लेकर पास के तालाब के पास जाता और मछलियों को दाना खिला ऐसा कई दिनों तक उसने किया महीना बीत गए धीरे-धीरे कई महीने बीत गए एक दिन जब जनक दाना खिला रहा तब इस तालाब से एक बड़ी मछली जनक की तरफ आई और बोली बेटा तुम मुझे रोज भरपेट खाना खिलाते हो दाना खिलाते हो मांगो त मांगो तो मैं लड़का बड़ी देर तक खड़ा हो रहा है और सोचता रहा मैं क्या मांगू इससे मेरे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है तब जनक ने कहा साइन इतना दीजिए जा में कुटुम समाए मैं भी भूखा ना रहूं साधु ना भूखा जाए तब मछली ने कहा तथा जो तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं रहेगी मछलियों को चारा खिलाकर जब वह घर वापस आता है अपने घर को देखा है तो आश्चर्यचकित में पड़ जाता है उसका घर बदल चुका था घर पहले खड़ा था अब वह पक्का मकान बना हुआ था घर में काफी ढेर सारे सोना जेवरात पड़े हुए थे वह इन सभी चीजों को देखकर हरत में पड़ जाता है तब उसे मछली की बात याद आती है मछली नहीं यह सब किया है तब जनक मछली को धनबाद करता है और अपने बूढ़े पिता के साथ खुशी-खुशी उसे घर में रहता है और अपना जीवन खुशी बीतता है इमेज कीवर्ड अनमोल दूरी मुसीबत संकल्प टूट गया परेशान पैकेट चित्र असफल जीवन शैली धनराज बुजुर्ग निर्धनता सीनियर कॉलेज खड़े होना हनी

A

    

      

बुधवार, 24 जनवरी 2024

ऊंचाई से मत डरो

 इंसान को कभी हार से नहीं डरना चाहिए संघर्ष करते रहना चाहिए संघर्ष एक रास्ता है जो हमें ऊंचाइयों पर ले जाता है हमें लगातार मेहनत और परिश्रम करते रहना चाहिए कभी डरना नहीं चाहिए दर को अपने आसपास कभी भटकने नहीं देना चाहिए ना हम डरेंगे ना कभी हारेंगे दर सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग

÷ वही सफल होता है जो कम पर विश्वास करता है

÷ आगे बढ़ते रहो क्योंकि रुका हुआ पानी भी बेकार जाता है

÷ व्यक्ति की हर भूल कोई ना कोई शिक्षा दे जाती है

÷ ऊंचाई हासिल करनी है तो बज बानो धोखेबाज नहीं

÷ जितना बड़ा संघर्ष होता है जीत उतनी ही शानदार होती है

÷

समय हमें दिखाई नहीं देता लेकिन बहुत कुछ दिख जाता है

   इसलिए हर से मत डरो आगे बढ़ो हाथ उठाकर आसमान को छूने की कोशिश करो एक दिन सफलता आपको अवश्य मिलेगी




रविवार, 14 जनवरी 2024

बदलाव


 अगर कोई शख्स चाहे तो वह अपने अंदर 

बदलाव  ला सकता है ,,, कैसे 

   आइये जानते है,,,,,

ए क आदमी गुस्से मे बोला ,

चलो आज हम अपना पूरा घर साफ कर देते है ।

और दीवार की पुताई कर देते है ।

वह आदमी अपने घर की सफाई 

करने लगा,घर की सफाई करने के

वाद,वह आदमी अपने घर की दीवार 

कई पुताई करने लगा ।थीरे धीरे उस

आदमी की सोच  बदलती गयी और 

वह आदमी अपने घर की दीवारो की

पुताई करते चला गया । और इसका

नतीजा यह ।हुआ कि वह आदमी अपने

पूरे घर की पुताई  कर डाली ।!

   ,,,,,इस प्रसंग की सीख  यह है कि हमारी

एक छोटी सी आदत हमारी सोच  बदल सकती है ।

जिससे हमारा जीवन वदल सकता है ।

   हमारी सही आदत से बडी बडी

बाधा ओ को दूर किया जा सकता है।।।।

👧👽👤





शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

अनोखी जिंदगी


 किसी ने सच ही कहा है,

अपने कभी खुश नही रहते,

एक बूढा आदमी,अपनी पूरी जिन्दगी 

गुजार दी,,,दूसरो को खुश रखने मे !

