किसी गाँव मे गरीब किसान और उसकी बेटी रहती थी ।
वह इतने गरीब थे. कि उन के घर मे खाने की कमी लगी
रहती थी । उनके पास खेत नही था ।किसान और उसकी
बेटी बहुत मुसीबत मे रहते थे ।
एक दिन किसान और उसकी बेटी ने मिलकर यह बिहार
किया कि चलो अपनी मुसीबत राजा को बताई जाय ,राजा
बहुत दयालू है , सायद कुछ नकुल हल निकल ही आयेगा ।
किसान और उसकी बेटी दोनो राजा के पास जाते है और
अपने ऊपर बीती मुसीबतो को राजा को बताते है ,राजा उन
दोनो की बात सुनता है ,और कहता है ,ठीक है,,,,,,,,,
हम तुम को जमीन देते है ,तुम उस पर जाकर खेती करो,
किसान मान गया ,बोला ठीक है राजा साहब हम कल से जाकर
उस जमीन पर खेती करते है, किसान वहा स चला आया ,,,,
दूसरे दिन किसान हल और बैल लेकर खेत पहुंच जाता
है और खेत को जीतने लगता है ,खेत जीतते जीतते उसका हल
किसी से टकराया है, तब किसान ठहर कर खुदाई कर देखता है
तो वह सोने की ओखल निकल है, अब किसान उस ओखल को
घर लाता है और अपने बेटी से कहता है हमे जो यह ओखल
मिली है इसे राजा को वापस कर देते है ।किसान की यह बात
सुनकर उसकी बात,,, सुनकर साफ मना कर देती है ।
और कहती है,,,, सोने की ओखल आप के पास है
और कही राजा इसकी मंसल मांग लिया तो ,,,,,
तब किसान कहता है ऐसा नही होगा जो हमारे पास है
ही नही राजा उसे हमसे कैसै मांग सकता है ,,,,किसान
नही माना ,ओखल लेकर राजा के पास पहुंच जाता है ।
किसान राजा को ओखल देता है,अब राजा मूसल मानता
है ,किसान मंसल नही दे पाता है ,तब राजा उस किसान
को जेल मे बन्द कर देता है ,,,,जेल मे बन्द, हर किसान
कई हालत गंभीर हो जाती है,,,,,
जेल मे कुछ दिन बीतने के बाद ,जेल मे बन्द किसान
अकेले एकांत स्थान पर बैठ कर किसान बोल रहा था कि ,,,,,
कि कास हम अपनी बेटी की बात मान जाता
किसान की यह बात राजा सुन लेता है और किसान
और उसकी बेटी को दरबार मे बुलाता है ,और उन
दोनो से सच जानता है ,उन दोनो का सच जान कर
राजा को बहुत अफसोस होता है । उन दोनो की बात
सुनकर राजा किसान को छोड देता है ,और किसान
कई बेटी की बुदिमता को देखकर उसकी बेटी को
राजा अपने खजाने का मंत्री बना देता है ।।।।।
अब किसान और उसकी बेटी
दोनो खुशी खुशी अपने घर मे रहने लगे ।।।
।।।।इसे कहते है ,,।।।।।
मेहनत का फल

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें