एक समय की बात है,
कछुआ और खरगोश ने सोचा और कहा,,,,
चलो भाई आज दौड लगाते है ,
कछुआ और खरगोश दोनो दौड के लिए तैयार हो गये ।
चूंकि खरगोश तेज दौडता है ,,,
इसलिए वह दौड़कर, काफी आगे निकल गया ।
अब खरगोश जब पीछे मुड़कर देखा,
तो वह कछुआ से बहुत आगे था ,,,,,
तब खरगोश ने सोचा अब हमे एक झपकी ले लेना चाहिए।
तब खरगोश एक पेड के नीचे बैठा,,,,
और झपकी लेते लेते सो गया ।
उधर कछुआ धीरे धीरे लगातार चलते
चलते खरगोश से आगे निकल कर,,,,
दौड जीत गया ।।।।।
,,,,धीरे धीरे चलने वाला एक दिन ,,, ,,,
अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है ।।।।।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें