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मंगलवार, 21 मई 2024

अधूरा ज्ञान

आश्रम में रहने वाले दो विद्यार्थी जिनका नाम राम और श्याम था दोनों में बहुत गणेश दोस्ती थी दोनों ही दूर से एक बिना रह नहीं पाते थे दोनों साथ पढ़ते साथ उठते साथ खेलते साथ बैठने साथ खाना खाते सारी प्रक्रिया एक साथ करते हैं इतनी गहरी दोस्ती थी वही असर में रहकर पढ़ाई करते और गुरु जी से शिक्षा प्राप्त !!

दोनों के शिक्षा पूरी हो गई थी लेकिन एक परीक्षा अभी भी पास करना बाकी था गुरुजी ने कहा मैं आज आपको एक-एक तोता देता हूं इस तोते को ले जाकर तो वैसे जगह मारना जहां तुम्हें कोई ना देख पा रहा हूं जो इस तोते को पहले मार कर ले आएगा मेरे पास मैं उसे घर जाने दूंगा राम और श्याम तोते को लेकर आश्रम से निकल पड़े !!

   कुछ दूर जाने के बाद राम ने तोते को मार कर जल्दी वापस आकर गुरुजी से बोल गुरुजी मैं तोता को ऐसी जगह मारा है जहां मुझे किसी ने नहीं देखा है यह लीजिए मरा हुआ तोता !!

   लेकिन उधर श्याम दिन भर इधर-उधर भटकता रहता है पर उसे शाम तक कोई ऐसी जगह नहीं मिला जहां उसे कोई देख ना रहा हो और थक हार कर निराश होकर शाम को अंधेरा होने से पहले आश्रम वापस आता है और गुरु जी से बोलता है गुरुजी हमें कोई ऐसा स्थान मिला ही नहीं जहां मुझे कोई देख ना रहा हो इसलिए मैं तोता को नहीं मार सका इसके लिए मैं बहुत दुखी हूं !!!

  तब गुरु जी ने कहा राम तुम्हारी शिक्षा भी अधूरी है तुम अभी घर नहीं जा सकते हो पर शाम को नहीं रोका श्याम खुशी-खुशी घर वापस आ गया क्योंकि उसे उतना ज्ञान हो चुका था और उसकी शिक्षा पूरी हो चुकी थी पर राम को उठाने ज्ञान नहीं था इसलिए उसकी शिक्षा अधूरी थी इसलिए गुरु जी ने राम को आश्रम में रोक लिया और शाम को खुशी-खुशी घर जाने दिया!!!@ ज्ञान की कहानी

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