बहुत पुराने समय की बात है,,
रामधनी नाम के दो भाई रहते थे !!
राम बड़ा भाई था धनी छोटा भाई था !!
बड़े भाई को देखकर छोटे भाई के मन में हमेशा गलत भावनाएं रहती थी
एक दिन बाद भाई राम जंगल में ,,,,
लकड़िया बटोरने के लिए जंगल में निकल पड़ा !!
और एक पेड़ से सुखी लड़कियों को ,,
तोड़ने लगा
फिर वह दूसरे पेड़ के पास पहुंचा फिर वह दूसरे पेड़ के पास पहुंचा वहां भी उसने उसे पेड़ से सुखी लड़कियों को तोड़ा फिर आगे बढ़ा जैसे हो तीसरे पेड़ के पास पहुंचा वह पेड़ सब का था से खूब भरे हुए थे वह पेड़ और कोई नहीं था वह जादुई पेड़ था जैसे उसने उसे लड़कियों को तोड़ना चाहा उसे पेड़ ने राम से बोल हे दयालु मनुष्य तो हमारी टहनियों को मत तोड़ो क्योंकि हम फलों से लगे हुए हैं हमें बहुत ही नुकसान हो जाएगा बदले में जो तुम मरोगे मैं तुम्हें दूंगा राम के मन में ललचा उत्पन्न हो गई अब लालच के मन मे ,,,,
उसने कहा तुम मुझे ढेर सारे शॉप दो नहीं तो मैं तुम्हारी टहनियों को तोड़ दूंगा तभी पेड़ ने अपनी कहानियों से राम के ऊपर वार कर दिया उसने राम को अपनी कहानियों से खूब अच्छी तरह से धुलाई की राम वहीं गिर गया और गिर गया कर माफी मांगने लगा मुझे वक्त दो अब मैं दोबारा ऐसी गलती कभी नहीं करूंगा फिर दयाल था वह मान लिया लेकिन इतना करने के बाद वहीं पर पड़ा रहा सूरज ढलने को आए इधर उसके छोटे भाई को चिंताएं होने लगी कि हमारा बड़ा भाई राम किधर है अपने भाई की खोज में घर से निकल पड़ा खोजते खोजत !!
वह अपने भाई के पास जा पहुंचा तब राम ने अपने ऊपर बीती सारी घटनाओं को अपने छोटे भाई से बयान किया उन्होंने भाइयों ने मिलकर उसे पेड़ से माफी मांगी और वहां से घर चले आए उसे दिन से उनके मन में जो भी लालच की भावनाएं थे वह पूरी तरह से निकल गई अब दोनों भाई साथ मिलकर रहने लगी !!!!!!!
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