शिक्षा पर आधारित स्कूल मास्टर की छोटी कहानी !!!
मदन नाम का लड़का हाल ही में स्कूल में अपना एडमिशन करा स्कूल उसके घर से काफी दूर था इसलिए मदन को स्कूल से थोड़ी दूर पर किराए पर एक कमरा देना अपनी शिक्षा पूरी कर सके !!
क्योंकि मदन बहुत गरीब था इसलिए उसके पास शायरी इसलिए वह स्कूल किराए के मकान में रहकर पैदल यात्रा पैदल आता कुछ दिनों तक यह प्रक्रिया निरंतर चलती रही और किराए के मकान में रहता वहां से पैदल स्कूल पढ़ने के लिए जाता की छुट्टी होने के बाद पैदल वापस उसे किरण के मकान में आकर रहता और अच्छी तरह से पढ़ाई करता !!
इसके साथ मदन पास के बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ा था जिससे अच्छी खासी उसकी इनकम हो जाती है और उसे इनकम को बचत के तौर पर इकट्ठा करता रहता था कुछ दिनों तक उसने ट्यूशन अच्छा खासा पढ़ा और कुछ पैसे उसके बाद इकट्ठे हुए उसे पैसे से मदन ने एक भाई खरीद ली अब मदन का क्या कहना मदन पैदल ना जा करके स्कूल इस बाइक से स्कूल आता है स्कूल जाता पर मदन की एक खासियत थी जवाब नहीं थी वह क्या थी आगे देखिए !!!
मदन जगदीश स्कूल के लिए अपनी बाइक से निकलता रास्ते में पैदल कोई विवेक मिलता तो उसे बैठ कर लिफ्ट दे देता हूं उसे आगे तक छोड़ देता था स्कूल से जब भी छुट्टी होती थी उधर से वापस आते समय रास्ते में अगर कोई व्यक्ति मिल जाता है उसे पैदल दिखाई देता तो उसे व्यक्ति को लिफ्ट देकर बिठा लेता और आगे जाकर छोड़ देता यही प्रक्रिया मदन के निरंतर चलती रही मुझे भी स्कूल के लिए जाता कोई से रास्ते में पैदा मिलता है उसे जगह बाइक पर बिठाकर आगे तकलीफ देकर छोड़ देता था वापस आते समय अगर कोई उसे मिल जाता तब भी वह उसे व्यक्ति को अपनी बाइक को बिठाकर आगे तक लिफ्ट देकर छोड़ देता था !!
पर एक दिन मदन जैसे ही घर से स्कूल के लिए निकला तो रास्ते में से दिखाई दिया और उसे व्यक्ति को बिठा लिया थोड़े दूर जाने के बाद उसे व्यक्ति ने चाकू निकालो और मदन से बोलो गाड़ी साइड में खड़ी करो तो फायदा चला गया मदन डर गया चाकू को देखकर उसने बाइक को वेबसाइट में रख करके बाइक और चाकू वाले व्यक्ति को दिखा मदन पैदल चला गय !!
पैदल जाते-जाते मदन ईश्वर को खोजना मैं तो लोगों की मदद करता था लेकिन आज भगवान ने हमारे साथ ऐसा न्याय क्यों किया मदन यह कहते-कहते घर पहुंच गया मदन उसे दिन खाना भी नहीं खाया रात को सो गया सुबह जैसे भोर हुई उठा देखा तो मदन के दरवाजे पर वह बाइक खड़ी हुई थी उसमें एक चिट्ठी लिखी हुई थी दोस्त मुझे माफ करना!!!
मुझे बड़ी भूल हुई मास्टर साहब जो मैं आपकी बाइक आपसे छीन कर ले गया मैं जिधर भी जाता लोग मुझसे यही पूछते कि यह तो मास्टर साहब की बाइक है तुझे कहां से मिली हर गली हर मोहल्ला हर मक्कड़ और चौराहा हर गांव में किसी गाय की चर्चा हो रहे थे भाई का आपको वापस कर रहा हूं मुझे माफ कर दीजिएगा मदद कोशिश से बोल नहीं समय उसने ईश्वर को धन्यवाद किया और बोला धनेश्वर आज मेरे नीचे और ईमानदारी ने हमें और हमारे भाई दोनों को बचा दिया और मार देता हूं लेकिन!! एक नया एक दिन इंसान उसकी ईमानदारी का फल मेरे जाता है शिक्षा पर आधारित एक छोटी कहानी
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