मगर उस बूढे आदमी को यह  मालूम ही

नही था कि जिसे हम खुश रहने के लिए 

अपनी पूरी जिन्दगी की गाढी कमाई  लगा

दी, वह आदमी हम से खुश ही नही रहेगा ।

   जिस आदमी पर हमे सबसे अधिक भरो सा

है,जो खास है,जो अपना है,जो अपना सगे वाला

है ,वह आदमी हम से खुश  नही रहेगा ।

   यह कैसी परीक्षा है भगवन ,

यह किस दुबिधा मे हमे डाल दिया है ।

     और  जो,,,,,,,,,

अपने न ही थे ,,  

  वह अपने खास  ,,,,,,

रविवार, 7 जनवरी 2024

जिन्दगी का सफर

आइए इस जिंदगी के विषय मैं कुछ जानते हैं

1,,, घायल तो यहां पर परिंदा है मगर जो फिर से उड़ सके वह जिंदा है

 समझनी है जिंदगी तो पीछे देखो जीनी है जिंदगी तो आगे देखो ।

एक दिन वर्षों का संघर्ष तुमसे टकरायेगा। ।

हर छोटा बदलाव, बडी कामयाबी का हिस्सा होता है ।।

जो रातो को सो कर गवा देते है,

वही सपनो की चिंगारी को और हवा देते है,,,।।

जिंदगी का सफर ,मानो तो मौज है,,।

वर्ना समस्या तो रोज है,,,।।।

,,,जिंदगी अनमोल है, 

इसे खूबसूरती के साथ जीना सीख ।।।


यह जिंदगी फिर न मिलेगी दुबारा ।

इसीलिए जिंदगी खुल कर जियो ।।।




शुक्रवार, 5 जनवरी 2024

आशा और विश्वास

 आशा कितनी ही छोटी हो,

        लेकिन 

निराशा से बेहतर होती है ।

इसलिए  आशा बादी रहे ।।।

,,,,उम्मीद एक ऐसा रास्त है,,,

जो सफलता की ओर ले जाता है ।।।

जब हम सफल होने की उम्मीद के साथ,,,

प्रयास करते रहते है तो,,,

एक दिन सफलता जरूर मिलती है,,,।।।


सोमवार, 1 जनवरी 2024

रहस्यमयी पत्थर


 पत्थर तो आप ने बहुत देखे होंगे,

मगर क्या आप ने ऐसा पत्थर देखा है,

जो की कई वर्षो से एक ढलान पर टिका हुआ है ।

म्यांमार के मोन राज्य मे,,,

एक रहस्य मयी पत्थर है,,,जो सर्दियो से

चमत्कारिक रूप से एक दूसरे पत्थर की 

ढलान पर टिका हुआ है ।इसके संतुलन 

को लोग भगवान  बुद्ध का चमत्कार  मानते

है । यही वजह है कि ,,,,,इसे कवैकटियो पगोडा

जिसे गोल्डन राज्य के नाम से जाना जाता है ।

यह एक फेमश बौद्ध धार्मिक स्थान भी है ।।।





रविवार, 31 दिसंबर 2023

कौआ की चालाकी


 एक समय की बात है,,,

एक कौआ  को बहुत तेज प्यास लगी ।

वह पानी की तलाश मे ,इधर उधर, भटकने लगा ।

कौआ  दूर दूर तक गया,

मगर उसे कही पानी नजर नही आया ।

फिर  अचानक  उसे थोडी दूर पर एक घडा दिखाई  दिया।

लेकिन यह क्या, 

घने मे थोडा ही पानी था ।

फिर  कौआ ने अपना दिमाग लगाया ।

वह पास पडे ककड के टुकडे को ,

एक एक कर उस पानी वाले घडे मे डालता गया ।

देखते देखते पानी घडे से ऊपर  आ गया ।

फिर  कौआ ने पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई। 

   और वहा से चला गया ।।।

इस तरह से दिमाग लगाना चाहिए  ।।।





शनिवार, 30 दिसंबर 2023

कछुऐ की दौड खरगोश से


एक समय की बात है,

कछुआ और  खरगोश ने सोचा और  कहा,,,,

चलो भाई आज दौड लगाते है ,

कछुआ और खरगोश दोनो दौड के लिए  तैयार हो गये ।

चूंकि खरगोश  तेज दौडता है ,,,

इसलिए वह दौड़कर, काफी आगे निकल गया ।

अब खरगोश जब पीछे मुड़कर देखा,

तो वह कछुआ से बहुत आगे था ,,,,,

तब खरगोश ने सोचा अब हमे एक झपकी ले लेना चाहिए। 

तब खरगोश  एक पेड के नीचे बैठा,,,,

और झपकी लेते लेते सो गया ।

उधर कछुआ धीरे धीरे लगातार  चलते

चलते खरगोश से आगे निकल कर,,,,

   दौड जीत गया ।।।।।

,,,,धीरे धीरे चलने वाला एक दिन ,,,  ,,, 

अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है ।।।।।

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2023

गजब की आलू

 आज कुछ गजब है,

आलू तो आप ने बहुत खाई होगी,

दस रूपया, बीस रूपया, किलो,

लेकिन क्या आप ने 50,000 से

90,000 रूपया किलो की आलू

खाई है,या ऐसी आलू कही आप ने

देखी है ।   नही न ,,,,चलो आज हम

आप को आज इसके बारे मे बताते है ।

      यह एक खास किस्म की आलू होती है ।

यह फ्रांस मे पाई जाने वाली एक खास किस्म की आलू है।

इस खास किस्म की आलं का नाम ,,,ले बोनेटो,,,, है ।

इसका उत्पादन मई,जून मे किया जाता है ।

इसकी एक किलो आलू की कीमत,

10 ग्राम सोने के बराबर  होता है ।

इसमे खाद के रूप मे,समुद्री शैवाल का इस्तेमाल होता है।

इस आलू मे,,,नीबू,,नमक,,,आखरोट,,का स्वाद पाया जाता है।


दुनिया का सबसे अलग आलू ।





गुरुवार, 28 दिसंबर 2023

लोमडी और मुर्ख कौआ


 किसी पेड पर एक कौआ ,अपनी चोच  मे रोटी का

टुकडा लिए  पेड की डाल पर बैठा धा । तभी वहा 

पर टहलते हुऐ ऐक चालाक लोमडी आ जाती है ।

और कौआ की चोट मे रोटी का टुकडा देख कर 

लोमडी को लालच आ जाता है ।

    तब लोमडी कौआ से कहती ,है 

अरे भाई हमे आप की मीठी आवाज सुने हुऐ

काफी समय हो गया है, भाई जरा अपनी प्यारी 

सी आवाज हमे सुना दो न ।

    लोमडी की इतनी सी बात सुनकर , कौआ

जैसे ही अपना मुंह खोलता है ,वैसे ही रोटी का

टुकडा कौआ के मुख से छूटकर जमीन पर जा

गिरता है,तभी लोमडी लपक कर उस रोटी के 

टुकडे को अपने मुंह मे दबाकर वहा से लेकर 

भाग जाती है ।

    उधर कौआ  पेड पर बैठा 

काव काव कर्ता रह जाता है ।

    मानना पडे गा भाई,,,,

लोमडी बहुत चालाक  थी ।।





मंगलवार, 26 दिसंबर 2023

गरीब किसान की बेटी


 किसी गाँव मे गरीब किसान और उसकी बेटी रहती थी ।

वह इतने गरीब थे. कि उन के घर मे खाने की कमी लगी

रहती थी । उनके पास खेत नही था ।किसान और उसकी

बेटी बहुत मुसीबत मे रहते थे ।

    एक दिन  किसान और उसकी बेटी ने मिलकर यह बिहार

किया कि चलो अपनी मुसीबत राजा को बताई जाय ,राजा

बहुत दयालू है , सायद कुछ नकुल हल निकल ही आयेगा ।

 किसान और  उसकी बेटी दोनो राजा के पास जाते है और 

अपने ऊपर बीती मुसीबतो को राजा को बताते है ,राजा उन

दोनो की बात सुनता है ,और कहता है ,ठीक  है,,,,,,,,,

       हम तुम को जमीन देते है ,तुम उस पर जाकर खेती करो,

किसान मान गया ,बोला ठीक है राजा साहब हम कल से जाकर

उस जमीन पर  खेती करते है, किसान  वहा स चला आया ,,,,

     दूसरे दिन किसान  हल और बैल लेकर खेत पहुंच जाता

है और खेत को जीतने लगता है ,खेत जीतते जीतते उसका हल 

किसी से टकराया है, तब किसान ठहर कर खुदाई कर देखता है

तो वह सोने की ओखल निकल है, अब किसान उस ओखल को

घर लाता है और  अपने बेटी से कहता है हमे जो यह ओखल 

मिली है इसे राजा को वापस कर देते है ।किसान की यह बात

सुनकर उसकी बात,,,   सुनकर साफ मना कर देती है । 

      और  कहती है,,,,   सोने की ओखल आप के पास है

और  कही राजा इसकी मंसल मांग लिया तो ,,,,,

   तब किसान कहता है ऐसा नही होगा जो हमारे पास है

ही नही राजा उसे हमसे कैसै मांग  सकता है ,,,,किसान 

नही माना ,ओखल लेकर राजा के पास पहुंच जाता है ।

किसान राजा को ओखल देता है,अब राजा मूसल मानता

है ,किसान  मंसल नही दे पाता है ,तब राजा उस किसान 

को जेल मे बन्द कर देता है  ,,,,जेल मे बन्द, हर किसान 

कई हालत गंभीर हो जाती है,,,,,

      जेल मे कुछ दिन बीतने के बाद  ,जेल मे बन्द किसान 

अकेले एकांत स्थान पर बैठ कर किसान बोल रहा था कि ,,,,,

      कि कास हम अपनी बेटी की बात मान जाता 

किसान की यह बात राजा सुन लेता  है और किसान 

और  उसकी बेटी को दरबार मे बुलाता है ,और उन 

दोनो से सच जानता है ,उन दोनो का सच जान कर

राजा को बहुत अफसोस होता है । उन दोनो की बात

सुनकर राजा किसान को छोड देता है ,और किसान 

कई बेटी की बुदिमता को देखकर उसकी बेटी को

राजा अपने खजाने का मंत्री बना देता है ।।।।।

     अब किसान और उसकी बेटी 

दोनो खुशी खुशी अपने घर मे रहने लगे  ।।।

।।।।इसे कहते है ,,।।।।।

मेहनत का फल






सोमवार, 25 दिसंबर 2023

एकता मे बल


 एक बूढा आदमी धा । उसके चार बेटे थे ।

चारो बेटो का आपस मे बैठता नही था ।

चारो बेटे आपस मे लडाई,झगडा किया

करते थे ।एक दिन बूढे आदमी ने अपने 

चारो बेटो को बुलाया ।चारो बेटो को एक 

एक लडकी दी,और  बूढा आदमी बोला

अब इस लकडी को तोड़ ।चारो बेटो ने

उस लकडी को तोड दिया ।

   फिर बूढे आदमी ने उन सभी लकडी को

एक गाठ मे बाध कर अपने एक एक बेटो को

बारी बारी तोडने के लिए दिया । लेकिन उन 

लकड को ई भी नही तोड पाया ।।

    तब उन चारो बेटो को जाकर ज्ञान प्राप्त हुआ 

कि ऐकता  मे बहत बल होता है ,उसे दिन से

चारो बेटे हसी खुशी साथ साथ रहने लगे  ।।




रविवार, 24 दिसंबर 2023

चरवाहे का लडका और भेड़िया


 एक चरवाहे ,का लडका बहुत शरा,रत कर्ता था ।

वह जब  बगल के खेत मे गाय और भैंस च,राने

जाता तो चार छे ,लोगो को इकट्ठा देखता तो जोर

जोर से चिल्लाने लगता, बचाओ बचाओ भेड़िया आया ।

      उस लडके की आवाज को सुनकर गाँव  के लोग

     दौड कर उस लडके को बचाने के लिए जब 

लडके के पास जाते, तो वह लडका ठहाके मार कर

   एक तरफ खडा होकर जोर से हस रहा होता है ।

यह देखकर गाँव के लोग अपने घर चले आते ।

       दसरे दिन लडका फिर गाय चराने जाता है,

फिर वह जोर से चिल्लता है,बोलता है बचाओ

 बचाओ भेडिया आया ।

   फिर गाँव के लोग दौड कर जाते और  वहा पर,

देखते वह चरवाहे का लडका एक तरफ खडा हो

जोर जोर से हस रहा था ।

  ऐसा उसने कई दिनो तक गाँव के लोगो

को परेशान किया ।

     और  फिर, अचानक एक दिन  भेड़िया वहा

आ ही गया । तब चरवाहे के लडके ने जोर जोर

से आवाज लगाई,जोर जोर से चिल्लया , बचाओ 

बचाओ भेड़िया आया, मगर गाँव वाले ने उस

चरवाहे की आवाज को अनसुना कर दिया,

गाँव के लोगो ने समझा कि वह चर वाहे का लडका 

हमे वे वकूफ बना रहा है,गाँव के लोग लडके के

पास नही गये,

