गीदड़ और ऊंट में गहरी दोस्ती थी !
दोनों नदी के किनारे बैठकर घनत्व अपनी सुख दुख की कहानी बयां करते रहते थे !!
एक दिन दोनों नदी के किनारे बैठे हुए थे तभी वहां पास से कुछ किशन गुर्जर कर जा रहे थे और आपस में बातें करते हुए जा रहे थे की नदी के उसे पर अपने खेत में इस समय ढेर सारी तरबूज तैयार हो गया उसे तोड़कर मंडी भेजना है इतनी बात है गीदड़ को किसान की सारी बातें सुनाई पड़ जाती है और वह मन नहीं मन सोचने लगता है की ढेर समय हो गया है तरबूज खाने को नहीं मिला है चलो कुछ उपाय लगते हैं नदी को उसे पर चलते हैं तरबूज खाने के लिए तभी वह अपने दोस्त ऊंट भाई से बोलता है अरे दोस्त नदी के उसे पर कुछ किसान आपस में बातें करते हुए जा रहे थे बड़े-बड़े तरबूज तैयार हो चुके हैं उन्हें तोड़कर मंडी भेजना है क्यों ना चलो चुपके छुपा कर नदी को पार कर तरबूज खाया जाए मुड़ के मन में भी लालसा उत्पन्न हुई वह भी काफी समय से तरबूज नहीं खाया था मूड भी तैयार हो गया दोनों तरबूज खाने के लिए नदी का स्वभाव चल दिए नदी के पास पहुंचते ही गीदड़ मोड़ के पीठ पर सवार हो गया और ऊंट नदी में घुसकर धीरे-धीरे नदी के पार खेत पर पहुंच गया !!
ऊंट और गीता दोनों खेत में घुस जाते हैं और पेट भर खूब तरबूज खाते हैं जब दोनों का पेट भर जाता है तभी गीदड़ जोर-जोर से अपनी आवाज में बोलने लगता है ऊंट से डरता है पर गीता नहीं मानता बहुत तेज आवाज में बोले लगता है तभी उधर सो रहे हैं किस की नींद खुल जात और भाग भाग अपने खेत की ओर जाता है देखता है वहां को दिखाई देता है गीता तो किसी तरह पेड़ के पास छुप जाता है मगर ऊंट पर के पेट बड़ी होने के कारण मूड नहीं छुपाता तभी किस डंडा लेकर पहुंचता रोड को बहुत मारता है और गुस्से में हो जाता है जैसे तैसे ऊंट वहां से भागने में कामयाब होता है कैसे बाहर निकलता है दवा किधर के पास पहुंचता है हर एक क**** तो कहां भाग गया था मुझे अकेला छोड़कर देख मुझे मार मार के मेरी पीठ को लाल कर दिया है किसानों ने वोट मन ही मन गीदड़ को खोजने लगता है और वहां से नदी को पार करके बाहर आने की सोचने लगता है !!
तभी ऊंट जिधर का बैठ कर पानी में नदी के पास घुसता है जैसे 20 धारा में पहुंचता है ऊंट नदी में डुबकियां लगाने लगता है गीदड़ डर जाता है और समझ जाता है यह हमसे बदला ले रहा है कहेंगे गिरधर बहुत डरा हुआ रहता है ऊंट उसे पानी में डुबकियां लगा लेता है अब गीता उसी में डूबने लगता है जैसे तैसे किसी तरीके से गीदड़ नदी को पार करता है नदी के बाहर आता है मन में अपने विचार बना देता है कि अब मैं मूड को कभी परेशान नहीं करूंगा !!
उसी दिन से गीदड़ में ऊंट का साथ छोड़ दिया दोनों अलग-अलग रहने लगे इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है कमेंट करो उसे बताएं !!
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