किसी ने सच ही कहा है,
अपने कभी खुश नही रहते,
एक बूढा आदमी,अपनी पूरी जिन्दगी
गुजार दी,,,दूसरो को खुश रखने मे !
मगर उस बूढे आदमी को यह मालूम ही
नही था कि जिसे हम खुश रहने के लिए
अपनी पूरी जिन्दगी की गाढी कमाई लगा
दी, वह आदमी हम से खुश ही नही रहेगा ।
जिस आदमी पर हमे सबसे अधिक भरो सा
है,जो खास है,जो अपना है,जो अपना सगे वाला
है ,वह आदमी हम से खुश नही रहेगा ।
यह कैसी परीक्षा है भगवन ,
यह किस दुबिधा मे हमे डाल दिया है ।
और जो,,,,,,,,,
अपने न ही थे ,,
वह अपने खास ,,,,,,

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