          और  भेडिया लडको उठा ले गया,

           मार कर खा गया ।

 कहानी से हमे सीख मिलती है कि 

अति से अधिक किसी से मजाक

नही करना चाहिए, नही यह अपने

लिए ही घातक सिद्ध होता है ।।।।।

शनिवार, 23 दिसंबर 2023

जब गाँव से निकल आई पीएल मे

 राबिंन मिंज ---जिसे गुजरात  टाइम्स ने 3:60करोड मे खरीदा ।

           यह है 21 साल का विकेट कीपर और  वाले हाथ के

          बल्लेबाज राबिंन मिजाज ।

यह एक आदिवासी खिलाड़ी,,,,,

जिनको आईपीएल मे खेलने का मौका मिल रहा है ।


आईपीएल के महंगे खिलाड़ी

 कहते है,कि जब बाजार मे बोली लगती है तो मालूम नही

होता कि वह कितने मे विकेगा।  कुछ ऐसा आईपीएल मे भी

हुआ,  आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के कप्तान पैट कमिस को

आईपीएल 2024 की मिनी नीलामी मे उनक बेस प्राइस से 

दस गुना अधिक कीमत पर,,,,,    ,,,, ,   

            सनराइजस  है दरा बाद  ने खरीदा ,,,,,।


शुक्रवार, 22 दिसंबर 2023

आईना झूठ नही बोलता


 एक लडकी का नाम परी था ।परी छोटी छोटी बात को

लेकर ना,राज हो जाती थी ।जब परी की मां  परी को

पढने के लिए कहती परी अपनी मा पर बहुत तेज 

नाराज हो जाती  ।

    एक दिन परी टेबल पर बैठ कर पढ रही थी ,

   परी जिस टेबल पर बैठ कर पढ रही थी ,उसी

टेबल पर एक गमला रखा हुआ था । तभी अचानक 

कही से परी का भाई उधर से निकला और तभी

अचानक से उसका हाथ  गमले से टकराया और 

गमला टेबल से नीचे गिरकर टूट गया ।यह देखकर 

परी आग बबूला हो गई। प्री का गुस्सा सातवे आसमान 

पर जा पहुंचा।

    यह नजारा देखकर परी की मा देखकर घर मे जाती है

  और झट से ऐक बडा सा आईना लाकर प्री के सामने 

रख देती है,जब परी अपना चेहरा उस आईने मे देखती

है तो परी को बहुत बुरा चेहरा दिखाई देता है ,

 तब प्री को समझ मे आ जाता है,और परी का

गुस्सा शांत हो जाता है ।

   टैग ---'मोटी वेशन कहानी।

         छोटी परी की कहानी।

        आईने की कहानी ।












गुरुवार, 21 दिसंबर 2023

ऐसे मिला छिपा खजाना


 एक बूढा आदमी था / वह काफी समय से बहुत बीमार

चल रहा था, उस बूढे ऑदमी के कई लडके थे /

एक दिन वह बूढा आदमी काफी बीमार पड गया,

उसने अपने सभी लडकी को बुलाया और  बोला

हमने खेत मे कुछ खजाना गाडा है, हमारे मरने के

बाद तुम सब उस खजाने को खोद लाना और  आपस 

मे सभी लोग बराबर-बराबर  बाट लेना ****

    यह सब कह कर ,कुछ दिन के बाद  मर गया ।

तब सब लडकी ने एक दिन विचार-विमर्श कर 

सभी लडके मिलकर फाड़ से एक तरफ से पूरे

खेत को खोद डाला ।

       खेत को गोडा हुआ देख कर गांव का एक बूढा

आदमी ने उन लडको से बोला ।तुम उन मे गेहू छूट

दो,तब सब लडको ने उन मे गेहू डाल दिया ।कुछ दिन

बाद  उस खेत मे खूब फसल पैदावार हुई ।

   यह देखकर वह सब बहुत खुश हुए। 

यह किसी खजाने से कम नही था ।

खरगोश और कछुआ कीदौड


 रेस मे जीतता वही है जी लगातार काम कर ता है

यह कहानी कुछ ऐसी सीख देती है



बुधवार, 20 दिसंबर 2023

तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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